Chhattisgarh Police
Chhattisgarh Police: छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में तत्कालीन एडिशनल एसपी (ASP) राजेंद्र जायसवाल और स्पा सेंटर संचालक के बीच अवैध वसूली के कथित स्टिंग वीडियो ने पुलिस महकमे में हड़कंप मचा दिया है। इस मामले में संज्ञान लेते हुए गृह विभाग ने एएसपी राजेंद्र जायसवाल को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। निलंबन अवधि के दौरान उन्हें रायपुर पुलिस मुख्यालय (PHQ) में अटैच किया गया है। वर्तमान में जायसवाल गौरेला-पेंड्रा-मरवाही (GPM) जिले में पदस्थ थे, लेकिन बिलासपुर पोस्टिंग के दौरान के उनके कारनामों ने अब उनकी मुश्किलें बढ़ा दी हैं।
छत्तीसगढ़ के गृह मंत्री विजय शर्मा ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए स्पष्ट किया था कि पुलिस अधिकारियों द्वारा धमकाने और वसूली के वायरल वीडियो की निष्पक्ष जांच की जाए। उन्होंने आरोपी अधिकारी को सस्पेंड करने के निर्देश दिए थे, जिसके बाद देर शाम आदेश जारी कर दिया गया। बिलासपुर आईजी डॉ. संजीव शुक्ला के मार्गदर्शन में एसएसपी रजनेश सिंह ने इस पूरे प्रकरण की विस्तृत जांच की और अपनी रिपोर्ट उच्च अधिकारियों को सौंपी है।
सोशल मीडिया पर वायरल हुए वीडियो में कथित तौर पर दिख रहा है कि एक्वा स्पा संचालक अमन सेन और 36 मॉल के मैनेजर आशीष सिंह चंदेल एएसपी राजेंद्र जायसवाल के दफ्तर में मौजूद हैं। वीडियो में एएसपी को यह कहते सुना जा सकता है कि “तुम्हें काम नहीं करना है क्या? जो कमिटमेंट है, वह हो जानी चाहिए, नहीं तो मैं रेड मारने के लिए टीम भेजूंगा।” अधिकारी ने यह भी धमकी दी कि रेड पड़ने से उन्हें कोई फर्क नहीं पड़ेगा, लेकिन संचालक का धंधा चौपट हो जाएगा।
स्पा संचालक अमन सेन ने आईजी को दी गई अपनी लिखित शिकायत में पुलिस की अवैध वसूली का कच्चा चिट्ठा खोला है। संचालक का आरोप है कि सिविल लाइन पुलिस हर महीने अवैध वसूली करती थी। पहले वह थाने में 40 हजार रुपये देता था, जो बाद में घटकर 25 हजार हुए। लेकिन बाद में उन पर दबाव बनाया गया कि 30 हजार रुपये अलग से तत्कालीन एएसपी राजेंद्र जायसवाल को देने होंगे। पैसे देने में असमर्थता जताने पर पुलिस ने छापेमारी और बिजनेस खत्म करने की धमकी दी।
विवाद की शुरुआत 7 जनवरी 2026 को हुई, जब बिलासपुर सिटी एएसपी पंकज पटेल और सीएसपी निमितेश सिंह की टीम ने एक्वा स्पा सहित 6 केंद्रों पर छापेमारी की। इस दौरान पुलिस को कुछ संदिग्ध गतिविधियां और रिकॉर्ड में खामियां मिलीं, जिसके बाद संचालक के खिलाफ कार्रवाई की गई। इसके ठीक दो दिन बाद, 9 जनवरी को संचालक ने साक्ष्यों के साथ आईजी से शिकायत की और एएसपी के साथ हुई गुप्त बातचीत का वीडियो सार्वजनिक कर दिया।
निलंबित एएसपी राजेंद्र जायसवाल ने इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज किया है। उनका कहना है कि उनकी छवि खराब करने के लिए साजिश रची गई है और वीडियो के साथ छेड़छाड़ की गई है। हालांकि, एसएसपी रजनेश सिंह की जांच रिपोर्ट में प्रथम दृष्टया अधिकारी की भूमिका संदिग्ध पाई गई है। गृह विभाग अब विभागीय जांच के जरिए यह पता लगाने की कोशिश कर रहा है कि इस वसूली रैकेट में और कौन-कौन से पुलिसकर्मी शामिल थे।
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