Chhattisgarh Politics
Chhattisgarh Politics: दिल्ली से लौटने के बाद छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री और वरिष्ठ कांग्रेस नेता भूपेश बघेल ने केंद्र और राज्य सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कांग्रेस आलाकमान से अपनी मुलाकात और देश में चल रहे राजनीतिक घटनाक्रमों पर विस्तार से बात की। बघेल ने बताया कि उन्होंने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, राहुल गांधी और प्रियंका गांधी से मुलाकात की और विभिन्न मुद्दों पर चर्चा की। उन्होंने दावा किया कि देश में चल रहे विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के खिलाफ जनभावना इतनी मजबूत थी कि सरकार को झुकना पड़ा और इस विवादास्पद मुद्दे पर संसद में चर्चा के लिए तैयार होना पड़ा। बघेल ने तंज कसते हुए कहा कि अगर सरकार पहले ही मान लेती तो संसद के दो दिन बर्बाद नहीं होते, जिसकी पूरी जिम्मेदारी केंद्र सरकार की है।
पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने राज्य की नई जमीन गाइडलाइन को लेकर बीजेपी विधायक और मंत्री बृजमोहन अग्रवाल की चिट्ठी पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए उन पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि अग्रवाल स्वयं यह बता रहे हैं कि सरकार में उनकी चलती नहीं है। बघेल ने अपनी सरकार के कार्यकाल की याद दिलाते हुए कहा, “हमने गाइडलाइन को 30% कम किया था, जिससे रियल एस्टेट सेक्टर में जान आ गई थी और मध्यम वर्ग (मिडिल क्लास) के लोग भी आसानी से अपने घर का सपना पूरा कर पा रहे थे।” उन्होंने आरोप लगाया कि अब नई गाइडलाइन इतनी महंगी हो गई है कि बड़े लोग भी जमीन नहीं खरीद पाएंगे। बघेल ने कटाक्ष करते हुए कहा कि शायद वर्तमान सरकार अपने ‘आकाओं’ के करीबी लोगों के लिए कोई खास योजना ला रही है।
छत्तीसगढ़ में वर्तमान सरकार के दो साल पूरे होने से पहले ही लोगों में पनपी निराशा पर पूर्व सीएम बघेल ने कड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि सरकार के दो साल पूरे होने से पहले ही लोग सड़कों पर उतर आए हैं। उन्होंने दावा किया कि व्यापारी, बेरोजगार युवा, और सरकारी कर्मचारी — सब परेशान हैं और राज्य में सरकार नाम की कोई चीज नहीं है। बघेल ने आरोप लगाया कि यह एक ‘पर्ची वाली सरकार’ है, जिसका संचालन और निर्णय अहमदाबाद और दिल्ली से होता है, न कि रायपुर से। उनका यह बयान राज्य सरकार के निर्णय लेने की स्वायत्तता (Autonomy) पर सवाल उठाता है।
सरगुजा संभाग के अंबिकापुर कोयला खदान विवाद पर बोलते हुए भूपेश बघेल ने सरकार की कार्यप्रणाली पर उंगली उठाई। उन्होंने चेतावनी दी कि “नियमों का पालन नहीं होगा तो टकराव होगा।” उन्होंने गरीब और स्थानीय लोगों के अधिकारों की बात करते हुए कहा, “अगर उनकी जमीन छीनी जाएगी और उन्हें उचित मुआवजा नहीं मिलेगा तो गरीब क्या करेंगे?” बघेल ने कहा कि भिलाई और दुर्ग के बाद अब सरगुजा में भी आंदोलन हो रहे हैं, जो लगातार यह दर्शाते हैं कि ये सब वर्तमान सरकार के ‘निकम्मेपन’ का सीधा नतीजा है।
बीजापुर मुठभेड़ में 12 नक्सलियों के मारे जाने और 3 जवानों की शहादत पर पूर्व सीएम बघेल ने शहीद जवानों को श्रद्धांजलि दी और उनके परिवारों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त की।
उन्होंने प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) का नाम बदलकर ‘सेवा तीर्थ’ करने पर भी तंज कसा। बघेल ने कहा कि प्रभु के दर्शन के लिए लोग तीर्थ पर जाते हैं और अब PMO को ही तीर्थ घोषित कर दिया गया है। उन्होंने कटाक्ष करते हुए पूछा कि क्या यह आम जनता के लिए खोला जाएगा, और कहीं VIP और आम भक्त के लिए अलग-अलग व्यवस्था तो नहीं होगी? उन्होंने आरोप लगाया कि इस ‘तीर्थ’ में आम लोगों के लिए कोई जगह नहीं है।
अंत में, नेहरू-बाबरी मस्जिद बयान पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की टिप्पणी को लेकर बघेल ने कहा कि वह राजनाथ सिंह को एक गंभीर मंत्री मानते थे, लेकिन उन्होंने एक ‘हल्का बयान’ दिया है। उन्होंने राजनाथ सिंह को सलाह दी कि यदि उनके पास कोई तथ्य हैं तो उन्हें सामने रखें और समाज को बांटने का काम न करें। उन्होंने सवाल किया कि वे 50-60 साल पुरानी बातें उठाते हैं, लेकिन वर्तमान मुद्दों पर चुप क्यों हैं?
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