Chhattisgarh Politics
Chhattisgarh Politics: छत्तीसगढ़ के भिलाई में बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री की ‘हनुमंत कथा’ का आयोजन हो रहा है। जैसे-जैसे कथा अपने चौथे दिन की ओर बढ़ी, इसके इर्द-गिर्द राजनीतिक सरगर्मी भी चरम पर पहुँच गई। धर्म और अध्यात्म के इस मंच पर अब सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बयानबाजी शुरू हो गई है। विवाद की मुख्य वजह धीरेंद्र शास्त्री को दिया गया प्रोटोकॉल और उनके द्वारा राज्य सरकार के आधिकारिक विमान का उपयोग करना है। इस मुद्दे ने छत्तीसगढ़ की राजनीति में एक नया विवाद खड़ा कर दिया है, जहाँ अब सनातन धर्म और राजनीतिक विचारधाराओं के बीच सीधी जंग छिड़ गई है।
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री पर कड़ा प्रहार करते हुए उन्हें भारतीय जनता पार्टी का ‘एजेंट’ और ‘प्रचारक’ करार दिया है। बघेल ने आरोप लगाया कि बाबा बागेश्वर एक विशेष राजनीतिक दल के एजेंडे को आगे बढ़ा रहे हैं। उन्होंने राज्य सरकार को घेरते हुए कहा कि सरकारी विमान का उपयोग किसी धार्मिक कथावाचक के लिए करना संवैधानिक मर्यादाओं का उल्लंघन है। बघेल ने धीरेंद्र शास्त्री को खुली चुनौती देते हुए कहा कि धर्म की आड़ में राजनीति करना बंद होना चाहिए। उनके इस बयान ने सोशल मीडिया से लेकर गलियारों तक हलचल मचा दी है।
भूपेश बघेल के आरोपों पर धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने भी अपने चिर-परिचित अंदाज में पलटवार किया। उन्होंने राष्ट्र और हनुमान भक्ति को सर्वोपरि बताते हुए कहा कि जो लोग सनातन का विरोध कर रहे हैं, उन्हें देश छोड़ने की तैयारी कर लेनी चाहिए। बघेल के हमलों का जवाब देते हुए बाबा ने तंज कसा और नसीहत दी कि “हर चीज का इलाज चर्च नहीं होता।” उनका इशारा धर्मांतरण और तुष्टीकरण की राजनीति की ओर था। धीरेंद्र शास्त्री ने स्पष्ट किया कि वे किसी दल के नहीं बल्कि बजरंगबली के प्रचारक हैं और सनातन धर्म की रक्षा के लिए वे अपनी आवाज उठाते रहेंगे।
इस विवाद के बीच वर्तमान मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय, विधानसभा अध्यक्ष रमन सिंह और कई अन्य भाजपा नेताओं ने कथा स्थल पर पहुँचकर व्यास पीठ का आशीर्वाद लिया। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कांग्रेस पर पलटवार करते हुए कहा कि बागेश्वर सरकार के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणी करना पूरे सनातन समाज का अपमान है। उन्होंने बाबा को राजकीय अतिथि जैसा सम्मान देने और सरकारी विमान के उपयोग को न्यायोचित ठहराया। भाजपा नेतृत्व का मानना है कि कांग्रेस की छटपटाहट उनकी ‘हिंदू विरोधी’ मानसिकता को दर्शाती है।
कांग्रेस का मुख्य विरोध धीरेंद्र शास्त्री को दिए गए सुरक्षा घेरे और सरकारी विमान के इस्तेमाल को लेकर है। कांग्रेस नेताओं का तर्क है कि राज्य के संसाधनों का उपयोग किसी निजी धार्मिक आयोजन के लिए नहीं किया जाना चाहिए। वहीं, सरकार के समर्थकों का तर्क है कि धीरेंद्र शास्त्री को देखने के लिए लाखों की भीड़ जुटती है, ऐसे में सुरक्षा और व्यवस्था बनाए रखने के लिए प्रोटोकॉल का पालन करना अनिवार्य है। इस खींचतान ने यह स्पष्ट कर दिया है कि आने वाले विधानसभा सत्र या राजनीतिक सभाओं में यह मुद्दा और भी तूल पकड़ेगा।
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