RTE Admission
RTE Admission : छत्तीसगढ़ में निजी स्कूल संचालकों द्वारा अपनी विभिन्न मांगों को लेकर चलाए जा रहे असहयोग आंदोलन के बीच एक बड़ी और राहत भरी खबर सामने आई है। निजी स्कूलों ने बच्चों के शैक्षणिक भविष्य को ध्यान में रखते हुए शिक्षा का अधिकार (आरटीई) के तहत प्रवेश प्रक्रिया शुरू करने की आधिकारिक घोषणा कर दी है। छत्तीसगढ़ प्राइवेट स्कूल मैनेजमेंट एसोसिएशन के प्रांतीय अध्यक्ष राजीव गुप्ता ने इस संबंध में जानकारी देते हुए बताया कि आर्थिक रूप से कमजोर और वंचित वर्ग के बच्चों के भविष्य को अधर में न छोड़ते हुए एसोसिएशन ने 18 मई से आरटीई के तहत दाखिले की अनुमति देने का निर्णय लिया है।
प्रशासनिक शिड्यूल के अनुसार, राज्य में आरटीई के तहत प्रवेश की यह महत्वपूर्ण प्रक्रिया 1 अप्रैल 2026 से ही शुरू होनी थी। परंतु, राज्य सरकार की नीतियों और अपनी लंबित मांगों को लेकर निजी स्कूल प्रबंधकों द्वारा किए जा रहे कड़े विरोध एवं आंदोलन के कारण यह प्रक्रिया समय पर प्रारंभ नहीं हो सकी। अब करीब डेढ़ महीने की लंबी देरी के बाद आखिरकार स्कूलों के पोर्टल और दाखिले के दरवाजे खुले हैं। इस बीच, प्रदेश के स्कूल शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव ने संकट के समय में निजी स्कूलों द्वारा लिए गए इस जनहितैषी फैसले का खुले दिल से स्वागत किया है।
अपनी घोषणा के बावजूद, निजी स्कूल संचालक अपनी पुरानी मांगों से पीछे नहीं हटे हैं और वे आरटीई के तहत मिलने वाली प्रतिपूर्ति (फीस रीइंबर्समेंट) राशि को बढ़ाने की मांग पर लगातार अड़े हुए हैं। इसके साथ ही निजी स्कूल प्रबंधकों की एक प्रमुख मांग यह भी है कि आरटीई में प्रवेश के लिए शुरुआती स्तर यानी ‘एंट्री प्वाइंट’ के रूप में केवल पहली कक्षा को न रखकर, केजी-1 और नर्सरी जैसी प्राथमिक कक्षाओं को भी अनिवार्य रूप से शामिल किया जाना चाहिए, ताकि छोटे बच्चों को शुरुआत से ही इसका लाभ मिल सके।
यदि वर्तमान वित्तीय ढांचे की बात करें, तो छत्तीसगढ़ राज्य सरकार द्वारा आरटीई के अंतर्गत दाखिला लेने वाले विद्यार्थियों के लिए निजी स्कूलों को प्रतिवर्ष एक निश्चित प्रतिपूर्ति राशि दी जाती है। इस व्यवस्था के तहत पहली कक्षा से लेकर पांचवीं कक्षा तक के प्रति विद्यार्थी के लिए 7,000 रुपये प्रतिवर्ष निर्धारित हैं। वहीं, छठवीं से आठवीं कक्षा के विद्यार्थियों के लिए यह राशि 11,400 रुपये सालाना है, जबकि नौवीं कक्षा से लेकर बारहवीं कक्षा तक के छात्रों के लिए सरकार द्वारा 15,000 रुपये की प्रतिपूर्ति राशि तय की गई है।
निजी स्कूल प्रबंधन संघ का आरोप है कि छत्तीसगढ़ में 1 अप्रैल 2011 से आरटीई के तहत गरीब बच्चों को प्रवेश देने की व्यवस्था सुचारू रूप से लागू है। लेकिन बेहद अफसोस की बात है कि पिछले 15 वर्षों के लंबे अंतराल में सरकार द्वारा इस प्रतिपूर्ति राशि में एक रुपये की भी बढ़ोतरी नहीं की गई है। उनका कहना है कि डेढ़ दशक में महंगाई के कारण शिक्षकों के वेतन, बिजली, भवन रखरखाव और स्कूल संचालन की बुनियादी लागत कई गुना बढ़ चुकी है, जिससे अब पुराने शुल्क पर स्कूल चलाना असंभव हो गया है।
इस शैक्षणिक सत्र में आरटीई के तहत दाखिला पाने के लिए राज्य भर से रिकॉर्ड संख्या में आवेदन आए हैं। आंकड़ों के अनुसार, इस वर्ष कुल 3,08,439 छात्र-छात्राओं ने मुफ्त शिक्षा के लिए आवेदन फॉर्म जमा किए हैं। छत्तीसगढ़ प्रदेश के सभी 33 जिलों में फैले कुल 6,867 पंजीकृत निजी स्कूलों में आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के बच्चों के लिए इस वर्ष कुल 22,013 सीटें आरक्षित की गई हैं, जिन पर अब 18 मई से प्रवेश की प्रक्रिया तेजी से पूरी की जाएगी।
स्कूल शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव ने कहा कि आरटीई में दाखिला देने के लिए निजी स्कूलों द्वारा समय रहते लिए गए इस सकारात्मक निर्णय की मैं सराहना करता हूँ, सरकार बहुत जल्द उनकी जायज मांगों पर गंभीरता से विचार करेगी। दूसरी तरफ, छत्तीसगढ़ प्राइवेट स्कूल मैनेजमेंट एसोसिएशन के अध्यक्ष राजीव गुप्ता ने स्पष्ट किया कि सरकार के खिलाफ हमारा असहयोग आंदोलन तब तक जारी रहेगा, जब तक हमारी मांगें पूरी नहीं हो जातीं। हमने केवल गरीब और वंचित वर्ग के मासूम बच्चों के हित को सर्वोपरि मानते हुए यह संवेदनशील और सामयिक निर्णय लिया है।
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