Chhattisgarh RTE crisis
Chhattisgarh RTE crisis : छत्तीसगढ़ में शिक्षा के अधिकार (RTE) के तहत गरीब बच्चों के निजी स्कूलों में प्रवेश को लेकर एक बड़ा गतिरोध पैदा हो गया है। प्रदेश के निजी स्कूल संचालकों ने सरकार के खिलाफ ‘असहयोग आंदोलन’ का बिगुल फूंकते हुए स्पष्ट कर दिया है कि वे इस शैक्षणिक सत्र में आरटीई के तहत होने वाले दाखिलों की प्रक्रिया में हिस्सा नहीं लेंगे। छत्तीसगढ़ प्राइवेट स्कूल मैनेजमेंट एसोसिएशन के इस कड़े फैसले से राज्य की 54,824 आरटीई सीटों पर प्रवेश लेने की आस लगाए बैठे बच्चों और उनके अभिभावकों के सामने अनिश्चितता के बादल मंडराने लगे हैं।
प्राइवेट स्कूल एसोसिएशन के अध्यक्ष राजीव गुप्ता ने इस निर्णय के पीछे मुख्य कारण शासन की लंबे समय से चली आ रही अनदेखी को बताया है। उनके अनुसार, वर्ष 2011 से आरटीई के तहत मिलने वाली प्रतिपूर्ति (Reimbursement) राशि में कोई बढ़ोतरी नहीं की गई है। वर्तमान में शासन द्वारा दी जाने वाली राशि इस प्रकार है:
कक्षा 1 से 5 तक: ₹7,000 प्रति छात्र/वर्ष
कक्षा 6 से 8 तक: ₹11,400 प्रति छात्र/वर्ष
कक्षा 9 से 12 तक: ₹15,000 प्रति छात्र/वर्ष (2018 से प्रभावी) स्कूलों का तर्क है कि बढ़ती महंगाई, बिजली बिल, शिक्षकों के वेतन और रखरखाव के खर्च के बीच 14 साल पुरानी दरों पर गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देना अब व्यावहारिक रूप से संभव नहीं रह गया है।
इस आंदोलन का व्यापक असर प्रदेश के 6,000 से अधिक निजी स्कूलों पर पड़ेगा। एसोसिएशन ने घोषणा की है कि वे शिक्षा विभाग द्वारा जारी किसी भी नोटिस या पत्र का जवाब नहीं देंगे। साथ ही, आरटीई पोर्टल के माध्यम से होने वाली लॉटरी या ऑनलाइन चयन प्रक्रिया में भी स्कूल प्रबंधन सहयोग नहीं करेगा। स्कूलों का कहना है कि वे मजबूरी में यह कदम उठा रहे हैं, क्योंकि बार-बार अनुरोध के बावजूद प्रशासन के कान पर जूं नहीं रेंग रही है।
निजी स्कूल प्रबंधन ने इस मुद्दे पर कानूनी लड़ाई का भी सहारा लिया है। एसोसिएशन ने जानकारी दी कि 2025 में छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने एक याचिका पर सुनवाई करते हुए शासन को 6 महीने के भीतर फीस प्रतिपूर्ति पर निर्णय लेने का निर्देश दिया था। प्रबंधन का आरोप है कि कोर्ट की समय सीमा समाप्त होने के बावजूद स्कूल शिक्षा विभाग ने अब तक कोई ठोस प्रस्ताव या निर्णय नहीं लिया है। इसी ‘प्रशासनिक सुस्ती’ के कारण स्कूलों ने मार्च से ही असहयोग आंदोलन शुरू कर दिया था।
दूसरी ओर, स्कूल शिक्षा विभाग के अधिकारियों का कहना है कि आरटीई सीटों का निर्धारण अब यू-डाइस (U-DISE) पोर्टल पर दर्ज आंकड़ों के आधार पर किया जा रहा है। इससे निजी स्कूलों द्वारा सीटों की संख्या को लेकर दी जाने वाली भ्रामक जानकारी पर रोक लगी है। सरकार का मानना है कि पारदर्शी प्रक्रिया से पात्र बच्चों को लाभ मिल रहा है। हालांकि, विभाग ने अभी तक फीस बढ़ोतरी की मांग पर कोई स्पष्ट आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है, जिससे टकराव की स्थिति और गंभीर हो गई है।
इस पूरे विवाद का सबसे दुखद पहलू उन गरीब और वंचित वर्ग के बच्चों पर पड़ने वाला प्रभाव है, जिनके लिए आरटीई निजी स्कूलों में पढ़ने का एकमात्र जरिया है। एसोसिएशन ने स्पष्ट किया है कि जब तक सरकार अन्य राज्यों की तर्ज पर व्यावहारिक दरें तय नहीं करती और लंबित भुगतान नहीं करती, तब तक वे प्रवेश की अनुमति नहीं देंगे। अभिभावकों के बीच अब यह चिंता व्याप्त है कि यदि स्कूलों ने प्रवेश नहीं दिया, तो उनके बच्चों का एक साल खराब हो सकता है। फिलहाल, गेंद सरकार के पाले में है और प्रदेश की नजरें शिक्षा विभाग के अगले कदम पर टिकी हैं।
Kushinagar ISIS Arrest : देश की आंतरिक सुरक्षा को लेकर सुरक्षा एजेंसियां हाई अलर्ट पर…
RR vs GT highlights : इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) 2026 के एक बेहद रोमांचक मुकाबले…
Bengal Election 2026 : पश्चिम बंगाल में सत्ता के महासंग्राम के लिए राजनीतिक बिसात बिछ…
Jaggi Murder Case : छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित राम अवतार जग्गी हत्याकांड में एक नया कानूनी…
Kerala Election 2026 : केरलम विधानसभा चुनाव 2026 के रण में उतरे उम्मीदवारों के प्रोफाइल…
Balrampur CMO viral : छत्तीसगढ़ के बलरामपुर नगर पालिका परिषद में प्रशासनिक गलियारों से लेकर…
This website uses cookies.