SIA filed chargesheet: छत्तीसगढ़ में माओवादियों के खतरनाक शहरी नेटवर्क को लेकर राज्य अन्वेषण अभिकरण (SIA) ने एक बहुत बड़ा खुलासा किया है। मंगलवार, 17 मार्च 2026 को SIA ने बिलासपुर की विशेष अदालत में गिरफ्तार किए गए 9 नक्सलियों के विरुद्ध विस्तार से अभियोग पत्र (चार्जशीट) दाखिल किया। जांच में यह चौंकाने वाली सच्चाई सामने आई है कि ये नक्सली राजधानी रायपुर के पॉश और रिहायशी इलाकों में अपनी पहचान छिपाकर रह रहे थे। खुद को दिहाड़ी मजदूर बताकर इन्होंने किराए पर मकान लिए थे, ताकि सुरक्षा एजेंसियों को उन पर रत्ती भर भी शक न हो। असल में, ये रिहायशी इलाके माओवादी संगठन के लिए सूचनाओं के आदान-प्रदान का सबसे सुरक्षित अड्डा बन चुके थे।

चंगोराभाठा बना नेटवर्क का केंद्र: पेनड्राइव और कोडवर्ड से होती थी बात
SIA की जांच के अनुसार, माओवादी संगठन का सक्रिय सदस्य पवन उर्फ आकाश उर्फ पुष्कर मुआर्य रायपुर के चंगोराभाठा इलाके में एक सामान्य मजदूर के रूप में रह रहा था। उसने न केवल खुद को स्थापित किया, बल्कि संगठन के डिवीजनल कमेटी (DVC) सदस्य जग्गू कुरसम और उसकी पत्नी कमला कुरसम को भी वहीं छिपाकर रखा। यह मकान शहरी नेटवर्क का मुख्य कंट्रोल रूम बन गया था। नक्सली यहां से पेनड्राइव और बंद लिफाफों में गुप्त पत्र लिखकर जंगलों में बैठे अपने आकाओं तक रणनीतिक जानकारियां पहुँचाते थे। रायपुर, सिमगा, नवापारा राजिम और बिलासपुर जैसे शहरों में इनकी गोपनीय बैठकें होती थीं, जिनमें शामिल होने के लिए विशेष ‘कोडवर्ड’ का उपयोग किया जाता था।
सोना, नकदी और तकनीक: नक्सलियों के पास से बरामद हुआ भारी जखीरा
SIA ने जब रायपुर, बीजापुर और नारायणपुर में एक साथ दबिश दी, तो इस नेटवर्क के पास से आधुनिक उपकरण और भारी संपत्ति बरामद हुई। गिरफ्तार नक्सलियों के पास से 300 ग्राम सोने के बिस्किट, 2.5 लाख रुपये नकद, लैपटॉप, बड़ी संख्या में पेनड्राइव और मोबाइल फोन जब्त किए गए हैं। ये कूरियर का काम करने वाले नक्सली, जैसे गिरधर नाग और संदेव पोडियम, जंगल से शहर तक विस्फोटक सामग्री पहुँचाने और शहर से जरूरत का सामान वापस ले जाने का जिम्मा संभालते थे। जग्गू कुरसम और उसकी पत्नी के पकड़े जाने के बाद पुलिस को सोने के बिस्किट और नकदी के अलावा कई डिजिटल साक्ष्य भी मिले हैं, जो शहरी नेटवर्क की गहरी पैठ की ओर इशारा करते हैं।
खुफिया इनपुट और तकनीकी निगरानी: ऐसे शिकंजे में आए नक्सली
इस पूरे ऑपरेशन की सफलता के पीछे इंटेलिजेंस एजेंसियों का कॉल इंटरसेप्शन और तकनीकी विश्लेषण रहा। एजेंसियों को इनपुट मिला था कि रायपुर की लोकेशन से बस्तर के नक्सली बेल्ट में लगातार संपर्क साधा जा रहा है। इसी तकनीकी सुराग के आधार पर रायपुर के डीडी नगर थाना क्षेत्र में दबिश दी गई। पड़ोसियों के अनुसार, देर रात सिविल ड्रेस में पहुंची टीम ने दरवाजा खुलवाते ही आरोपियों को दबोच लिया। बता दें कि इस मामले में 23 सितंबर 2025 को एफआईआर दर्ज हुई थी, जिसके बाद इसकी संवेदनशीलता देखते हुए विवेचना SIA को सौंप दी गई थी।
गिरफ्तार नक्सलियों की सूची और उनके संगठनात्मक दायित्व
SIA द्वारा गिरफ्तार किए गए 9 आरोपियों के खिलाफ गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) और भारतीय न्याय संहिता (BNS) की गंभीर धाराओं के तहत कार्रवाई की गई है। पकड़े गए प्रमुख चेहरों में जग्गू कुरसम, कमला कुरसम और पवन शामिल हैं, जो मुख्य रूप से शहरों में रेकी करने और खुफिया जानकारी जुटाने का काम करते थे। इनके अलावा रामा इचाम, धनसिंग गावड़े, संदेव पोडियामी, गिरधर नाग, सुकारो कोरसा और शंकर कोरसा कूरियर के रूप में काम करते थे, जिनका काम जंगल में सक्रिय नेताओं तक रसद और सूचनाएं पहुँचाना था। चार्जशीट दाखिल होने के बाद अब इस नेटवर्क के अन्य मददगारों और सफेदपोश संपर्कों पर भी पुलिस का शिकंजा कसना तय माना जा रहा है।


















