Tribal Girl Burnt Alive: छत्तीसगढ़ के सक्ती जिले से एक ख़ौफनाक मामला सामने आया है, जहाँ एक मां ने अपनी ही बेटी के प्रेमी पर उसे जिंदा जलाने का गंभीर आरोप लगाया है। 23 वर्षीय कॉलेज छात्रा दिशा मरावी ने बिलासपुर के एक अस्पताल में आठ दिनों तक जिंदगी और मौत के बीच जंग लड़ने के बाद दम तोड़ दिया। मृतका की मां, जो पेशे से सरकारी स्कूल में लेक्चरर हैं, का आरोप है कि उनकी बेटी को सोची-समझी साजिश के तहत आग के हवाले किया गया। इस घटना ने पूरे क्षेत्र में सनसनी फैला दी है और पुलिस की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

प्रेम प्रसंग और जघन्य हत्याकांड का आरोप
जानकारी के अनुसार, दिशा मरावी और सकरेली कला निवासी सब्जी व्यापारी योगेंद्र साहू के बीच लंबे समय से प्रेम संबंध थे। दिशा अपनी मां मीना मरावी के साथ वार्ड नंबर-11 झूलकदम में रहती थी। आरोप है कि 24 जनवरी 2026 की दोपहर योगेंद्र ने दिशा को बाराद्वार रोड स्थित एक होटल में मिलने के लिए बुलाया। वहां किसी बात को लेकर दोनों के बीच विवाद हुआ, जिसके बाद आरोपी ने कथित तौर पर दिशा पर तारपीन का तेल छिड़क कर उसे आग लगा दी। घटना के बाद आरोपी के दोस्तों ने उसे गंभीर हालत में अस्पताल पहुंचाया, लेकिन पुलिस ने अब तक मुख्य आरोपी को गिरफ्तार नहीं किया है।
अस्पताल ले जाते समय पीड़िता ने बयां की दास्तां
मीना मरावी ने बताया कि जब वे अस्पताल पहुंचीं, तो दिशा ने मरणासन्न स्थिति में पूरी आपबीती सुनाई थी। दिशा ने बताया था कि होटल में विवाद के बाद उसके साथ मारपीट की गई और फिर उसे जला दिया गया। मां का दावा है कि आरोपी ने दिशा को डराया-धमकाया भी था ताकि वह बयान बदल दे और घटना को किसी और जगह का बताए। पीड़िता की मां ने अब सवाल उठाया है कि क्या पुलिस ने दिशा का मृत्युपूर्व बयान (Dying Declaration) दर्ज किया है? यदि किया है, तो परिवार को इस बारे में अंधेरे में क्यों रखा गया है।
पुलिस की सुस्ती और मां का ‘आदिवासी’ होने के कारण भेदभाव का आरोप
पीड़िता की मां ने सक्ती पुलिस पर निष्क्रियता का आरोप लगाते हुए कहा है कि उनके आदिवासी होने के कारण न्याय मिलने में देरी की जा रही है। उनका कहना है कि पुलिस पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट और केस डायरी का इंतजार करने की बात कहकर मामले को टाल रही है। 1 फरवरी को बिलासपुर के आईसीयू में हुई मौत के बाद ‘शून्य’ पर मामला तो दर्ज हुआ, लेकिन सक्ती पुलिस ने अब तक नामजद आरोपियों—योगेंद्र साहू, महेंद्र कुमार सिदार और आशीष पटेल—को हिरासत में नहीं लिया है। मां ने मामले की निष्पक्ष जांच और सीसीटीवी फुटेज खंगालने की मांग करते हुए मुख्यमंत्री से न्याय की गुहार लगाई है।
अज्ञात कॉल से खुली पोल और जांच की वर्तमान स्थिति
घटना के दिन मीना मरावी को एक अनजान नंबर से फोन आया था, जिससे उन्हें दिशा के अस्पताल में भर्ती होने की जानकारी मिली। फिलहाल, सक्ती पुलिस का कहना है कि वे बिलासपुर से रिपोर्ट मिलने का इंतजार कर रहे हैं। हालांकि, होटल में हुई इस वारदात के प्रत्यक्षदर्शियों और वहां मौजूद कर्मचारियों से पूछताछ की स्थिति अभी तक स्पष्ट नहीं है। मां ने आशंका जताई है कि आरोपियों को राजनीतिक या सामाजिक दबाव के कारण बचाया जा रहा है। अब सबकी नजरें इस बात पर टिकी हैं कि क्या प्रशासन इस आदिवासी परिवार को न्याय दिला पाएगा या यह मामला रसूखदारों के दबाव में दब जाएगा।
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