Chhattisgarh Weather
Chhattisgarh Weather: छत्तीसगढ़ के मैदानी और पठारी इलाकों में गर्मी ने अपना प्रचंड रूप दिखाना शुरू कर दिया है। वर्तमान में प्रदेश का अधिकतम तापमान सामान्य श्रेणी से लगभग 2 से 4 डिग्री सेल्सियस अधिक दर्ज किया जा रहा है, जिससे दोपहर के समय लू जैसे हालात महसूस होने लगे हैं। मौसम विज्ञानियों के अनुसार, अगले 48 घंटों तक गर्मी के तेवर इसी तरह तीखे बने रहेंगे और तापमान में किसी बड़े बदलाव की गुंजाइश नहीं है। हालांकि, राहत की बात यह है कि इस अवधि के बाद पारा गिरने के संकेत मिले हैं।
जहाँ एक ओर उत्तर और मध्य छत्तीसगढ़ गर्मी से जूझ रहे हैं, वहीं दक्षिण छत्तीसगढ़ (बस्तर संभाग) के जिलों में मौसम विभाग ने चेतावनी जारी की है। 13 और 14 मार्च को सुकमा, दंतेवाड़ा और बीजापुर जैसे इलाकों में तेज हवाओं के साथ गरज-चमक की स्थिति बन सकती है। कुछ स्थानों पर वज्रपात (आकाशीय बिजली) गिरने और बहुत हल्की बूंदाबांदी के भी आसार हैं, जिससे स्थानीय स्तर पर उमस और फिर हल्की ठंडक महसूस की जा सकती है।
मौसम विभाग की रिपोर्ट के अनुसार, पिछले 24 घंटों के दौरान छत्तीसगढ़ का मौसम पूरी तरह शुष्क बना रहा। प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में सुबह से ही तेज धूप निकलने के कारण जनजीवन प्रभावित हुआ। गर्म हवाओं के चलने से दिन के तापमान में निरंतर वृद्धि देखी गई है, जिससे मार्च के महीने में ही अप्रैल जैसी तपिश का अहसास होने लगा है।
तापमान के आंकड़ों पर नजर डालें तो प्रदेश में विषमताएं देखने को मिल रही हैं। राजनांदगांव जिला प्रदेश में सबसे गर्म स्थान रहा, जहाँ अधिकतम तापमान 40.0 डिग्री सेल्सियस तक जा पहुँचा। यह इस सीजन का अब तक का सबसे उच्चतम स्तर है। दूसरी ओर, उत्तर छत्तीसगढ़ के अंबिकापुर में न्यूनतम तापमान 13.7 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया, जो इसे प्रदेश का सबसे ठंडा इलाका बनाए हुए है।
मौसम विभाग ने विशेष रूप से दक्षिणी क्षेत्रों के निवासियों को सतर्क रहने की सलाह दी है। अनुमान है कि 13 और 14 मार्च को कुछ स्थानों पर हवा की गति 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटा तक पहुँच सकती है। धूल भरी आंधी और गरज-चमक के साथ होने वाली यह मौसमी हलचल फसलों और कच्चे मकानों के लिए आंशिक खतरा पैदा कर सकती है।
मौसम में अचानक आ रहे इस बदलाव के पीछे मुख्य रूप से वायुमंडलीय प्रणालियाँ जिम्मेदार हैं। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, बांग्लादेश और उससे सटे पश्चिम बंगाल के गंगा के मैदानी इलाकों के ऊपर एक चक्रवाती परिसंचरण सक्रिय हो गया है। यह सिस्टम समुद्र तल से लगभग 1.5 किलोमीटर की ऊंचाई तक फैला हुआ है। इसके अतिरिक्त, निचले वायुमंडल में पश्चिमी हवाओं के बीच एक ‘द्रोणिका’ (Trough) भी बनी हुई है, जो नमी खींचकर बादलों के निर्माण में मदद कर रही है।
वर्तमान में भीषण गर्मी का सामना कर रहे छत्तीसगढ़ वासियों के लिए राहत भरी खबर यह है कि जल्द ही पारे में गिरावट आएगी। मौसम विभाग का अनुमान है कि दो दिनों के बाद प्रदेश के अधिकतम तापमान में 3 से 5 डिग्री सेल्सियस की कमी दर्ज की जा सकती है। बादलों की आवाजाही और हवाओं की दिशा बदलने से चिलचिलाती धूप का असर कम होगा।
राजधानी रायपुर के लिए स्थानीय पूर्वानुमान में बताया गया है कि 13 मार्च को शहर के आसमान में सुबह के वक्त हल्की धुंध या कोहरा छाया रह सकता है। रायपुर का अधिकतम तापमान 38 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 22 डिग्री सेल्सियस के आसपास रहने की संभावना है। हालांकि, उमस बढ़ने से बेचैनी महसूस हो सकती है।
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