Chhattisgarh Weather Update
Chhattisgarh Weather Update: छत्तीसगढ़ में मार्च के महीने में मौसम ने एक बार फिर अप्रत्याशित करवट ले ली है। प्रदेश के कई हिस्सों में अचानक हुई हल्की से मध्यम बारिश और ओलावृष्टि ने सामान्य जनजीवन को प्रभावित किया है। इस मौसमी बदलाव के कारण प्रदेश के अधिकतम तापमान में भारी गिरावट दर्ज की गई है, जिससे चिलचिलाती गर्मी से राहत तो मिली है, लेकिन किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें खिंच गई हैं। मौसम विभाग के अनुसार, वर्तमान परिस्थितियों को देखते हुए आगामी कुछ दिनों तक प्रदेशवासियों को इसी तरह के अस्थिर मौसम का सामना करना पड़ सकता है। विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों में ओलावृष्टि से फसलों को नुकसान होने की आशंका जताई जा रही है।
मौसम केंद्र ने आज यानी 19 मार्च 2026 के लिए प्रदेश के कई जिलों में विशेष चेतावनी जारी की है। विभाग के मुताबिक, राज्य के कुछ हिस्सों में 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से विनाशकारी हवाएं चल सकती हैं। इसके साथ ही गरज-चमक के साथ आकाशीय बिजली गिरने (वज्रपात) और ओलावृष्टि की भी प्रबल संभावना है। प्रशासन ने आम नागरिकों को सलाह दी है कि खराब मौसम के दौरान वे पेड़ों के नीचे या खुले मैदानों में जाने से बचें। विशेष रूप से आकाशीय बिजली की घटनाओं को देखते हुए बिजली के उपकरणों से दूर रहने और सुरक्षित स्थानों पर शरण लेने का निर्देश दिया गया है।
तापमान के आंकड़ों पर गौर करें तो प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में अधिकतम तापमान सामान्य से 1 से 5 डिग्री सेल्सियस तक नीचे चला गया है। बीते 24 घंटों में दुर्ग जिले में सबसे अधिक तापमान 35.2 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया, जबकि न्यूनतम तापमान 19.2 डिग्री सेल्सियस रहा। मौसम विज्ञानियों का अनुमान है कि अगले 5 दिनों के भीतर प्रदेश के तापमान में 3 से 5 डिग्री सेल्सियस तक की और गिरावट आ सकती है। हालांकि, इस ठंडे स्पेल के बाद पारा एक बार फिर 2 से 4 डिग्री तक चढ़ने की उम्मीद है। यह उतार-चढ़ाव स्वास्थ्य के लिहाज से भी चुनौतीपूर्ण हो सकता है।
प्रदेश के कई जिलों में पिछले कुछ घंटों के दौरान अच्छी खासी वर्षा दर्ज की गई है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, देवभोग क्षेत्र में सर्वाधिक 5 सेंटीमीटर बारिश रिकॉर्ड की गई है। वहीं, करपावंद में 4 सेंटीमीटर और देवकर में 2 सेंटीमीटर बारिश हुई है। कई अन्य स्थानों पर रिमझिम फुहारों के साथ ओले गिरने की भी खबरें मिली हैं। बारिश और नमी की वजह से रबी की फसलों, विशेषकर दालों और सब्जियों की खेती करने वाले किसान ओलावृष्टि को लेकर डरे हुए हैं, क्योंकि इस समय ओले गिरना तैयार फसलों के लिए घातक साबित हो सकता है।
मौसम विशेषज्ञों ने इस अचानक आए बदलाव के पीछे सक्रिय दो प्रमुख प्रणालियों (Systems) को जिम्मेदार बताया है। वर्तमान में मध्य प्रदेश के मध्य भागों के ऊपर एक चक्रवाती परिसंचरण (Cyclonic Circulation) बना हुआ है। इसके साथ ही दक्षिण-पूर्वी राजस्थान से होकर उत्तरी छत्तीसगढ़ तक एक द्रोणिका (Trough Line) फैली हुई है। ये दोनों सिस्टम समुद्र तल से लगभग 0.9 किलोमीटर की ऊंचाई पर सक्रिय हैं। बंगाल की खाड़ी से आ रही नमी और इन प्रणालियों के मिलन से छत्तीसगढ़ के वायुमंडल में अस्थिरता पैदा हुई है, जो बारिश और गरज-चमक का कारण बन रही है।
राजधानी रायपुर और इसके आसपास के क्षेत्रों में भी 19 मार्च को आसमान में बादलों का डेरा रहेगा। शाम के समय गरज-चमक के साथ बौछारें पड़ने की संभावना है। रायपुर में आज अधिकतम तापमान 34 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 24 डिग्री सेल्सियस के आसपास रहने का अनुमान है। अगले 48 घंटों तक प्रदेश के एक-दो स्थानों पर मध्यम वर्षा का दौर जारी रह सकता है। मौसम विभाग स्थिति पर पैनी नजर बनाए हुए है और नियमित रूप से अपडेट जारी कर रहा है।
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