Chhattisgarh winter update:
Chhattisgarh winter update: मौसम विभाग ने चेतावनी जारी करते हुए कहा है कि छत्तीसगढ़ के उत्तर और मध्य क्षेत्रों में अगले दो दिनों तक शीतलहर का प्रभाव बना रहेगा। तापमान में लगातार गिरावट की वजह से प्रदेश के कई हिस्सों में कड़ाके की ठंड महसूस की जा रही है। विभाग का अनुमान है कि इसके बाद आने वाले चार दिनों में न्यूनतम तापमान में 2 से 3 डिग्री सेल्सियस की बढ़ोतरी संभव है, जिससे कुछ राहत मिल सकती है।
ठंड और मौसम में लगातार हो रहे बदलाव को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने चेतावनी दी है कि सुकमा और दंतेवाड़ा जिलों में मलेरिया फैलने की आशंका बढ़ गई है। तापमान में उतार-चढ़ाव और नमी के चलते मच्छरों के पनपने का खतरा बढ़ता है, जिसके कारण इन क्षेत्रों में सतर्कता बढ़ाई जा रही है।
मौसम विभाग ने सरगुजा, बिलासपुर और दुर्ग संभाग के कुछ चुनिंदा हिस्सों में भी शीतलहर की स्थिति बने रहने की संभावना जताई है। विशेष रूप से कोरिया, सूरजपुर, मनेंद्रगढ़, जशपुर और बिलासपुर जिलों को लेकर कोल्ड वेव अलर्ट जारी किया गया है। मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि इन इलाकों में रात के समय ठंड का असर और ज्यादा बढ़ सकता है। रायगढ़ में भी सुबह–शाम के समय तेज ठंड महसूस की जा रही है।
ठंड से राहत दिलाने के उद्देश्य से रायगढ़ नगर निगम ने शहर में 9 स्थानों पर अलाव की व्यवस्था की है। जिन जगहों को चुना गया है, उनमें मेडिकल कॉलेज (2 स्थान), चक्रधर नगर ऑटो पार्किंग, रामनिवास टॉकीज चौक, रेलवे स्टेशन, अशर्फी देवी अस्पताल, जिला अस्पताल, केवड़ा बाड़ी बस स्टैंड, मिनी माता चौक और शनि मंदिर परिसर शामिल हैं। ये वे स्थान हैं जहां रात के समय लोगों की आवाजाही बनी रहती है, इसलिए यहां विशेष व्यवस्था करके नागरिकों को राहत देने का प्रयास किया जा रहा है।
प्रदेश में कड़ाके की ठंड का मुख्य कारण उत्तर भारत से लगातार चल रही शुष्क और ठंडी हवाएं हैं। मैदान क्षेत्रों में दुर्ग इस समय सबसे ठंडा जिला बन गया है, जहां रात का तापमान 10.8°C दर्ज किया गया, जो सामान्य से लगभग 7 डिग्री कम है। रायपुर में भी इस नवंबर माह में नौ साल बाद दूसरी बार न्यूनतम तापमान 13°C तक पहुंच गया।
पिछले 24 घंटों में दुर्ग का अधिकतम तापमान 30.2°C और अंबिकापुर का न्यूनतम तापमान 7.3°C रिकॉर्ड किया गया। यह आंकड़ा उल्लेखनीय इसलिए भी है क्योंकि नवंबर महीने में पिछले 10 वर्षों में अंबिकापुर का तापमान पहली बार इतना नीचे पहुंचा है। हालांकि अंबिकापुर में नवंबर का सबसे कम तापमान 4.2°C वर्ष 1970 में दर्ज किया गया था।
जिले के ग्रामीण और वन क्षेत्रों में शहर की तुलना में ठंड अधिक महसूस की जा रही है। लैलूंगा, कापू, छाल और धरमजयगढ़ जैसे इलाकों में सूर्यास्त के बाद तापमान तेजी से गिर जाता है, जिसके कारण लोग घरों में दुबककर रहने को मजबूर हैं। इन क्षेत्रों में लोग गर्म कपड़ों, आग जलाने और अलाव के सहारे ठंड से मुकाबला कर रहे हैं।
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