छत्तीसगढ़

Child Abuse School: KG-2 छात्र को लटकाने पर बवाल! हाईकोर्ट ने शिक्षा सचिव को क्या कड़ा आदेश दिया?

Child Abuse School: छत्तीसगढ़ के सूरजपुर जिले के एक निजी स्कूल में हुई क्रूरता की एक भयावह घटना ने पूरे राज्य को झकझोर कर रख दिया है। एक निजी स्कूल की शिक्षिका द्वारा मात्र 5 वर्ष के एक मासूम छात्र को होमवर्क न करने की सज़ा के तौर पर क्रूरतापूर्वक पेड़ पर घंटों लटकाए रखने के मामले में, बिलासपुर हाईकोर्ट ने इसे जनहित याचिका (PIL) मानते हुए सुनवाई शुरू कर दी है। हाईकोर्ट की इस त्वरित कार्रवाई ने राज्य के निजी शिक्षण संस्थानों के मनमाने रवैये पर कड़ा संदेश दिया है।

Child Abuse School: होमवर्क न करने पर मासूम बच्चे को दी गई अमानवीय सज़ा

यह विचलित कर देने वाला मामला सूरजपुर के नारायणपुर स्थित हंसवानी विद्या मंदिर का है, जो नर्सरी से आठवीं कक्षा तक के छात्रों को शिक्षा प्रदान करता है। घटना 24 नवंबर की बताई जा रही है, जब नर्सरी क्लास की शिक्षिका काजल साहू बच्चों का होमवर्क जांच रही थीं। एक 5 वर्षीय छात्र द्वारा अपना गृहकार्य (होमवर्क) पूरा न किए जाने पर शिक्षिका काजल साहू अत्यधिक क्रोधित हो गईं।

सज़ा के रूप में, उन्होंने बच्चे को कक्षा से बाहर निकाल दिया और स्कूल परिसर में लगे एक पेड़ पर रस्सी के सहारे उसे लटका दिया। मीडिया रिपोर्ट्स और वायरल वीडियो के अनुसार, वह मासूम बच्चा इस अमानवीय सज़ा के तहत घंटों तक रस्सी के सहारे हवा में झूलता रहा। बच्चे की मानसिक और शारीरिक स्थिति पर इस घटना के दीर्घकालिक प्रभाव की आशंका जताई जा रही है।

Child Abuse School: मीडिया रिपोर्ट पर हाईकोर्ट ने लिया स्वतः संज्ञान (Suo Motu)

बच्चे के साथ की गई इस क्रूरता का वीडियो जल्द ही सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर तेजी से वायरल हो गया, जिससे लोगों में भारी आक्रोश फैल गया। इस संबंध में विभिन्न मीडिया माध्यमों में विस्तृत रिपोर्टिंग हुई।

बिलासपुर हाईकोर्ट ने इन मीडिया रिपोर्ट्स में प्रकाशित सामग्री को अत्यंत गंभीरता से लिया और इसे जनहित याचिका (PIL) मानते हुए इस पर स्वतः संज्ञान के आधार पर सुनवाई शुरू कर दी। चीफ जस्टिस रमेश कुमार सिन्हा और जस्टिस बी.डी. गुरु की खंडपीठ (डिवीजन बेंच) ने मामले की गंभीरता को समझते हुए तत्काल सुनवाई का निर्णय लिया।

चीफ जस्टिस की कड़ी टिप्पणी

मामले की सुनवाई के दौरान, चीफ जस्टिस रमेश कुमार सिन्हा ने इस घटना पर गहरी नाराजगी व्यक्त की और बेहद कड़ी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि “यह बहुत गलत हुआ है, मजाक बनाकर रखा है।”

चीफ जस्टिस ने अपनी हैरानी व्यक्त करते हुए कहा कि, “एक मासूम बच्चे के साथ इस तरह की ज्यादती कैसे की जा सकती है?” उन्होंने स्कूल प्रबंधन और कर्मचारियों की जवाबदेही पर प्रश्न उठाते हुए यह भी पूछा कि, “इतने बड़े स्कूल में किसी का ध्यान कैसे नहीं गया?” खंडपीठ ने स्पष्ट किया कि बच्चों के साथ इस प्रकार का अमानवीय व्यवहार किसी भी कीमत पर स्वीकार्य नहीं है और ऐसा कहीं नहीं होता है।

शासन से शपथपत्र पर मांगा गया जवाब और भविष्य की कार्रवाई का निर्देश

कोर्ट की सुनवाई के दौरान, राज्य शासन की तरफ से एडिशनल एडवोकेट जनरल यशवंत ठाकुर ने कोर्ट को सूचित किया कि जिला प्रशासन और राज्य शासन ने इस मामले को गंभीरता से लिया है। उन्होंने बताया कि अधिकारियों की एक टीम ने स्कूल पहुंचकर मामले की जांच की है, जिसके बाद दोषी शिक्षिका को तत्काल प्रभाव से स्कूल से हटा दिया गया है। साथ ही, निजी स्कूल प्रबंधन को नोटिस भी जारी किया गया है।

हालांकि, डिवीजन बेंच इस कार्रवाई से पूरी तरह संतुष्ट नहीं हुई। चीफ जस्टिस ने स्कूल शिक्षा सचिव को व्यक्तिगत शपथपत्र के साथ जवाब देने का सीधा निर्देश दिया है। इस शपथपत्र को प्रस्तुत करने की अंतिम तिथि 9 दिसंबर निर्धारित की गई है।

दिसंबर तक मांगा गया विस्तृत ब्यौरा

हाईकोर्ट ने स्कूल शिक्षा सचिव को यह स्पष्ट करने का निर्देश दिया है कि उनके जवाब में निम्नलिखित बिंदुओं का विस्तृत ब्यौरा होना चाहिए:

  1. दोषी शिक्षकों और स्कूल प्रबंधन पर अब तक क्या कड़ी कानूनी और विभागीय कार्रवाई की गई है।

  2. भविष्य में राज्य के किसी भी निजी या सरकारी स्कूल में ऐसी अमानवीय घटनाएँ न हों, यह सुनिश्चित करने के लिए सरकार क्या ठोस और निवारक कदम उठा रही है।

वीडियो वायरल होने पर फूटा अभिभावकों का गुस्सा

जिस समय बच्चे को पेड़ से लटकाया गया था, उसी दौरान वहां मौजूद किसी ग्रामीण ने इस पूरी घटना का वीडियो रिकॉर्ड कर लिया था। यह वीडियो जैसे ही सोशल मीडिया पर वायरल हुआ, अभिभावकों का गुस्सा फूट पड़ा। बड़ी संख्या में पेरेंट्स और स्थानीय लोग स्कूल के बाहर इकट्ठा हो गए और इस क्रूरता के विरोध में जबरदस्त प्रदर्शन किया, जिसके बाद प्रशासन को कार्रवाई के लिए मजबूर होना पड़ा।

यह मामला निजी स्कूलों में बच्चों के प्रति शिक्षकों के व्यवहार और उनकी जवाबदेही पर एक बड़ा प्रश्नचिह्न लगाता है, जिस पर अब हाईकोर्ट की निगरानी में सख्त कार्रवाई अपेक्षित है।

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