China-Taiwan News
China-Taiwan News: मिडिल ईस्ट में जारी भीषण युद्ध का आज 38वां दिन है, और इसका असर अब दुनिया के दूसरे कोनों में भी साफ महसूस किया जा रहा है। एक तरफ जहां पूरी दुनिया का ध्यान ईरान और अमेरिका के तनाव पर टिका है, वहीं दूसरी तरफ एशिया-प्रशांत क्षेत्र से एक ऐसी खबर आई है जिसने सैन्य विशेषज्ञों की नींद उड़ा दी है। चीन ने ताइवान द्वीप के पास एक विशाल हवाई क्षेत्र (Airspace) को अगले 40 दिनों के लिए पूरी तरह बंद करने का फरमान जारी किया है।
‘वॉल स्ट्रीट जर्नल’ की रविवार की एक विशेष रिपोर्ट के अनुसार, चीन ने अपने समुद्री और हवाई क्षेत्र को बंद करने का आधिकारिक नोटिस जारी किया है। सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि बीजिंग ने इतने लंबे समय तक उड़ानें रोकने के पीछे कोई ठोस कारण या स्पष्टीकरण साझा नहीं किया है। आमतौर पर इस तरह की पाबंदियां तब लगाई जाती हैं जब कोई देश मिसाइल परीक्षण या बड़ा सैन्य अभ्यास कर रहा हो, लेकिन 40 दिनों की इतनी लंबी अवधि इतिहास में विरली ही देखी गई है।
चीन द्वारा आरक्षित किया गया यह प्रतिबंधित क्षेत्र भौगोलिक दृष्टि से बेहद विशाल है। अमेरिकी संघीय विमानन प्रशासन (FAA) के आंकड़ों के अनुसार, यह क्षेत्र उत्तर में दक्षिण कोरिया के पास स्थित ‘येलो सी’ (पीला सागर) से शुरू होकर दक्षिण में जापान के करीब ‘ईस्ट चीन सी’ (पूर्वी चीन सागर) तक फैला हुआ है। इसमें शंघाई के उत्तर और दक्षिण में स्थित महत्वपूर्ण अपतटीय हवाई मार्ग भी शामिल हैं। यह पूरा इलाका रणनीतिक रूप से ताइवान के मुख्य द्वीप से भी बड़ा बताया जा रहा है।
अंतरराष्ट्रीय कूटनीति के जानकारों का मानना है कि चीन का यह कदम बेहद सोची-समझी रणनीति का हिस्सा हो सकता है। वर्तमान में अमेरिका पूरी तरह से मिडिल ईस्ट के संकट में उलझा हुआ है। रिपोर्टों के अनुसार, अमेरिका ने ताइवान और प्रशांत क्षेत्र की सुरक्षा के लिए तैनात अपने कुछ सैन्य साजो-सामान और संसाधनों को भी मिडिल ईस्ट की ओर स्थानांतरित किया है। वाशिंगटन की इस व्यस्तता और संसाधनों की कमी के बीच चीन की यह रहस्यमयी सक्रियता ताइवान के अस्तित्व के लिए बड़ा खतरा मानी जा रही है।
अतीत में जब भी चीन ने इस तरह की चेतावनियां जारी की हैं, तो वे मुख्य रूप से विमानन अधिकारियों को चीनी पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) के युद्धाभ्यास की सूचना देने के लिए होती थीं। लेकिन वे अभ्यास आमतौर पर दो से पांच दिनों तक ही चलते थे। इस बार बीजिंग ने किसी भी प्रकार के सैन्य अभ्यास की आधिकारिक घोषणा नहीं की है। सैन्य विशेषज्ञों के अनुसार, ताइवान के आसपास उड़ानों में आए इस अस्पष्ट ‘विराम’ ने एक नया “विमानन रहस्य” पैदा कर दिया है, जिसे कुछ लोग संभावित आक्रमण की तैयारी के रूप में भी देख रहे हैं।
ताइवान स्ट्रेट दुनिया के सबसे व्यस्त व्यापारिक मार्गों में से एक है। 40 दिनों तक एयरस्पेस बंद रहने का सीधा असर वैश्विक सप्लाई चेन, विशेषकर सेमीकंडक्टर और इलेक्ट्रॉनिक सामानों की आपूर्ति पर पड़ सकता है। 27 अप्रैल से 6 मई तक की प्रारंभिक अवधि के साथ शुरू हुई यह बंदी धीरे-धीरे पूरे 40 दिनों के चक्र को पूरा करेगी। यदि इस दौरान चीन कोई आक्रामक रुख अपनाता है, तो मिडिल ईस्ट के बाद दुनिया को एक और भीषण युद्ध का सामना करना पड़ सकता है।
चीन की इस रहस्यमयी घेराबंदी ने ताइवान, जापान और दक्षिण कोरिया सहित तमाम पड़ोसी देशों को अलर्ट मोड पर डाल दिया है। क्या यह केवल अपनी शक्ति प्रदर्शन का एक तरीका है या चीन वास्तव में अमेरिका की अनुपस्थिति का लाभ उठाकर ताइवान पर कोई बड़ा फैसला लेने वाला है? आने वाले कुछ हफ्ते वैश्विक शांति और स्थिरता के लिए निर्णायक साबित होंगे। फिलहाल, पेंटागन और अंतरराष्ट्रीय एजेंसियां चीन की हर हरकत पर पैनी नजर रख रही हैं।
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