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China on US Action: वेनेजुएला में अमेरिकी सैन्य कार्रवाई पर भड़के शी जिनपिंग, ड्रैगन ने बताया अंतरराष्ट्रीय दादागिरी

China on US Action: वेनेजुएला में अमेरिकी सेना द्वारा की गई कार्रवाई और राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को हिरासत में लिए जाने की घटना ने वैश्विक कूटनीति में तनाव पैदा कर दिया है। चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने इस घटनाक्रम पर अपनी चुप्पी तोड़ते हुए अमेरिका पर तीखा हमला बोला है। जिनपिंग ने इसे अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था पर एक गंभीर प्रहार बताते हुए वाशिंगटन की कार्रवाई को “एकतरफा दादागिरी” करार दिया। चीन के लिए यह घटना न केवल एक कूटनीतिक मुद्दा है, बल्कि एक बड़ा रणनीतिक और आर्थिक झटका भी है, क्योंकि वेनेजुएला लैटिन अमेरिका में चीन का सबसे मजबूत स्तंभ माना जाता रहा है।

China on US Action: सदी का सबसे बड़ा उथल-पुथल

समाचार एजेंसी शिन्हुआ के अनुसार, राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने वैश्विक परिदृश्य पर टिप्पणी करते हुए कहा कि वर्तमान में दुनिया ऐसे बदलावों और उथल-पुथल के दौर से गुजर रही है, जो पिछले सौ वर्षों में नहीं देखे गए। उन्होंने किसी देश का सीधा नाम लिए बिना कहा कि कुछ राष्ट्रों की वर्चस्ववादी मानसिकता और “दादागिरी” अंतरराष्ट्रीय नियमों को कमजोर कर रही है। जिनपिंग का यह बयान बीजिंग द्वारा वेनेजुएला पर अमेरिकी हमलों की पहले की गई आलोचना की अगली कड़ी के रूप में देखा जा रहा है। चीनी नेतृत्व का मानना है कि इस तरह के हस्तक्षेप से वैश्विक शांति और सुरक्षा के लिए खतरा पैदा हो रहा है।

China on US Action: संप्रभुता का सम्मान और बड़ी शक्तियों की जिम्मेदारी

आयरिश प्रधानमंत्री माइकल मार्टिन के साथ एक उच्च स्तरीय बैठक के दौरान शी जिनपिंग ने कड़ा संदेश देते हुए कहा कि प्रत्येक राष्ट्र को अपनी विकास यात्रा और शासन पद्धति चुनने का स्वतंत्र अधिकार है। उन्होंने जोर देकर कहा कि दुनिया के सभी देशों को अंतरराष्ट्रीय कानून और संयुक्त राष्ट्र चार्टर के सिद्धांतों का पालन करना चाहिए। जिनपिंग ने विशेष रूप से बड़ी शक्तियों (अमेरिका की ओर इशारा करते हुए) को नसीहत दी कि उन्हें व्यवस्था बिगाड़ने के बजाय व्यवस्था को सुदृढ़ करने में आगे आना चाहिए। उन्होंने आगाह किया कि सत्ता की हनक के दम पर चुनी हुई सरकारों को बेदखल करना अराजकता को जन्म देगा।

चीन-वेनेजुएला रणनीतिक साझेदारी: बीजिंग को लगा गहरा जख्म

निकोलस मादुरो की गिरफ्तारी और उनकी सरकार का पतन बीजिंग के लिए एक बड़ी रणनीतिक क्षति है। ह्यूगो शावेज के समय से ही चीन और वेनेजुएला के बीच गहरे रक्षात्मक और ऊर्जा संबंध रहे हैं। पिछले दो दशकों में बीजिंग ने वेनेजुएला में अरबों डॉलर का निवेश किया है और तेल के बदले भारी कर्ज (Oil-for-loan) प्रदान किया है। अमेरिका के कड़े प्रतिबंधों के बावजूद, चीन वेनेजुएला के तेल का सबसे बड़ा खरीदार बना रहा। लैटिन अमेरिका में अमेरिकी प्रभाव को चुनौती देने के लिए वेनेजुएला चीन का सबसे महत्वपूर्ण साझेदार था, ऐसे में मादुरो का हटना चीन की क्षेत्रीय पकड़ को कमजोर कर सकता है।

अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन: चीन ने की रिहाई की मांग

बीजिंग ने औपचारिक रूप से अमेरिका से निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी सिलिया फ्लोर्स को तत्काल रिहा करने की मांग की है। चीन के विदेश मंत्रालय ने एक बयान जारी कर कहा कि वह “एक संप्रभु देश के खिलाफ बल के खुले इस्तेमाल से स्तब्ध है।” चीनी सरकार ने इस सैन्य ऑपरेशन की कड़ी निंदा करते हुए इसे अंतरराष्ट्रीय संबंधों के बुनियादी नियमों का साफ उल्लंघन बताया है। चीन का तर्क है कि वेनेजुएला को बिना किसी बाहरी दबाव के अपने आर्थिक और राजनीतिक निर्णय लेने का अधिकार है, और अमेरिका की यह कार्रवाई संयुक्त राष्ट्र चार्टर की मूल आत्मा के खिलाफ है।

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