Chirag Paswan
Chirag Paswan: केंद्रीय मंत्री और लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के प्रमुख चिराग पासवान ने कांग्रेस पार्टी को ‘वोट चोरी’ के आरोपों को लेकर तीखे शब्दों में घेरा है। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा है कि कांग्रेस और उसके नेताओं, खासकर राहुल गांधी को इस सच्चाई को स्वीकार करना होगा कि यहां पर वोट चोरी नहीं, बल्कि उनका जनादेश चोरी हो चुका है। पासवान ने दावा किया कि कांग्रेस के पास अब कोई जनाधार बचा ही नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि जब तक कांग्रेस पार्टी अपनी हार के लिए ऐसे बहाने बनाती रहेगी और आत्ममंथन नहीं करेगी, तब तक जनता उन्हें लगातार नकारती रहेगी।
केंद्रीय मंत्री ने कांग्रेस की चुनावी विफलताओं को रेखांकित करते हुए कहा, “एक के बाद एक चुनाव वो हार रहे हैं। अलग-अलग राज्यों में चुनाव हार रहे हैं। लोकसभा के चुनाव में जनता इनको बार-बार नकार रही है।” चिराग पासवान ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी की विदेश यात्राओं और सदन में महत्वपूर्ण चर्चाओं के दौरान उनकी अनुपस्थिति को लेकर भी गंभीर सवाल उठाए, जिससे उनकी गंभीरता पर सवाल खड़ा होता है।
चिराग पासवान ने कांग्रेस की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल उठाते हुए कहा कि कांग्रेस पार्टी का अब किसी भी संवैधानिक और स्वतंत्र संस्था पर विश्वास नहीं बचा है। उन्होंने कटाक्ष करते हुए कहा, “वो कभी चौकीदार को चोर मान लेते हैं। इनका विश्वास किसी संस्था पर बचा नहीं है।” उन्होंने जोर देकर कहा कि चुनाव आयोग जैसी संस्था पर भी इनका विश्वास नहीं बचा है, जो देश में निष्पक्ष चुनाव कराने का काम करती है।
पासवान ने चेतावनी देते हुए कहा कि कांग्रेस का यह रवैया उन्हें अराजकता की ओर लेकर जा रहा है। उन्होंने राहुल गांधी और पूरी कांग्रेस पार्टी को यह सच्चाई स्वीकार करने की सलाह दी: “राहुल गांधी और पूरी कांग्रेस पार्टी को ये समझना होगा कि बात वोट चोरी की नहीं है बल्कि जनाधार चोरी की है, जो अब आपके पास नहीं रहा। आज की तारीख में आप जनाधार और जनता का भरोसा पूरी तरह से खो चुके हैं।” उनका इशारा साफ था कि कांग्रेस को अपनी नीतियों और कार्यशैली में सुधार करना चाहिए, न कि हार का ठीकरा संवैधानिक निकायों पर फोड़ना चाहिए।
लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी की विदेश यात्राओं को लेकर पूछे गए सवाल पर केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने कड़ी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा, “दिक्कत इसी बात की है कि आप सवाल तुरंत उठाते हैं कि हमें यहां पर नहीं पूछा जाता है। हमें बोलने या मौका नहीं दिया जाता है।” उन्होंने आगे कहा कि कांग्रेस नेता शिकायत करते हैं कि जब कोई बड़ा राष्ट्राध्यक्ष आता है तो उन्हें मिलने का समय नहीं दिया जाता, लेकिन वह अपनी जिम्मेदारियों को कितना निभा रहे हैं, इस पर विचार करना चाहिए।
पासवान ने सीधा आरोप लगाते हुए कहा, “सदन में बड़े विषय को लेकर चर्चा या बहस होती है तो विपक्ष के नेता होने के बावजूद आप सदन से नदारत रहते हैं।” उन्होंने कांग्रेस के पुराने नेताओं का उदाहरण देते हुए कहा कि इन्हीं की पार्टी के इससे पहले भी विपक्ष के नेता (एलओपी) रहे हैं, “जो सदन को अपना पूरा समय दिया करते थे।” उन्होंने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि “ऐसे में सत्र के दौरान भी अगर आपके लिए विदेश यात्राएं ज्यादा महत्व रखती हैं तो ये अपने आप दर्शाता है कि गंभीरता का अभाव है।” चिराग पासवान ने अंत में कहा, “जिस पद को आप सुशोभित कर रहे हैं, उसको लेकर आप गंभीर नहीं है, इसी बात की चिंता है।”
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