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CJI BR Gavai: CJI बीआर गवई का बुलडोजर नीति पर बड़ा बयान, “कार्यपालिका न्यायाधीश नहीं बन सकती, नागरिकों के अधिकार सर्वोपरि”

CJI BR Gavai : देश में हाल के वर्षों में चर्चित रही ‘बुलडोजर नीति’ को लेकर भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) बीआर गवई ने शनिवार को एक महत्वपूर्ण बयान दिया। उन्होंने दो टूक कहा कि कानूनी प्रक्रिया का पालन किए बिना किसी आरोपी के घर को ध्वस्त करना न्याय की मूल भावना के खिलाफ है।

गोवा हाईकोर्ट बार एसोसिएशन द्वारा पणजी में आयोजित एक सम्मान समारोह में भाग लेते हुए सीजेआई ने कहा कि उन्हें खुशी है कि सुप्रीम कोर्ट ने ऐसे मामलों में हस्तक्षेप कर नागरिकों के अधिकारों की रक्षा की। उन्होंने इस मौके पर अपने कई ऐतिहासिक फैसलों की भी चर्चा की।

‘कार्यपालिका न्यायाधीश नहीं बन सकती’

अपने संबोधन में सीजेआई गवई ने सख्त लहजे में कहा, “कार्यपालिका न्यायाधीश नहीं बन सकती। किसी आरोपी को बिना दोषी साबित किए उसके घर पर बुलडोजर चलाना संविधान के खिलाफ है।” यह वही पीठ थी, जिसकी अध्यक्षता गवई ने की थी और जिसने बुलडोजर कार्रवाई पर देशभर के लिए स्पष्ट दिशानिर्देश जारी किए थे।उन्होंने दोहराया कि न्यायपालिका का कर्तव्य है कि वह कानून के दायरे में रहते हुए हर नागरिक के मौलिक अधिकारों की रक्षा करे।

‘कानून और अंतरात्मा की आवाज के आधार पर देता हूं फैसला’

अपने एक अन्य चर्चित फैसले आरक्षित वर्ग में क्रीमी लेयर को लेकर बात करते हुए CJI गवई ने कहा, “मेरे फैसले की आलोचना मेरी अपनी कम्युनिटी के लोगों ने की। लेकिन मैंने यह फैसला कानून की समझ और अंतरात्मा की आवाज पर लिया, न कि किसी दबाव या लोकप्रियता के लिए।” उन्होंने यह भी कहा कि न्यायपालिका को किसी समुदाय, सरकार या दबाव समूह की नहीं, बल्कि संविधान और नागरिक अधिकारों की जवाबदेही निभानी चाहिए।

‘संविधान का संरक्षण हमारा कर्तव्य’

पूर्व वक्ताओं द्वारा उनके ऐतिहासिक निर्णयों की चर्चा पर प्रतिक्रिया देते हुए CJI गवई ने कहा, “मुझे गर्व है कि हम, संविधान के संरक्षक के रूप में, उन नागरिकों की रक्षा कर सके जिनके साथ अन्याय हुआ था। बिना कानूनी प्रक्रिया के घरों को तोड़ना सिर्फ एक प्रशासनिक कार्रवाई नहीं, बल्कि न्याय की मूल आत्मा पर आघात है।”

मुख्य न्यायाधीश बीआर गवई का यह बयान उन तमाम मामलों के संदर्भ में अहम है, जहां सरकारों द्वारा कथित अपराधियों के घर बिना अदालत के आदेश के गिराए गए। उनकी साफ और निर्भीक राय से एक बार फिर यह संदेश गया है कि भारत में कानून सबसे ऊपर है, और किसी भी सत्ता को नागरिकों के अधिकारों का हनन करने की छूट नहीं है।

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