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CJI Gavai: सीजेआई गवई ने दिखाया बड़प्पन, वकील पर अवमानना की कार्रवाई नहीं करने का सुप्रीम कोर्ट का फैसला

CJI Gavai: सुप्रीम कोर्ट ने उस वकील के खिलाफ अवमानना की कार्रवाई शुरू करने से इनकार कर दिया है, जिसने कुछ दिन पहले मुख्य न्यायाधीश (CJI) भूषण रामकृष्ण गवई की ओर जूता फेंकने की कोशिश की थी। अदालत ने कहा कि ऐसे व्यक्ति को “इतनी तरजीह देने की जरूरत नहीं है” और यह कि “वह पूरी व्यवस्था में कहीं मायने नहीं रखता।”

जस्टिस सूर्यकांत बोले – “जज मोटी चमड़ी के लोग होते हैं”

यह टिप्पणी सुप्रीम कोर्ट की बेंच जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची ने सोमवार को की। सुनवाई के दौरान जस्टिस सूर्यकांत ने कहा, “हम जज मोटी चमड़ी के लोग हैं, जो ऐसी चीज़ों से प्रभावित नहीं होते।” उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि CJI गवई ने स्वयं मामले को आगे न बढ़ाने का निर्णय लिया है। बेंच ने कहा कि वह व्यक्ति मीडिया में आकर्षण पाने के लिए ऐसा कर रहा है, और यदि उसके खिलाफ कार्रवाई की गई तो वह खुद को पीड़ित दिखाकर और सुर्खियाँ बटोरने की कोशिश करेगा।

सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन ने की थी कार्रवाई की मांग

यह मामला सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन (SCBA) की याचिका पर सुनवाई के दौरान उठा। एससीबीए अध्यक्ष विकास सिंह ने अदालत से कहा कि वकील राकेश किशोर के खिलाफ अवमानना की कार्यवाही शुरू होनी चाहिए, क्योंकि यह सुप्रीम कोर्ट की संस्था के सम्मान का सवाल है। उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया पर इस घटना को लेकर न्यायपालिका का मजाक बनाया जा रहा है और आरोपी लगातार असम्मानजनक बयान दे रहा है।विकास सिंह ने कहा, “अगर उसी दिन उसे जेल भेजा जाता, तो वह इस तरह के बयान नहीं देता।” इस पर कोर्ट ने कहा कि संस्थान की गरिमा पर कोई असर नहीं पड़ा, और वह “किसी व्यक्ति विशेष को बढ़ावा देने के पक्ष में नहीं है।”

सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता भी कोर्ट के रुख से सहमत

सुनवाई में सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने भी बेंच के दृष्टिकोण से सहमति जताई। उन्होंने कहा कि उस व्यक्ति को जो “सोशल मीडिया अटेंशन” मिल रही है, वह अस्थायी है। “यदि हम कार्रवाई करेंगे तो वह खुद को पीड़ित दिखाकर और प्रचार पाएगा,” उन्होंने कहा।

कोर्ट ने कहा -भविष्य के लिए बनाएंगे दिशानिर्देश

बेंच ने साफ किया कि अदालत फिलहाल इस मामले में कोई कार्रवाई नहीं करेगी, लेकिन भविष्य में ऐसी घटनाओं से निपटने के लिए कुछ दिशानिर्देश (Guidelines) तय किए जाएंगे। कोर्ट ने यह भी कहा कि मामला बंद नहीं किया जा रहा है, बल्कि विचाराधीन रहेगा ताकि न्यायपालिका की गरिमा और स्वतंत्रता सुरक्षित रह सके।

सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि “CJI का निर्णय व्यक्तिगत हो सकता है, लेकिन संस्था की गरिमा सामूहिक रूप से सर्वोपरि है।” हालांकि, बेंच ने यह दोहराया कि ऐसे लोगों को अनावश्यक महत्व देना उचित नहीं है।

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