CJI Surya Kant Scolds
CJI Surya Kant Scolds: भारतीय न्यायपालिका के इतिहास में बुधवार को एक अभूतपूर्व घटना देखने को मिली, जब सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत ने एक याचिकाकर्ता के पिता की अनुचित हरकत पर भारी नाराजगी व्यक्त की। मामला केवल कानूनी बहस तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह न्यायपालिका की गरिमा और न्यायाधीशों की स्वतंत्रता को प्रभावित करने की कोशिश तक जा पहुँचा। सीजेआई ने खुली अदालत में स्पष्ट किया कि किसी भी प्रकार का बाहरी दबाव या व्यक्तिगत संपर्क उनके न्यायिक कार्यों को प्रभावित नहीं कर सकता।
सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने खुलासा किया कि याचिकाकर्ता के पिता ने उनके भाई को फोन करके उनके द्वारा दिए गए एक न्यायिक आदेश पर सवाल उठाए थे। सीजेआई ने कड़े शब्दों में कहा, “याचिकाकर्ता के पिता ने मेरे भाई को फोन करके पूछा कि सीजेआई ने ऐसा आदेश कैसे दिया? क्या अब वह मुझे निर्देश देंगे? मुझे धमकाने या प्रभावित करने की कोशिश कतई न करें।” उन्होंने आगे कहा कि पिछले 23 वर्षों के न्यायिक करियर में उन्होंने ऐसे कई लोगों का सामना किया है और ऐसी हरकतों से वह केस ट्रांसफर नहीं करने वाले।
मुख्य न्यायाधीश ने इस कृत्य को न्याय प्रशासन में हस्तक्षेप मानते हुए सवाल उठाया कि संबंधित व्यक्ति के खिलाफ अदालत की अवमानना (Contempt of Court) की कार्यवाही क्यों न शुरू की जाए। इस पर याचिकाकर्ता के वकील ने तुरंत बचाव करते हुए कहा कि उन्हें इस फोन कॉल की कोई जानकारी नहीं थी और उन्होंने अदालत से बिना शर्त माफी मांगी। हालांकि, सीजेआई का रुख सख्त बना रहा और उन्होंने कहा कि चाहे कोई देश से बाहर जाकर ही क्यों न छिप जाए, उन्हें ऐसे तत्वों से निपटना अच्छी तरह आता है।
यह विवाद हरियाणा के दो सामान्य वर्ग के छात्रों की याचिका से जुड़ा है। इन छात्रों ने उत्तर प्रदेश के सुभारती मेडिकल कॉलेज में पोस्टग्रेजुएट (PG) मेडिकल कोर्स में प्रवेश के लिए ‘बौद्ध अल्पसंख्यक कोटे’ के तहत दावा पेश किया था। सुभारती मेडिकल कॉलेज को एक बौद्ध अल्पसंख्यक शैक्षणिक संस्थान घोषित किया गया है। याचिकाकर्ताओं ने अदालत को बताया कि उन्होंने बौद्ध धर्म अपना लिया है और इसके समर्थन में सब-डिविजनल ऑफिसर (SDO) द्वारा जारी प्रमाणपत्र भी प्रस्तुत किए।
इससे पहले जनवरी में हुई सुनवाई के दौरान, सुप्रीम कोर्ट ने इस अचानक हुए धर्मांतरण पर गंभीर सवाल उठाए थे। सीजेआई की अध्यक्षता वाली बेंच ने टिप्पणी की थी कि यह कदम केवल पीजी मेडिकल कोर्स में अल्पसंख्यक कोटे के जरिए सीट हासिल करने का एक प्रयास प्रतीत होता है। अदालत ने यह भी गौर किया था कि याचिकाकर्ता ‘पुनिया’ जाति से संबंध रखते हैं। बेंच ने कड़ा रुख अपनाते हुए याचिकाकर्ताओं के अल्पसंख्यक प्रमाणपत्रों की गहन जांच के आदेश दिए थे।
आज की सुनवाई के दौरान सीजेआई ने याचिकाकर्ता के वकील को नसीहत दी कि वे पहले अपने मुवक्किल द्वारा पेश किए गए तथ्यों की सत्यता की जांच करें। उन्होंने कहा, “यदि आपका क्लाइंट गलत है, तो बेहतर होगा कि आप केस वापस ले लें।” अदालत ने यह भी संकेत दिया कि याचिकाकर्ताओं द्वारा केवल न्यायपालिका ही नहीं, बल्कि हरियाणा के प्रशासनिक अधिकारियों को भी प्रभावित करने की कोशिश की जा रही थी। कोर्ट ने मामले को आगे की सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करते हुए सख्त निगरानी के संकेत दिए हैं।
चीफ जस्टिस सूर्यकांत के इस कड़े रुख ने स्पष्ट कर दिया है कि भारतीय सुप्रीम कोर्ट किसी भी प्रकार के ‘लॉबिंग’ या व्यक्तिगत संपर्कों से ऊपर है। शिक्षा के क्षेत्र में कोटे का लाभ लेने के लिए धर्म का दुरुपयोग और फिर न्यायाधीशों के परिवार तक पहुँचने का प्रयास एक गंभीर चिंता का विषय है। यह मामला अब केवल एक एडमिशन विवाद नहीं, बल्कि न्यायपालिका की शुचिता बनाए रखने की एक बड़ी लड़ाई बन गया है।
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