Mahashivratri 2026: महाशिवरात्रि के पावन पर्व पर छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय एक विशेष आध्यात्मिक यात्रा पर रहे। अपने रायगढ़ प्रवास के दौरान, मुख्यमंत्री अपनी धर्मपत्नी कौशल्या साय के साथ देर रात लगभग एक बजे ग्राम कोसमनारा स्थित सुप्रसिद्ध ‘श्रीश्री 108 श्री सत्यनारायण बाबा धाम’ पहुंचे। आधी रात के सन्नाटे में भी मंदिर परिसर श्रद्धा और भक्ति से सराबोर था। मुख्यमंत्री ने वहां पहुंचकर भगवान भोलेनाथ और तपस्या में लीन श्री सत्यनारायण बाबा के दर्शन किए। उन्होंने विधि-विधान से पूजा-अर्चना की और महादेव से समस्त प्रदेशवासियों के आरोग्य, सुख-समृद्धि और छत्तीसगढ़ की खुशहाली के लिए आशीर्वाद मांगा। इस अवसर पर उन्होंने समस्त नागरिकों को महाशिवरात्रि की हार्दिक शुभकामनाएं भी प्रेषित कीं।
धाम के विकास हेतु 1.20 करोड़ रुपये की परियोजनाओं का शिलान्यास
दर्शन और पूजन के पश्चात, मुख्यमंत्री ने मंदिर की व्यवस्थाओं को और अधिक बेहतर बनाने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम उठाया। उन्होंने मंदिर परिसर के समक्ष जिला खनिज न्यास (DMF) मद के अंतर्गत कुल 1 करोड़ 20 लाख रुपए की लागत से होने वाले विभिन्न विकास कार्यों का विधिवत शिलान्यास किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस धाम की बढ़ती ख्याति को देखते हुए यहां बुनियादी ढांचे का विस्तार आवश्यक है। इन विकास कार्यों का उद्देश्य यहां आने वाले हजारों श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं प्रदान करना और मंदिर के सौंदर्यीकरण को बढ़ावा देना है।
श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए प्रस्तावित निर्माण कार्य
शिलान्यास के अंतर्गत होने वाले कार्यों की सूची काफी विस्तृत है। प्रस्तावित विकास कार्यों में मुख्य मंदिर भवन के सामने भव्य ग्रेनाइट फर्श का निर्माण और उस पर शेड डालना शामिल है, ताकि भक्तों को धूप और बारिश से सुरक्षा मिल सके। इसके अतिरिक्त, दूर-दराज से आने वाले आगंतुकों के विश्राम और भोजन के लिए आधुनिक शेड का निर्माण किया जाएगा। मंदिर की स्वच्छता और प्रबंधन को देखते हुए एक नए शौचालय परिसर भवन और विशाल पार्किंग क्षेत्र के लिए मजबूत सीमेंट कंक्रीट सड़क के निर्माण की योजना भी तैयार की गई है। इन सुविधाओं के तैयार होने के बाद कोसमनारा धाम का स्वरूप और अधिक व्यवस्थित हो जाएगा।
कोसमनारा धाम: आस्था और अटूट तपस्या का केंद्र
रायगढ़ जिला मुख्यालय से महज 7 किलोमीटर की दूरी पर स्थित कोसमनारा धाम पिछले कई दशकों से जन-आस्था का प्रमुख केंद्र बना हुआ है। इस स्थान की सबसे बड़ी विशेषता श्री श्री 108 श्री सत्यनारायण बाबा की अद्भुत तपस्या है। स्थानीय मान्यताओं और जनश्रुतियों के अनुसार, बाबा वर्ष 1998 से निरंतर कठोर तपस्या में लीन हैं। उन्होंने स्वयं पत्थरों को एकत्रित कर एक शिवलिंग का स्वरूप निर्मित किया और उसी स्थान को अपनी तपोभूमि बना लिया। वर्ष 2003 में उन्हें ‘श्री श्री 108’ की उपाधि से विभूषित किया गया, जिसके बाद इस धाम की प्रसिद्धि पूरे देश में फैल गई।
प्रकृति की चुनौतियों के बीच बाबा की अनूठी साधना
सत्यनारायण बाबा की साधना अत्यंत विलक्षण और कठिन मानी जाती है। वे किसी बंद कक्ष या गुफा के बजाय खुले आसमान के नीचे साधना करते हैं। चाहे भीषण गर्मी का प्रकोप हो, मुसलाधार वर्षा हो या फिर हाड़ कपाने वाली सर्दी, बाबा हर मौसम में उसी खुले स्थान पर अडिग रहकर भगवान भोलेनाथ की भक्ति में मग्न रहते हैं। उनकी यही जिजीविषा और अटूट विश्वास श्रद्धालुओं को अपनी ओर खींचता है। महाशिवरात्रि जैसे विशेष अवसरों पर यहां जनसैलाब उमड़ पड़ता है और मुख्यमंत्री की इस यात्रा ने धाम के महत्व को और अधिक रेखांकित कर दिया है।
















