Babri Masjid Murshidabad: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 से ठीक पहले राज्य की राजनीति में ‘बाबरी मस्जिद’ के मुद्दे ने एक बार फिर उबाल ला दिया है। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के एक कड़े बयान पर पलटवार करते हुए जनता उन्नयन पार्टी के प्रमुख और पूर्व टीएमसी नेता हुमायूं कबीर ने सीधी चुनौती पेश की है। 10 फरवरी 2026 को मीडिया से बात करते हुए कबीर ने ऐलान किया कि वे मुर्शिदाबाद की धरती पर बाबरी मस्जिद की हूबहू नकल वाली मस्जिद का निर्माण जरूर करेंगे। उन्होंने मुख्यमंत्री योगी को ललकारते हुए कहा कि यह उत्तर प्रदेश नहीं बल्कि बंगाल है, और यहाँ उन्हें मस्जिद बनाने से कोई नहीं रोक सकता।

मस्जिद निर्माण की तारीख तय: 11 फरवरी से शुरू होगा काम
हुमायूं कबीर ने अपने इरादे साफ करते हुए बताया कि इस मस्जिद की नींव पिछले साल 6 दिसंबर 2025 को रखी गई थी। अब 11 फरवरी 2026 की सुबह 10 बजे से इसका निर्माण कार्य औपचारिक रूप से शुरू कर दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि लगभग 1,200 लोग कुरान की आयतों के पाठ के साथ निर्माण कार्य का शुभारंभ करेंगे। कबीर का तर्क है कि भारतीय संविधान हर नागरिक को अपनी धार्मिक पहचान और पूजा स्थल बनाने का अधिकार देता है। उन्होंने ममता बनर्जी के शासन का हवाला देते हुए कहा कि बंगाल में संवैधानिक अधिकारों की रक्षा की जाएगी और वे किसी भी बाहरी दबाव या धमकी से डरने वाले नहीं हैं।
योगी आदित्यनाथ का कड़ा रुख: “कयामत तक नहीं बनेगी बाबरी मस्जिद”
दूसरी ओर, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बाराबंकी में एक विशाल जनसभा को संबोधित करते हुए बाबरी ढांचे को लेकर बेहद सख्त रुख अपनाया। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि बाबरी मस्जिद का पुनर्निर्माण कयामत के दिन तक भी संभव नहीं है, क्योंकि कयामत का दिन कभी आएगा ही नहीं। योगी ने राम मंदिर आंदोलन की सफलता का जिक्र करते हुए कहा कि हमने ‘वहीँ मंदिर बनाएंगे’ का जो संकल्प लिया था, उसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में पूरा कर दिया गया है। उन्होंने विरोधियों पर कटाक्ष करते हुए कहा कि जो लोग कयामत का सपना देख रहे हैं, वे उसी सपने के साथ समाप्त हो जाएंगे, लेकिन सनातन की शक्ति के आगे उनकी दाल नहीं गलेगी।
राम मंदिर का इतिहास और वर्तमान कानूनी स्थिति
यह पूरा विवाद 1992 की उन घटनाओं से जुड़ा है जब अयोध्या में बाबरी ढांचे को ढहाया गया था। दशकों तक चली कानूनी लड़ाई के बाद, वर्ष 2019 में सुप्रीम कोर्ट ने ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए विवादित स्थल पर राम मंदिर निर्माण का मार्ग प्रशस्त किया था और मुस्लिम पक्ष को मस्जिद के लिए अलग से 5 एकड़ जमीन आवंटित करने का आदेश दिया था। 2024 में राम मंदिर के भव्य उद्घाटन के बाद अब मुर्शिदाबाद में बाबरी मस्जिद की नकल बनाने की घोषणा ने नए कानूनी और राजनीतिक सवाल खड़े कर दिए हैं। कबीर का कहना है कि यह उनका व्यक्तिगत और संवैधानिक फैसला है, जिसका किसी अन्य विवाद से लेना-देना नहीं है।
चुनावी माहौल में बढ़ता तनाव: पोस्टर वॉर और विरोध प्रदर्शन
हुमायूं कबीर के इस ऐलान के बाद बंगाल और उत्तर प्रदेश के राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है। कई हिंदू संगठनों ने इस निर्माण का विरोध करते हुए पोस्टर लगाए हैं और मुर्शिदाबाद कूच करने की चेतावनी दी है। विश्लेषकों का मानना है कि बंगाल चुनाव से पहले यह मुद्दा वोटों के ध्रुवीकरण का जरिया बन सकता है। जहाँ एक ओर भाजपा इसे हिंदुत्व के अपमान से जोड़ रही है, वहीं हुमायूं कबीर इसे अल्पसंख्यक अधिकारों की लड़ाई बता रहे हैं। आने वाले दिनों में मुर्शिदाबाद में भारी सुरक्षा बल की तैनाती और राजनीतिक बयानबाजी और तेज होने की उम्मीद है।
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