Jhalki childbirth tragedy: छत्तीसगढ़ के सूरजपुर जिले में एक संवेदनशील मामला सामने आया है, जिसने प्रशासन की नींद उड़ा दी है। जिले के बड़सरा गांव में एक आदिवासी महिला मानकुंवर सिंह ने खुले आसमान के नीचे ही प्रसव किया। यह घटना ‘TheTarget365’ की एक खबर के बाद उजागर हुई, जिसके बाद जिला प्रशासन ने इसे संज्ञान में लेते हुए मुख्य चिकित्सा और स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) कपिल देव पैकरा को नोटिस जारी किया है और तीन दिन के भीतर जवाब मांगा है।

मामला क्या है?
आमाखोखा बस्ती की 25 वर्षीय मानकुंवर सिंह को प्रसव पीड़ा हुई, लेकिन गांव में सड़क न होने के कारण एंबुलेंस घर तक नहीं पहुंच सकी। मजबूर होकर परिवार ने उसे खेतों में लगे बांस की झलगी में बैठाकर करीब दो किलोमीटर पैदल एंबुलेंस तक पहुंचाने की कोशिश की। रास्ते में ही मानकुंवर ने खुले मैदान में बच्चे को जन्म दिया। यह घटना न केवल इंसानियत को झकझोरने वाली है, बल्कि प्रशासनिक उपेक्षा की गवाही भी देती है।

प्रशासन की प्रतिक्रिया
‘TheTarget365’ की खबर के बाद सूरजपुर कलेक्टर एस जयवर्धन ने मामले को गंभीरता से लिया। उन्होंने CMHO कपिल देव पैकरा को शो-कॉज नोटिस जारी किया है और तीन दिनों के भीतर पूरी रिपोर्ट और जवाब मांगा है। यह कदम प्रशासन की ओर से जिम्मेदारी तय करने और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने की दिशा में बड़ा संकेत माना जा रहा है।
वर्तमान स्थिति
घटना के बाद मां और नवजात बच्ची दोनों को भैयाथान उपस्वास्थ्य केंद्र में इलाज दिया गया, जहां से उन्हें सुरक्षित रूप से छुट्टी दे दी गई है। हालांकि, यह घटना विकास के दावों पर सवाल खड़े करती है।
क्यों है यह घटना चिंता का विषय?
गांवों में पक्की सड़क और स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी एक गंभीर समस्या है। जब तक ग्रामीण इलाकों में मूलभूत सुविधाएं नहीं पहुंचतीं, तब तक ऐसी घटनाएं सामने आती रहेंगी। यह घटना शासन प्रशासन के लिए एक चेतावनी है कि उन्हें विकास की असल तस्वीर को समझना होगा और तत्काल सुधारात्मक कदम उठाने होंगे।
झलगी में खुले में प्रसव की यह घटना सिर्फ एक इंसानी कहानी नहीं है, बल्कि हमारे देश के विकास की अधूरी कहानी भी है। प्रशासन ने तुरंत कार्रवाई शुरू कर दी है, लेकिन जरूरी यह है कि भविष्य में ऐसी त्रासदियों को दोबारा न होने दिया जाए। ग्रामीण इलाकों में बेहतर सड़क, समय पर स्वास्थ्य सेवा और पर्याप्त संसाधन मुहैया कराना अत्यंत आवश्यक है ताकि हर महिला को सुरक्षित और सम्मानजनक प्रसव का अधिकार मिल सके।
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