Kharge RSS Ban: कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) को लेकर दिए गए बयान ने शुक्रवार को सियासी हलचल मचा दी। खरगे ने सरदार वल्लभभाई पटेल की जयंती पर कहा था कि देश में बढ़ती कानून-व्यवस्था की समस्याओं के लिए RSS जिम्मेदार है और इस संगठन पर फिर से प्रतिबंध लगाया जाना चाहिए। उनके इस बयान के बाद भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने कड़ा पलटवार किया और कांग्रेस अध्यक्ष पर “पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI), मुस्लिम लीग और जमीयत उलेमा-ए-हिंद की भाषा बोलने” का आरोप लगाया।
बीजेपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता और सांसद डॉ. संबित पात्रा ने कहा, “हम खरगे जी की टिप्पणी की कड़ी निंदा करते हैं। उन्होंने जिस तरह की भाषा आरएसएस के खिलाफ इस्तेमाल की, वह वही भाषा है जो PFI और अन्य कट्टरपंथी संगठन इस्तेमाल करते हैं।” पात्रा ने कहा कि कांग्रेस अध्यक्ष को आरएसएस का इतिहास और योगदान समझना चाहिए, क्योंकि यह संगठन हमेशा राष्ट्र निर्माण और समाज सेवा के लिए समर्पित रहा है।
संबित पात्रा ने कहा, “खरगे जी को यह जानना चाहिए कि महात्मा गांधी, डॉ. बी.आर. आंबेडकर, जवाहरलाल नेहरू और इंदिरा गांधी जैसे नेताओं ने भी संघ के अनुशासन और कार्यशैली की प्रशंसा की थी।”
उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा, “1934 में वर्धा में संघ शिविर के दौरे के बाद महात्मा गांधी ने कहा था कि वे वहां के अनुशासन और अस्पृश्यता के अभाव को देखकर प्रभावित हुए थे। वहीं, डॉ. आंबेडकर ने 1939 में पुणे के शिविर में जाकर संघ में जातिगत समानता देखकर खुशी जताई थी।”
पात्रा ने आगे कहा कि 1962 के भारत-चीन युद्ध के बाद तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने 1963 के स्वतंत्रता दिवस समारोह में आरएसएस को भाग लेने के लिए आमंत्रित किया था। उन्होंने कहा, “इतिहास इस बात का गवाह है कि आरएसएस ने हमेशा देश के हित में काम किया है। लेकिन कांग्रेस अध्यक्ष इन ऐतिहासिक तथ्यों से अनजान हैं।”
बीजेपी प्रवक्ता ने यह भी कहा कि आरएसएस को महात्मा गांधी की हत्या से जोड़ना राजनीतिक साजिश है। उन्होंने कहा, “कपूर आयोग की रिपोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के फैसले ने साफ कर दिया था कि गांधी जी की हत्या में आरएसएस की कोई भूमिका नहीं थी।” पात्रा ने कहा कि इंदिरा गांधी से लेकर प्रणब मुखर्जी तक कई बड़े नेताओं ने संघ की राष्ट्रवादी भूमिका की सराहना की थी।
दरअसल, मल्लिकार्जुन खरगे ने एक सार्वजनिक कार्यक्रम में कहा था कि “आरएसएस देश में असहिष्णुता और नफरत फैलाने के लिए जिम्मेदार है, इसलिए इस पर फिर से प्रतिबंध लगाया जाना चाहिए।” हालांकि, उन्होंने यह भी जोड़ा कि यह उनका “व्यक्तिगत विचार” है।
खरगे के इस बयान से कांग्रेस और बीजेपी के बीच विचारधारात्मक टकराव एक बार फिर तेज हो गया है। बीजेपी जहां इसे राष्ट्रविरोधी बयान बता रही है, वहीं कांग्रेस का कहना है कि खरगे ने केवल अपनी राय रखी है। लेकिन इतना तय है कि सरदार पटेल की जयंती के दिन दिया गया यह बयान आने वाले दिनों में राजनीतिक बहस का बड़ा मुद्दा बन सकता है।
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