Vande Mataram 150th: कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने 7 नवंबर को वंदे मातरम् के 150वें वर्षगांठ के अवसर पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) और भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) पर जमकर हमला बोला। खरगे ने अपने ट्विटर (अब एक्स) पोस्ट के माध्यम से आरएसएस और बीजेपी की नीतियों पर गंभीर आरोप लगाए और कहा कि दोनों संगठन भारत के संविधान को बदलने की कोशिश कर रहे हैं।
मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा कि वंदे मातरम्, जो भारत का एक शाश्वत राष्ट्रीय गीत है, हमेशा कांग्रेस के दिलो-दिमाग में बसा रहा है। उन्होंने उल्लेख किया कि कांग्रेस ने 1896 से लेकर आज तक, चाहे वह बड़े महाधिवेशन हों या छोटे ब्लॉक स्तरीय बैठकें, हर स्थान पर गर्व और देशभक्ति के साथ वंदे मातरम् गाया है। खरगे ने इसे कांग्रेस पार्टी की एकता और भारतीयता की भावना का प्रतीक बताया।कांग्रेस अध्यक्ष ने जोर देकर कहा, “हमने वंदे मातरम् में अपनी अटूट आस्था और विश्वास की पुष्टि की है, जो भारत की अमर आत्मा और गौरव का प्रतीक है।”
आरएसएस पर निशाना साधते हुए, खरगे ने कहा, “यह एक सार्वजनिक तथ्य है कि आरएसएस और उसके संघ परिवार ने भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में अंग्रेजों का साथ दिया था।” उन्होंने आरोप लगाया कि आरएसएस ने 52 सालों तक राष्ट्रीय ध्वज नहीं फहराया और भारतीय संविधान का दुरुपयोग किया। इसके अलावा, खरगे ने यह भी दावा किया कि आरएसएस ने महात्मा गांधी और बाबासाहेब अंबेडकर के पुतले जलाए और गांधीजी की हत्या में भी शामिल रहे।खरगे ने बीजेपी और आरएसएस को चेतावनी देते हुए कहा कि दोनों संगठन देश के संविधान को बदलने का प्रयास कर रहे हैं, जो भारतीय लोकतंत्र और विविधता की नींव है। उनका यह बयान एक बार फिर से बीजेपी और आरएसएस की नीतियों को लेकर देशभर में चर्चा का विषय बन गया है।
कांग्रेस अध्यक्ष ने अपने पोस्ट में यह भी बताया कि कांग्रेस पार्टी न केवल वंदे मातरम्, बल्कि ‘जन गण मन’ पर भी अत्यधिक गर्व करती है। उन्होंने कहा कि ये दोनों गीत कांग्रेस की प्रत्येक सभा और आयोजन में श्रद्धा के साथ गाए जाते हैं, जो देश की एकता और गौरव का प्रतीक हैं।खरगे ने वंदे मातरम् और जन गण मन को भारतीयता के अहम हिस्से के रूप में पेश करते हुए, कांग्रेस की यह प्रतिबद्धता व्यक्त की कि वह हमेशा देश की एकता, अखंडता और गरिमा को प्राथमिकता देती रहेगी।
मल्लिकार्जुन खरगे का यह बयान इस बात का संकेत है कि कांग्रेस पार्टी अपने इतिहास और राष्ट्रीयता की दिशा में अपनी पुरानी प्रतिबद्धताओं को बरकरार रखे हुए है, जबकि बीजेपी और आरएसएस को लेकर उनकी आलोचना दर्शाती है कि देश की राजनीति में इन दोनों संगठनों की नीतियों पर तीव्र असहमतियाँ हैं। कांग्रेस का यह बयान इस समय के राजनीतिक माहौल में महत्वपूर्ण साबित हो सकता है, खासकर जब भारत के संविधान और राष्ट्रीय ध्वज को लेकर कई राजनीतिक बहसें तेज हो रही हैं।
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