Congress Rally:
Congress Rally: कांग्रेस पार्टी आज (तिथि का उल्लेख नहीं) दिल्ली के ऐतिहासिक रामलीला मैदान में ‘वोट चोरी’ के गंभीर मुद्दे को लेकर एक विशाल ‘महारैली’ का आयोजन कर रही है। इस रैली का मुख्य उद्देश्य चुनावी प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं के खिलाफ अपने राष्ट्रव्यापी अभियान को गति देना और सरकार पर दबाव बनाना है। यह रैली ऐसे समय में हो रही है जब लोकसभा में हाल ही में चुनाव सुधारों और मतदाता सूचियों के पुनरीक्षण को लेकर सरकार और विपक्ष के बीच तीखी बहस हो चुकी है।
इस महत्वपूर्ण राजनीतिक सभा को कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और पार्टी के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी संबोधित करेंगे, जो पार्टी के रुख और भविष्य की रणनीति को स्पष्ट करेंगे। इसके अलावा, सोनिया गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा सहित पार्टी के शीर्ष नेतृत्व की भी रैली में भागीदारी सुनिश्चित की गई है। शीर्ष नेताओं की उपस्थिति यह दर्शाती है कि कांग्रेस इस ‘वोट चोरी’ के मुद्दे को कितना गंभीरता से ले रही है और इसे आगामी राजनीतिक लड़ाई का केंद्रीय विषय बनाना चाहती है। कांग्रेस का मानना है कि यह मुद्दा सीधे तौर पर लोकतंत्र और संविधान के मूल्यों से जुड़ा हुआ है।
रैली में शामिल होने के लिए देश के कोने-कोने से कांग्रेस कार्यकर्ता रामलीला मैदान पहुंच रहे हैं। हरियाणा, कर्नाटक, तेलंगाना, हिमाचल प्रदेश, उत्तर प्रदेश, जम्मू कश्मीर, और ओडिशा जैसे राज्यों से कार्यकर्ताओं का आना जारी है, जो कांग्रेस के इस अभियान के प्रति व्यापक समर्थन को दर्शाता है। दिल्ली के हर कोने में इस रैली से जुड़े पोस्टर और बैनर लगाए गए हैं, जिससे शहर में राजनीतिक गर्माहट महसूस की जा रही है। पार्टी के वरिष्ठ नेतागण पहले इंदिरा भवन (पार्टी मुख्यालय) में एकत्रित होंगे और फिर एक साथ बस में सवार होकर रामलीला मैदान के लिए रवाना होंगे, जो एकता और अनुशासन का संदेश देगा।
कांग्रेस महासचिव (संगठन) के. सी. वेणुगोपाल ने इस अभियान की सफलता पर प्रकाश डालते हुए बताया है कि पार्टी ने ‘वोट चोरी’ के खिलाफ लगभग 55 लाख हस्ताक्षर एकत्र किए हैं। वेणुगोपाल ने इस बात पर जोर दिया कि राहुल गांधी ने ‘वोट चोरी’ कैसे हो रही है, इसके सबूत सार्वजनिक रूप से पेश किए हैं और केंद्रीय गृह मंत्री को इस मुद्दे पर प्रेस वार्ता में बहस करने की खुली चुनौती भी दी, जिसका गृह मंत्री ने कोई जवाब नहीं दिया।
वेणुगोपाल ने यह भी बताया कि इस विशाल रैली के तुरंत बाद, कांग्रेस ने राष्ट्रपति से मुलाकात का समय मांगा है। इस मुलाकात का उद्देश्य राष्ट्रपति को 5.5 करोड़ हस्ताक्षरों वाला यह विस्तृत ज्ञापन सौंपना है, ताकि देश के सर्वोच्च संवैधानिक प्रमुख का ध्यान चुनावी प्रक्रिया की कथित अनियमितताओं की ओर आकर्षित किया जा सके और इस गंभीर मुद्दे पर संवैधानिक हस्तक्षेप की मांग की जा सके। यह कदम दिखाता है कि पार्टी केवल प्रदर्शन तक सीमित नहीं रहना चाहती, बल्कि संवैधानिक माध्यमों से कार्रवाई चाहती है।
रैली से एक दिन पहले, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने मौजूदा केंद्र सरकार पर संविधान को कमजोर करने का गंभीर आरोप लगाया। कांग्रेस पार्टी की अनुसूचित जाति (एससी) सलाहकार समिति की पहली बैठक को संबोधित करते हुए, खरगे ने कहा कि पिछली कांग्रेस सरकारों द्वारा दलितों की शिक्षा और नौकरियों के लिए शुरू की गई महत्वपूर्ण पहलों को वर्तमान सरकार ने कमजोर कर दिया है। उन्होंने आरोप लगाया कि बीजेपी सरकार व्यवस्थित रूप से आरक्षण को कमजोर कर रही है और सामाजिक भेदभाव को उचित ठहराने का प्रयास कर रही है। इसके विपरीत, खरगे ने याद दिलाया कि कांग्रेस ने नागरिक अधिकार संरक्षण अधिनियम (1955) और एससी/एसटी अत्याचार निवारण अधिनियम (1989) जैसे ऐतिहासिक कानून बनाकर सामाजिक न्याय को हमेशा आगे बढ़ाया है।
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