Congress Strategic Role
Congress Strategic Role: भारतीय राजनीति के गलियारों में इस बात की चर्चा तेज है कि साल 2026 कांग्रेस पार्टी और विशेषकर प्रियंका गांधी वाड्रा के लिए एक नया मोड़ लेकर आएगा। लंबे समय से बिना किसी विशेष पोर्टफोलियो के महासचिव पद पर बनी रहीं प्रियंका गांधी को अब पार्टी में एक ऐसी अहम भूमिका देने की तैयारी है, जो उनके राजनीतिक कद और प्रभाव के अनुरूप हो। हालांकि, यह स्पष्ट है कि प्रियंका की भूमिका राहुल गांधी के सहयोगी के रूप में ही रहेगी, जो पार्टी के मुख्य रणनीतिकार और ‘सर्वेसर्वा’ बने हुए हैं।
प्रियंका गांधी को इससे पहले उत्तर प्रदेश जैसे महत्वपूर्ण राज्य का प्रभारी महासचिव बनाया गया था। उस वक्त उनके आगमन को लेकर काफी उत्साह था, लेकिन 2022 के विधानसभा चुनावों में कांग्रेस की करारी हार के बाद उन्हें इस जिम्मेदारी से मुक्त कर दिया गया और अविनाश पांडे को यूपी की कमान सौंपी गई। तब से प्रियंका गांधी केवल एक ‘स्टार कैंपेनर’ के तौर पर विभिन्न राज्यों में चुनाव प्रचार कर रही हैं, लेकिन पार्टी के संगठनात्मक ढांचे में उनके पास किसी विशिष्ट विभाग का प्रभार नहीं है।
पार्टी सूत्रों के अनुसार, राहुल गांधी नहीं चाहते थे कि गांधी परिवार का दखल कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे की कार्यशैली पर भारी पड़े। जब खरगे अध्यक्ष बने, तो यह माना गया कि यदि प्रियंका को तुरंत कोई बड़ी जिम्मेदारी दी गई, तो इससे खरगे के कद पर असर पड़ सकता है। इसके बाद 2024 के लोकसभा चुनावों में कांग्रेस ने 99 सीटें जीतकर वापसी की और राहुल गांधी स्वयं नेता प्रतिपक्ष बन गए। इन तमाम समीकरणों के बीच प्रियंका गांधी की आधिकारिक नियुक्ति का मामला कुछ समय के लिए टाल दिया गया था।
अब संकेत मिल रहे हैं कि प्रियंका को किसी एक राज्य की सीमा में बांधने के बजाय, उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर ‘कैंपेन कमेटी प्रमुख’ या ‘इलेक्शन मैनेजमेंट कमेटी’ जैसी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दी जा सकती है। इससे वे देश भर में चुनाव प्रबंधन और प्रचार रणनीतियों को धार दे सकेंगी। कर्नाटक के डिप्टी सीएम डीके शिवकुमार ने भी इस ओर इशारा करते हुए कहा है कि प्रियंका का एकमात्र उद्देश्य अपने भाई राहुल गांधी को प्रधानमंत्री पद पर आसीन देखना है और वे इसी लक्ष्य के लिए समर्पित रहेंगी।
प्रियंका के बढ़ते सियासी कद के बीच कांग्रेस सांसद इमरान मसूद का बयान भी चर्चा में है, जिन्होंने उन्हें देश का भविष्य और प्रधानमंत्री पद के योग्य बताया है। इसके साथ ही प्रियंका के पति रॉबर्ट वाड्रा ने भी कहा है कि चारों तरफ से प्रियंका को आगे लाने की मांग हो रही है। वाड्रा ने अपने राजनीति में आने की संभावनाओं को भी पूरी तरह नकारा नहीं है, हालांकि उन्होंने फिलहाल जनहित के मुद्दों पर ध्यान केंद्रित करने की बात कही है।
सोनिया गांधी अब सक्रिय राजनीति में पर्दे के पीछे जा चुकी हैं, जिससे राहुल और प्रियंका के लिए मैदान पूरी तरह साफ है। साल 2026 की यह नई व्यवस्था कांग्रेस को एक आधुनिक और आक्रामक चुनावी मशीन में बदलने की कोशिश मानी जा रही है। जहां राहुल गांधी वैचारिक और विपक्षी नेतृत्व की कमान संभालेंगे, वहीं प्रियंका गांधी संगठन को ऊर्जा देने और जनता से सीधे जुड़ाव का मोर्चा संभालेंगी।
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