VB-G RAM G Bill 2025
VB-G RAM G Bill 2025: केंद्र सरकार द्वारा MGNREGA (मनरेगा) के नाम और इसके मूल स्वरूप में किए जा रहे बदलावों ने देश की सियासत में एक नया मोड़ ला दिया है। कांग्रेस पार्टी ने इस बदलाव के खिलाफ अपनी पूरी ताकत झोंकने का ऐलान किया है, लेकिन इस बार विरोध का तरीका काफी अलग और रणनीतिक है। पार्टी के भीतर इस बात पर गहन मंथन हुआ है कि ‘VB’ (Vikas Bill) या नए नामकरण में ‘राम’ शब्द के उपयोग को लेकर किस तरह की प्रतिक्रिया दी जाए। कांग्रेस ने स्पष्ट किया है कि उनके लिए ‘जी राम जी’ का अर्थ ‘ग्राम जी’ (गाँव) है।
पार्टी हाईकमान भारतीय जनता पार्टी की हर चाल पर पैनी नजर रख रहा है ताकि इस विरोध प्रदर्शन के दौरान उन पर ‘हिंदू विरोधी’ या ‘राम विरोधी’ होने का ठप्पा न लग सके। यही कारण है कि कांग्रेस अब ‘G RAM G’ को ‘ग्राम जी’ कहकर संबोधित कर रही है, जिससे विकास का मुद्दा केंद्र में रहे।
बाबरी मस्जिद के विध्वंस से लेकर अयोध्या में भव्य राम मंदिर के निर्माण और उसके उद्घाटन तक, भाजपा ने कांग्रेस की धर्मनिरपेक्षता की लड़ाई को अक्सर ‘राम विरोधी’ बताकर प्रचारित किया है। कांग्रेस इस इतिहास से भली-भांति परिचित है और इस बार वह भगवा खेमे को ऐसा कोई मौका नहीं देना चाहती। देश की सबसे पुरानी राजनीतिक पार्टी अब अत्यंत सावधानी बरत रही है। संसद में नए बिल पर चर्चा के दौरान कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों ने यह साफ कर दिया कि उन्हें प्रभु श्री राम के नाम पर कोई आपत्ति नहीं है। उनकी आपत्ति हर जनकल्याणकारी योजना को धार्मिक रंग देने और उसका स्वरूप बदलने पर है। कांग्रेस का तर्क है कि महात्मा गांधी के नाम से जुड़ी इस योजना का मूल उद्देश्य ग्रामीण रोजगार है, जिसे धार्मिक प्रतीकों में उलझाना अनुचित है।
केंद्र के इस कदम के खिलाफ कांग्रेस ने एक व्यापक आंदोलन की रूपरेखा तैयार की है। 8 जनवरी से 25 फरवरी तक चलने वाला यह विरोध प्रदर्शन तीन मुख्य चरणों में आयोजित किया जाएगा। पार्टी कार्यकर्ता ब्लॉक स्तर से लेकर राष्ट्रीय स्तर तक सड़कों पर उतरेंगे। कांग्रेस ने अपने ‘इंडिया’ (INDIA) गठबंधन के सहयोगी दलों से भी अपील की है कि वे इस डेढ़ महीने लंबे चलने वाले कार्यक्रम में शामिल हों। इस आंदोलन का मुख्य उद्देश्य जनता को यह बताना है कि सरकार बुनियादी रोजगार गारंटी योजना के मूल ढांचे के साथ छेड़छाड़ कर रही है। कांग्रेस अपने जमीनी स्तर के कार्यकर्ताओं को स्पष्ट निर्देश दे रही है कि वे ‘ग्राम जी’ के मुद्दे पर अडिग रहें और किसी भी विवादित नारेबाजी से बचें जो भाजपा के नैरेटिव को बल दे सके।
सड़कों पर विरोध के साथ-साथ कांग्रेस इस लड़ाई को देश की सर्वोच्च अदालत (सुप्रीम कोर्ट) तक ले जाने की तैयारी में है। पार्टी सूत्रों के अनुसार, कांग्रेस के महासचिव जयराम रमेश या पार्टी का कोई वरिष्ठ नेता व्यक्तिगत तौर पर सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर सकता है। इसके बाद, कांग्रेस शासित राज्य भी इस कानूनी लड़ाई का हिस्सा बनेंगे। तेलंगाना विधानसभा ने पहले ही इस कानून के खिलाफ प्रस्ताव पारित कर दिया है, और उम्मीद है कि कर्नाटक तथा हिमाचल प्रदेश की सरकारें भी जल्द ही ऐसा कदम उठाएंगी। कांग्रेस गैर-भाजपा शासित राज्यों को भी पत्र लिखकर एकजुट होने का प्रस्ताव भेज रही है।
कांग्रेस की यह नई ‘ग्राम जी’ रणनीति दर्शाती है कि पार्टी अब भाजपा के पिच पर खेलने के बजाय अपनी अलग लकीर खींचने की कोशिश कर रही है। वह विकास और रोजगार के मुद्दों को धार्मिक भावनाओं से अलग रखकर जनता के बीच ले जाना चाहती है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या कांग्रेस का यह ‘सॉफ्ट’ लेकिन कड़ा रुख ग्रामीण मतदाताओं को प्रभावित कर पाता है या भाजपा एक बार फिर इसे अपने पक्ष में मोड़ने में सफल रहती है।
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