Congress VP nominee : उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ के इस्तीफे के बाद देश का दूसरा सर्वोच्च संवैधानिक पद खाली हो गया है। इसी बीच छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी (PCC) ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर मांग की है कि इस बार प्रदेश के किसी वरिष्ठ नेता को यह महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी जाए।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने प्रधानमंत्री को लिखे पत्र में भाजपा के वरिष्ठ नेता और पूर्व राज्यपाल रमेश बैस का नाम उपराष्ट्रपति पद के लिए आगे बढ़ाया है। बैज ने कहा कि रमेश बैस का राजनीतिक अनुभव और सेवा भाव उन्हें इस पद के लिए उपयुक्त बनाता है। वे सात बार लोकसभा सांसद रहे हैं और झारखंड, त्रिपुरा व महाराष्ट्र जैसे राज्यों के राज्यपाल के रूप में अपनी सेवाएं दे चुके हैं।
अपने पत्र में बैज ने यह भी लिखा कि वर्तमान में छत्तीसगढ़ के पास केंद्र सरकार में कोई उच्च पद नहीं है। भाजपा के पास राज्य से 10 लोकसभा सांसद होने के बावजूद किसी को केंद्रीय कैबिनेट में स्थान नहीं मिला। ऐसे में उपराष्ट्रपति पद के लिए छत्तीसगढ़ को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
इस पत्र पर प्रतिक्रिया देते हुए भाजपा नेता अमित चिमनानी ने कांग्रेस पर पलटवार किया। उन्होंने कहा कि जब छत्तीसगढ़ से राज्यसभा सदस्य चुने जाने की बात आई, तो कांग्रेस ने प्रदेश को नजरअंदाज कर बाहरी नेता को राज्यसभा भेजा। भाजपा तो हमेशा से छत्तीसगढ़ को प्रतिनिधित्व देती रही है।
दीपक बैज ने कहा कि 2014, 2019 और 2024 में भाजपा ने छत्तीसगढ़ से लगातार बड़ी संख्या में लोकसभा सीटें जीतीं, लेकिन तीनों कार्यकाल में राज्य को सिर्फ राज्य मंत्री पद तक सीमित रखा गया। उन्होंने कहा कि यह छत्तीसगढ़ के लिए अन्याय है और प्रदेश के नेताओं की योग्यता को नजरअंदाज किया गया है।
बैज ने यह भी कहा कि रमेश बैस जैसे नेता का नाम आगे बढ़ाकर कांग्रेस ने दलगत राजनीति से ऊपर उठकर छत्तीसगढ़ के प्रतिनिधित्व की बात की है। उन्होंने कहा कि भाजपा यदि वास्तव में अपने वरिष्ठ नेताओं का सम्मान करना चाहती है, तो उन्हें उपराष्ट्रपति जैसे गरिमामयी पद तक पहुंचाना चाहिए।
पत्र में रमेश बैस के संसदीय अनुभव, राज्यपाल के रूप में कार्यकाल और राजनीतिक परिपक्वता को देश के दूसरे सर्वोच्च पद के लिए उपयुक्त बताया गया है। बैज ने कहा कि संविधान के सम्मान और संघीय ढांचे की दृष्टि से भी यह जरूरी है कि भारत के विविध राज्यों को उपराष्ट्रपति पद जैसे अवसर मिलें।
विशेषज्ञों का मानना है कि कांग्रेस द्वारा रमेश बैस का नाम आगे बढ़ाना एक रणनीतिक कदम है। यह न केवल भाजपा को अपने ही वरिष्ठ नेताओं की उपेक्षा पर सोचने को मजबूर करेगा, बल्कि छत्तीसगढ़ में कांग्रेस की ‘लोकल कार्ड’ रणनीति को भी बल देगा।
अब यह देखना दिलचस्प होगा कि भाजपा इस पत्र और सुझाव पर क्या रुख अपनाती है। क्या छत्तीसगढ़ से किसी नेता को यह सम्मान मिलेगा, या फिर एक बार फिर राज्य को सिर्फ राजनीतिक समर्थन तक ही सीमित रखा जाएगा, यह आने वाला समय बताएगा।
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