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Parliament Session: शीत सत्र में तकरार तय, SIR के जरिए NRC लागू करने के आरोप पर केंद्र सरकार क्या देगी जवाब?

Parliament Session:  चुनाव आयोग द्वारा 12 राज्यों में मतदाता सूची के विशेष सघन पुनरीक्षण (एसआईआर) की घोषणा के बाद सियासी हलचल तेज हो गई है। विपक्षी गठबंधन आईएनडीआइए (INDIA) ने इस प्रक्रिया को “एनआरसी (National Register of Citizens) की ओर पहला कदम” बताते हुए केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है। विपक्षी दलों का आरोप है कि सरकार एसआईआर को नागरिकता प्रमाणित करने का औजार बनाकर “छिपे तरीके से एनआरसी लागू” करना चाहती है।

संसद के शीत सत्र में एसआईआर के खिलाफ मोर्चाबंदी

कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, तृणमूल कांग्रेस, द्रमुक और वामपंथी दलों सहित आईएनडीआइए के रणनीतिकारों ने संसद के आगामी शीत सत्र में इस मुद्दे पर एकजुट होकर मोर्चाबंदी करने की रणनीति तैयार करनी शुरू कर दी है। विपक्षी दलों का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट भले ही एसआईआर को चुनाव आयोग का अधिकार बता चुका हो, लेकिन इस प्रक्रिया के पीछे “राजनीतिक उद्देश्य” छिपा है।

एक वरिष्ठ विपक्षी रणनीतिकार ने कहा, “सरकार सीधे तौर पर एनआरसी लागू करने की हिम्मत नहीं जुटा पा रही, इसलिए चुनाव आयोग को माध्यम बनाकर नागरिकता निर्धारित करने की कवायद चल रही है। यह राष्ट्रीय स्तर पर एनआरसी लागू करने की शुरुआत है।”

“एसआईआर का लक्ष्य नागरिकता तय करना है”

विपक्षी दलों का कहना है कि चुनाव आयोग के पास नागरिकता तय करने का कोई संवैधानिक अधिकार नहीं है, फिर भी एसआईआर के जरिये नागरिकों की पहचान और मतदाता सूची से नाम हटाने की तैयारी की जा रही है। विपक्ष का आरोप है कि सरकार एसआईआर को “3D – Detect, Delete और Deport” की अवधारणा से जोड़ रही है, जो नागरिकता और घुसपैठ के मुद्दे से सीधे जुड़ी है।

कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता ने कहा, “ममता बनर्जी, एम.के. स्टालिन, और पिनरई विजयन जैसे मुख्यमंत्री भी इसे ‘पिछले दरवाजे से एनआरसी लागू करने की कोशिश’ बता चुके हैं। चुनाव आयोग ने बिहार समेत कई राज्यों में विपक्ष की शिकायतों को नज़रअंदाज़ किया है और यह कहकर झूठ बोला जा रहा है कि कोई शिकायत नहीं मिली।”

चुनाव आयोग पर पक्षपात के आरोप

विपक्ष का आरोप है कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार एसआईआर पर विपक्ष के सवालों का जवाब देने से बच रहे हैं। उनका कहना है कि आयोग बिहार में हुए एसआईआर के दौरान कितने “घुसपैठियों” को डिटेक्ट कर सूची से हटाया गया, इसका आंकड़ा तक साझा नहीं कर रहा।

कांग्रेस नेता ने कहा, “आयोग का रवैया पूरी तरह पक्षपातपूर्ण है। इसीलिए विपक्ष ने मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव लाने का विकल्प खुला रखा है। संसद के शीतकालीन सत्र में विपक्ष इस पर एकजुट होकर निर्णय लेगा।”

विपक्ष की रणनीति और सरकार का रुख

सूत्रों के अनुसार, आईएनडीआइए ब्लॉक एसआईआर को लेकर संयुक्त प्रस्ताव या चर्चा की मांग कर सकता है। वहीं, सरकार का कहना है कि एसआईआर सामान्य प्रक्रिया है और हर चुनाव से पहले मतदाता सूची के पुनरीक्षण के लिए ऐसा अभियान चलाया जाता है।

हालांकि, विपक्ष इसे “जनगणना और एनपीआर से जोड़ने की साजिश” बता रहा है। उनका कहना है कि एनपीआर (National Population Register) जनसंख्या का रिकॉर्ड रखता है, जबकि एनआरसी केवल नागरिकों का। ऐसे में एसआईआर के जरिए नागरिकता निर्धारण की कोशिश संविधान की भावना के विपरीत है।एसआईआर पर उठ रहा यह राजनीतिक विवाद अब संसद तक पहुंचने वाला है। विपक्ष जहां इसे “एनआरसी की तैयारी” बता रहा है, वहीं केंद्र और चुनाव आयोग इसे “सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया” कह रहे हैं। अब नज़रें संसद के शीतकालीन सत्र पर हैं, जहां इस मुद्दे पर सरकार बनाम विपक्ष की सीधी टक्कर देखने को मिल सकती है।

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