Cooking Oil : हमारी रोजाना की डाइट में तेल एक जरूरी हिस्सा है, लेकिन खाना पकाने के लिए इस्तेमाल होने वाले हर तेल को सेहत के लिए समान नहीं माना जाता। तेल का प्रकार, उसकी प्रोसेसिंग, उसमें मौजूद फैटी एसिड और हम उसका कितनी मात्रा में सेवन करते हैं, इन सभी बातों का स्वास्थ्य पर असर पड़ सकता है। आयुर्वेदिक डॉक्टर सलीम जैदी ने खाना पकाने में कुछ तरह के रिफाइंड ऑयल और वनस्पति घी के नियमित इस्तेमाल को लेकर सावधानी बरतने की सलाह दी है।
रिफाइंड ऑयल को लेकर क्यों उठते हैं सवाल?
डॉक्टर सलीम जैदी के अनुसार, खाना पकाने में सनफ्लॉवर ऑयल, सोयाबीन ऑयल, राइस ब्रान ऑयल, कैनोला ऑयल और वनस्पति घी जैसे विकल्पों का इस्तेमाल सोच-समझकर करना चाहिए। बाजार में कई तेलों की पैकेजिंग पर हार्ट हेल्थ से जुड़े दावे दिखाई देते हैं, लेकिन किसी तेल को केवल उसके लेबल के आधार पर स्वस्थ या अस्वस्थ नहीं माना जा सकता। उसकी प्रोसेसिंग, पोषण संरचना और सेवन की मात्रा भी महत्वपूर्ण होती है।
तेल की प्रोसेसिंग का स्वास्थ्य पर क्या असर पड़ता है?
रिफाइंड तेल तैयार करने के दौरान बीजों और तेल को कई औद्योगिक प्रक्रियाओं से गुजारा जाता है। इनमें गर्म करने, फिल्टर करने और अन्य रिफाइनिंग प्रक्रियाएं शामिल हो सकती हैं। अत्यधिक गर्मी और प्रोसेसिंग से तेल की कुछ प्राकृतिक विशेषताओं में बदलाव आ सकता है। हालांकि, किसी विशेष तेल से कैंसर या अन्य गंभीर बीमारी सीधे होने का दावा वैज्ञानिक रूप से स्थापित करने के लिए पर्याप्त संदर्भ और प्रमाण जरूरी होते हैं।
वनस्पति घी में ट्रांस फैट की चिंता
वनस्पति घी यानी डालडा जैसे हाइड्रोजेनेटेड फैट को लेकर स्वास्थ्य विशेषज्ञ लंबे समय से सावधानी बरतने की सलाह देते रहे हैं। खास तौर पर औद्योगिक ट्रांस फैट का अधिक सेवन हृदय स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक माना जाता है। ट्रांस फैट शरीर में खराब कोलेस्ट्रॉल बढ़ाने और अच्छे कोलेस्ट्रॉल को कम करने से जुड़ा है, इसलिए इसका सेवन जितना कम हो, उतना बेहतर माना जाता है।
ट्रांस फैट से हृदय रोग का बढ़ सकता है जोखिम
विश्व स्वास्थ्य संगठन यानी WHO भी औद्योगिक रूप से उत्पादित ट्रांस फैट को कम करने या समाप्त करने की दिशा में देशों को प्रोत्साहित करता है। अधिक ट्रांस फैट का सेवन हृदय रोग के बढ़े हुए जोखिम से जुड़ा पाया गया है। इसलिए पैकेज्ड खाद्य पदार्थों और ऐसे फैट का इस्तेमाल सीमित रखना जरूरी है, जिनमें औद्योगिक ट्रांस फैट मौजूद हो सकते हैं।
खाना पकाने के लिए कौन सा तेल चुनें?
डॉक्टर सलीम जैदी खाना पकाने के लिए देसी घी या कच्ची घानी सरसों के तेल को विकल्प के तौर पर इस्तेमाल करने की सलाह देते हैं। हालांकि, किसी भी तेल या घी को जरूरत से ज्यादा मात्रा में लेना उचित नहीं है। खाना पकाने के तेल का चुनाव व्यक्ति की कुल डाइट, स्वास्थ्य स्थिति, ऊर्जा जरूरत और डॉक्टर या डाइटिशियन की सलाह के आधार पर किया जाना चाहिए।
सिर्फ तेल बदलने से नहीं सुधरेगी पूरी सेहत
हार्ट, लिवर और ब्रेन को स्वस्थ रखने के लिए केवल खाना पकाने का तेल बदलना पर्याप्त नहीं है। संतुलित आहार, पर्याप्त शारीरिक गतिविधि, वजन का प्रबंधन, धूम्रपान से दूरी और कम प्रोसेस्ड भोजन भी महत्वपूर्ण हैं। यदि किसी व्यक्ति को कोलेस्ट्रॉल, डायबिटीज या हृदय संबंधी बीमारी है, तो डाइट में बड़े बदलाव करने से पहले डॉक्टर या योग्य पोषण विशेषज्ञ से सलाह लेना बेहतर है।
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