अदालत ने कोलकाता में TMC विधायक Jeeban Krishna Saha को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेजा

Jeeban Krishna Saha : पश्चिम बंगाल के टीएमसी विधायक जीवन कृष्ण साहा को प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने शनिवार को गिरफ्तार कर लिया था । कोलकाता की विशेष पीएमएलए (प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट) अदालत ने साहा को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया। इस गिरफ्तारी के बाद राज्य की राजनीति में एक और हलचल मच गई है। साहा की गिरफ्तारी और ईडी की कार्रवाई ईडी के वकील भास्कर प्रसाद बनर्जी ने अदालत में इस मामले को लेकर अपील की कि साहा को न्यायिक हिरासत में भेजा जाए। विधायक ने अपनी गिरफ्तारी के बाद अदालत में जमानत के लिए कोई अर्जी नहीं दी। साहा, जो मुर्शिदाबाद जिले के बुरवान विधानसभा क्षेत्र से विधायक हैं, को उनके घर पर की गई छापेमारी के दौरान गिरफ्तार किया गया। ईडी के अधिकारियों ने बताया कि छापेमारी उनके सहयोगियों और एक कथित दलाल प्रसन्न कुमार रॉय के ठिकानों पर भी की गई। अप्रैल 2023 में सीबीआई की गिरफ्तारी और उसके बाद की घटनाएँ यह पहली बार नहीं है जब साहा का नाम विवादों में आया है। इससे पहले, अप्रैल 2023 में सीबीआई ने साहा को स्कूल जॉब भर्ती घोटाले के मामले में गिरफ्तार किया था। उस मामले में भी साहा पर सरकारी नौकरी देने के बदले रिश्वत लेने के आरोप थे। हालांकि, मई 2024 में सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें जमानत दे दी थी। अब, मनी लॉन्ड्रिंग मामले में ईडी ने उन्हें गिरफ्तार किया है, जिससे उनकी स्थिति और अधिक जटिल हो गई है। टीएमसी के लिए एक और चुनौती टीएमसी (तृणमूल कांग्रेस) के लिए यह एक और बड़ी चुनौती है, क्योंकि साहा पार्टी के एक प्रभावशाली विधायक रहे हैं। साहा की गिरफ्तारी राज्य सरकार और पार्टी के लिए एक और राजनीतिक संकट का कारण बन सकती है। इस घटनाक्रम को लेकर विपक्षी दलों ने तीखी प्रतिक्रिया दी है, जबकि तृणमूल कांग्रेस ने अभी तक कोई औपचारिक बयान नहीं दिया है। मनी लॉन्ड्रिंग और सीबीआई जांच का विस्तार टीएमसी विधायक की गिरफ्तारी और उनके खिलाफ चल रही जांचें, पश्चिम बंगाल में मनी लॉन्ड्रिंग के मामलों को लेकर नए सवाल खड़े कर रही हैं। प्रवर्तन निदेशालय के द्वारा इस मामले में जांच का दायरा लगातार बढ़ता जा रहा है। साहा पर आरोप है कि उन्होंने मनी लॉन्ड्रिंग और सरकारी पदों में अवैध नियुक्तियों के जरिए अवैध लाभ कमाया। ईडी के अधिकारियों का कहना है कि इस मामले में कई और लोग शामिल हो सकते हैं, और जांच जारी है। अब यह देखना होगा कि जांच के दौरान और कौन-कौन से नाम सामने आते हैं और क्या साहा को इस मामले में अधिक आरोपों का सामना करना पड़ेगा। जीवन कृष्ण साहा की गिरफ्तारी और मनी लॉन्ड्रिंग मामले में उनकी संलिप्तता ने एक बार फिर से विपक्षी दलों को पश्चिम बंगाल सरकार और तृणमूल कांग्रेस के खिलाफ निशाना बनाने का मौका दिया है। वहीं, ईडी की इस कार्रवाई से यह साबित होता है कि जांच एजेंसियां इस मामले में कोई कोताही नहीं बरतने वाली हैं। अब देखने वाली बात यह होगी कि इस मामले का राजनीतिक असर पश्चिम बंगाल की राजनीति पर किस हद तक पड़ेगा। Read More : Operation Sindoor : भारतीय वायुसेना की रणनीति ने पाकिस्तान को कैसे किया झुका

Jeeban Krishna Saha : पश्चिम बंगाल के टीएमसी विधायक जीवन कृष्ण साहा को प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने शनिवार को गिरफ्तार कर लिया था । कोलकाता की विशेष पीएमएलए (प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट) अदालत ने साहा को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया। इस गिरफ्तारी के बाद राज्य की राजनीति में एक और हलचल मच गई है।

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साहा की गिरफ्तारी और ईडी की कार्रवाई

ईडी के वकील भास्कर प्रसाद बनर्जी ने अदालत में इस मामले को लेकर अपील की कि साहा को न्यायिक हिरासत में भेजा जाए। विधायक ने अपनी गिरफ्तारी के बाद अदालत में जमानत के लिए कोई अर्जी नहीं दी। साहा, जो मुर्शिदाबाद जिले के बुरवान विधानसभा क्षेत्र से विधायक हैं, को उनके घर पर की गई छापेमारी के दौरान गिरफ्तार किया गया। ईडी के अधिकारियों ने बताया कि छापेमारी उनके सहयोगियों और एक कथित दलाल प्रसन्न कुमार रॉय के ठिकानों पर भी की गई।

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अप्रैल 2023 में सीबीआई की गिरफ्तारी और उसके बाद की घटनाएँ

यह पहली बार नहीं है जब साहा का नाम विवादों में आया है। इससे पहले, अप्रैल 2023 में सीबीआई ने साहा को स्कूल जॉब भर्ती घोटाले के मामले में गिरफ्तार किया था। उस मामले में भी साहा पर सरकारी नौकरी देने के बदले रिश्वत लेने के आरोप थे। हालांकि, मई 2024 में सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें जमानत दे दी थी। अब, मनी लॉन्ड्रिंग मामले में ईडी ने उन्हें गिरफ्तार किया है, जिससे उनकी स्थिति और अधिक जटिल हो गई है।

टीएमसी के लिए एक और चुनौती

टीएमसी (तृणमूल कांग्रेस) के लिए यह एक और बड़ी चुनौती है, क्योंकि साहा पार्टी के एक प्रभावशाली विधायक रहे हैं। साहा की गिरफ्तारी राज्य सरकार और पार्टी के लिए एक और राजनीतिक संकट का कारण बन सकती है। इस घटनाक्रम को लेकर विपक्षी दलों ने तीखी प्रतिक्रिया दी है, जबकि तृणमूल कांग्रेस ने अभी तक कोई औपचारिक बयान नहीं दिया है।

मनी लॉन्ड्रिंग और सीबीआई जांच का विस्तार

टीएमसी विधायक की गिरफ्तारी और उनके खिलाफ चल रही जांचें, पश्चिम बंगाल में मनी लॉन्ड्रिंग के मामलों को लेकर नए सवाल खड़े कर रही हैं। प्रवर्तन निदेशालय के द्वारा इस मामले में जांच का दायरा लगातार बढ़ता जा रहा है। साहा पर आरोप है कि उन्होंने मनी लॉन्ड्रिंग और सरकारी पदों में अवैध नियुक्तियों के जरिए अवैध लाभ कमाया।

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ईडी के अधिकारियों का कहना है कि इस मामले में कई और लोग शामिल हो सकते हैं, और जांच जारी है। अब यह देखना होगा कि जांच के दौरान और कौन-कौन से नाम सामने आते हैं और क्या साहा को इस मामले में अधिक आरोपों का सामना करना पड़ेगा।

जीवन कृष्ण साहा की गिरफ्तारी और मनी लॉन्ड्रिंग मामले में उनकी संलिप्तता ने एक बार फिर से विपक्षी दलों को पश्चिम बंगाल सरकार और तृणमूल कांग्रेस के खिलाफ निशाना बनाने का मौका दिया है। वहीं, ईडी की इस कार्रवाई से यह साबित होता है कि जांच एजेंसियां इस मामले में कोई कोताही नहीं बरतने वाली हैं। अब देखने वाली बात यह होगी कि इस मामले का राजनीतिक असर पश्चिम बंगाल की राजनीति पर किस हद तक पड़ेगा।

Read More : Operation Sindoor : भारतीय वायुसेना की रणनीति ने पाकिस्तान को कैसे किया झुका

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