Chaitanya Baghel remand : छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित शराब घोटाले मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने बड़ा कदम उठाते हुए पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के बेटे चैतन्य बघेल को गिरफ्तार कर लिया है। शुक्रवार सुबह करीब 6:20 बजे ईडी की टीम ने भिलाई स्थित बघेल निवास पर दबिश दी और लंबी पूछताछ के बाद चैतन्य को हिरासत में लेकर रायपुर ले जाया गया। रायपुर जिला अदालत में पेशी के बाद कोर्ट ने उन्हें 5 दिन की कस्टोडियल रिमांड पर ईडी को सौंप दिया।
चैतन्य की गिरफ्तारी की खबर सामने आते ही छत्तीसगढ़ की राजनीति गरमा गई। कांग्रेस नेताओं ने इस कार्रवाई को राजनीति से प्रेरित बताते हुए सख्त प्रतिक्रिया दी। खुद पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल, नेता प्रतिपक्ष चरणदास महंत और कई कांग्रेस विधायक रायपुर कोर्ट पहुंचे। वहां से वे ईडी कार्यालय (पचपेड़ी नाका) के लिए रवाना हुए, जहां चैतन्य को रिमांड पर लाए जाने की प्रक्रिया पूरी की गई।
चैतन्य बघेल की गिरफ्तारी की गूंज विधानसभा में भी सुनाई दी। कांग्रेस विधायकों ने इस मुद्दे को सदन में जोर-शोर से उठाया, लेकिन सरकार की ओर से जवाब नहीं मिलने पर नाराज कांग्रेस विधायक सदन से वॉकआउट कर गए। कांग्रेस ने आरोप लगाया कि यह कार्रवाई केंद्र सरकार की शह पर की गई है ताकि विपक्ष की आवाज दबाई जा सके।
रायपुर जिला अदालत में सुनवाई के दौरान ईडी ने कोर्ट को बताया कि चैतन्य बघेल से शराब घोटाले के अंतर्गत मनी लॉन्ड्रिंग के आरोपों को लेकर गहन पूछताछ की जानी है। ईडी ने कहा कि प्रारंभिक जांच में कई अहम सुराग मिले हैं, जिनकी पुष्टि चैतन्य से पूछताछ के जरिए करनी जरूरी है। अदालत ने दलीलों को सुनने के बाद पांच दिन की ईडी रिमांड मंजूर की। भिलाई में जब ईडी की टीम चैतन्य को लेकर बाहर निकल रही थी, तब कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने ईडी की गाड़ी को घेर लिया और विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। माहौल तनावपूर्ण हो गया, जिसके चलते पुलिस को तत्काल स्थिति संभालनी पड़ी। पुलिस बल की भारी मौजूदगी में ईडी की टीम चैतन्य को लेकर किसी तरह रायपुर पहुंच सकी।
यह मामला छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित 2100 करोड़ रुपये के शराब घोटाले से जुड़ा है, जिसकी जांच ईडी लंबे समय से कर रही है। जांच एजेंसी के अनुसार राज्य में एक संगठित शराब सिंडिकेट काम कर रहा था, जो न केवल अवैध रूप से शराब बेच रहा था, बल्कि उसके जरिए पैसे की हेराफेरी और मनी लॉन्ड्रिंग भी की जा रही थी। इस सिंडिकेट में चैतन्य बघेल की भूमिका को लेकर भी गंभीर संदेह है, जिस पर ईडी जांच कर रही है।
इस मामले में इससे पहले छत्तीसगढ़ के पूर्व आबकारी मंत्री कवासी लखमा को भी ईडी ने गिरफ्तार किया था। उन्हें पहले से जेल भेजा जा चुका है। ईडी का कहना है कि लखमा और अन्य अधिकारियों की मिलीभगत से यह सिंडिकेट लंबे समय से सक्रिय था और सरकारी तंत्र का उपयोग करके बड़े पैमाने पर अवैध धंधा चलाया गया।
चैतन्य बघेल को कोर्ट से रिमांड मिलने के बाद ईडी की टीम उन्हें रायपुर के पचपेड़ी नाका स्थित कार्यालय ले गई। वहां पहले से ही कांग्रेस नेता और सैकड़ों कार्यकर्ता मौजूद थे, जिन्होंने गिरफ्तारी को लेकर जमकर नारेबाजी की। कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि यह गिरफ्तारी केंद्र सरकार की ओर से कांग्रेस नेतृत्व को दबाने की रणनीति का हिस्सा है। स्थिति को देखते हुए पुलिस बल की तैनाती भी बढ़ा दी गई है।
अब ईडी की टीम अगले पांच दिन तक चैतन्य से पूछताछ कर घोटाले की कड़ियों को जोड़ने की कोशिश करेगी। एजेंसी को उम्मीद है कि इस दौरान कई बड़े खुलासे हो सकते हैं। वहीं कांग्रेस ने साफ कर दिया है कि वह इस कार्रवाई को “राजनीतिक प्रतिशोध” मानती है और सड़कों से लेकर विधानसभा तक विरोध जारी रखेगी। पार्टी नेताओं ने चेतावनी दी है कि यदि उत्पीड़न बंद नहीं हुआ, तो राज्यव्यापी आंदोलन छेड़ा जाएगा।
चैतन्य बघेल की गिरफ्तारी छत्तीसगढ़ की राजनीति में एक नया मोड़ ले आई है। जहां ईडी इसे घोटाले की जांच का तार्किक कदम मान रही है, वहीं कांग्रेस इसे पूरी तरह से “केंद्र सरकार की साजिश” करार दे रही है। आने वाले दिनों में यह मामला और तूल पकड़ सकता है, जिससे राज्य की सियासत गरम रहने के पूरे आसार हैं।
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