CPC delegation BJP HQ
CPC delegation BJP HQ: मंगलवार को भारतीय राजनीति में उस समय भूचाल आ गया जब कांग्रेस ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और चीन की कम्युनिस्ट पार्टी (CPC) के डेलिगेशन के बीच हुई मुलाकात को लेकर कड़े सवाल दागे। कांग्रेस ने इस बैठक की टाइमिंग और मंशा पर संदेह जताते हुए केंद्र सरकार को घेरा है। कांग्रेस की प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर भाजपा मुख्यालय में हुई इस बैठक की एक तस्वीर साझा की। उन्होंने भाजपा से सीधा सवाल पूछा कि देश की सुरक्षा को ताक पर रखकर चीनी नेताओं के साथ किस तरह का ‘गुप्त समझौता’ किया जा रहा है? कांग्रेस ने इस मुलाकात को ‘देशद्रोह’ तक करार देते हुए पूछा है कि आखिर भाजपा और चीन के बीच यह कैसा रिश्ता है?
इस विवाद की आग तब और भड़क गई जब कांग्रेस ने चीन के विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता माओ निंग का एक वीडियो पोस्ट किया। इस वीडियो में चीनी प्रवक्ता ने विवादास्पद बयान देते हुए कहा कि “शक्सगाम घाटी चीन का अभिन्न हिस्सा है और वहां बुनियादी ढांचे का निर्माण करना उनके संप्रभु अधिकार में आता है।” जम्मू-कश्मीर के इस रणनीतिक इलाके पर चीन के खुले दावे ने भारतीय संप्रभुता को चुनौती दी है। कांग्रेस ने इस वीडियो के जरिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर कटाक्ष करते हुए पूछा कि चीन द्वारा भारतीय जमीन पर दावा ठोकने के बावजूद सरकार चुप क्यों है?
कांग्रेस ने प्रधानमंत्री मोदी के पुराने बयानों को याद दिलाते हुए उनकी विदेश नीति को ‘वेंटिलेटर’ पर बताया है। कांग्रेस के आधिकारिक हैंडल से ट्वीट किया गया कि मोदी जी की ‘लाल आंख’ दिखाने वाली छवि अब कहां गायब हो गई है? जब चीन लगातार जम्मू-कश्मीर की शक्सगाम घाटी को अपना बता रहा है और भारतीय सीमाओं के करीब निर्माण कार्य कर रहा है, तब भाजपा नेता दिल्ली में उन्हीं चीनी नेताओं की मेजबानी कर रहे हैं। विपक्ष का आरोप है कि केंद्र सरकार की ढुलमुल विदेश नीति के कारण चीन के हौसले बुलंद हो रहे हैं और वह भारतीय क्षेत्रों पर अतिक्रमण करने की हिम्मत जुटा पा रहा है।
दरअसल, सोमवार को दिल्ली स्थित भाजपा मुख्यालय में दोनों पार्टियों के प्रतिनिधिमंडलों की एक औपचारिक बैठक हुई थी। इस चीनी प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व सुन हेयान ने किया, जो कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ चाइना के इंटरनेशनल डिपार्टमेंट (IDCPC) में वाइस मिनिस्टर के पद पर तैनात हैं। वहीं, भाजपा की ओर से राष्ट्रीय महासचिव अरुण सिंह ने कमान संभाली। भाजपा के विदेश मामलों के विभाग के प्रभारी विजय चौथाईवाला ने इस मुलाकात की पुष्टि करते हुए बताया कि बैठक का मुख्य उद्देश्य दोनों राजनीतिक दलों के बीच ‘इंटर-पार्टी कम्युनिकेशन’ (अंतर-पार्टी संचार) को और बेहतर बनाना था।
भाजपा ने जहां इस मुलाकात को एक सामान्य कूटनीतिक प्रक्रिया बताया है, वहीं कांग्रेस ने इसे राष्ट्रीय सुरक्षा से जोड़ दिया है। कांग्रेस का तर्क है कि एक तरफ सीमा पर तनाव बना हुआ है और चीन हमारी जमीन पर दावा कर रहा है, तो दूसरी तरफ सत्ताधारी दल के साथ चीनी नेताओं की यह ‘मैत्रीपूर्ण’ चर्चा संदेहास्पद है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आगामी चुनावों से पहले ‘चीन का मुद्दा’ एक बार फिर राष्ट्रीय सुरक्षा और राष्ट्रवाद की बहस का केंद्र बनने जा रहा है। अब देश की जनता भाजपा से इस मुलाकात के ठोस कारणों और चीन के सीमाई दावों पर स्पष्टीकरण की उम्मीद कर रही है।
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