Cuttack hospital tragedy
Cuttack hospital tragedy: ओडिशा के कटक स्थित प्रसिद्ध श्रीराम चंद्र भंज (SCB) मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में भीषण आग लगने की घटना के दो दिन बाद राज्य सरकार ने कड़ा रुख अपनाया है। सरकार ने इस मामले में प्रथम दृष्टया लापरवाही पाए जाने पर चार अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। निलंबित किए गए अधिकारियों में अग्निशमन सेवा (Fire Services) के तीन अधिकारी और विद्युत विभाग (Electrical Department) का एक वरिष्ठ अफसर शामिल है। प्रशासन का मानना है कि अस्पताल जैसे संवेदनशील स्थान पर सुरक्षा मानकों की अनदेखी अक्षम्य है। इस कार्रवाई के जरिए सरकार ने संदेश देने की कोशिश की है कि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए जवाबदेही तय की जाएगी।
अधिकारियों के निलंबन के बाद ओडिशा की राजनीति में भी उबाल आ गया है। विपक्षी दल बीजू जनता दल (BJD) ने सरकार की इस कार्रवाई पर तीखे सवाल उठाए हैं। बीजद प्रवक्ता लेनिन मोहंती ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान आरोप लगाया कि चार जूनियर अधिकारियों को सस्पेंड करना महज एक ‘दिखावा’ और जनता का ध्यान भटकाने की कोशिश है। उन्होंने कहा कि इतने बड़े हादसे के लिए उच्च स्तर पर बैठे अधिकारी और प्रशासनिक विफलता जिम्मेदार है, लेकिन सरकार छोटे कर्मचारियों को बलि का बकरा बना रही है। बीजद ने इस पूरे मामले की निष्पक्ष और उच्च स्तरीय जांच की मांग करते हुए सरकार पर संवेदनहीनता का आरोप लगाया है।
यह दर्दनाक हादसा 14 और 15 मार्च की दरमियानी रात करीब 3 बजे पेश आया था, जब अस्पताल के मरीज गहरी नींद में थे। शुरुआती जांच में आग लगने का मुख्य कारण विद्युत शॉर्ट सर्किट बताया गया है। इस भीषण अग्निकांड में मरने वाले मरीजों की कुल संख्या अब बढ़कर 12 हो गई है। बताया जा रहा है कि 7 मरीजों ने दम घुटने और झुलसने के कारण मौके पर ही दम तोड़ दिया था, जबकि 5 अन्य मरीजों की मौत इलाज के दौरान अस्पताल के दूसरे वार्डों में हुई। मृतकों के आंकड़े बढ़ने से अस्पताल प्रशासन और सरकार पर दबाव काफी बढ़ गया है।
घटना के बाद अस्पताल परिसर में पीड़ित परिजनों का गुस्सा फूट पड़ा। परिजनों और प्रत्यक्षदर्शियों का आरोप है कि आईसीयू (ICU) जैसे क्रिटिकल वार्ड में आग बुझाने के पर्याप्त और आधुनिक इंतजाम नहीं थे। एक मृतक के भाई ने रुंधे गले से बताया कि यदि वार्ड में स्मोक डिटेक्टर या ऑटोमैटिक वॉटर स्प्रिंकलर सिस्टम होता, तो शायद उनके अपनों की जान बचाई जा सकती थी। आग पहली मंजिल पर लगी थी, लेकिन वेंटिलेशन की कमी के कारण जहरीला और घना धुआं ऊपरी मंजिलों तक फैल गया, जिससे मरीजों को सांस लेने में भारी दिक्कत हुई और अफरा-तफरी मच गई।
इस पूरे मामले में सबसे चौंकाने वाला तथ्य अग्निशमन विभाग की प्रतिक्रिया को लेकर सामने आया है। अस्पताल के कर्मचारियों और प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि दमकल की गाड़ियों को घटनास्थल तक पहुंचने में लगभग 30 मिनट का समय लगा। विडंबना यह है कि एससीबी मेडिकल कॉलेज परिसर के भीतर ही एक फायर स्टेशन मौजूद है। महज कुछ मीटर की दूरी तय करने में आधा घंटा लगने की बात ने विभाग की कार्यशैली पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगा दिए हैं। हालांकि, फायर ब्रिगेड के पहुंचने से पहले डॉक्टरों और नर्सों ने अपनी जान जोखिम में डालकर मरीजों को वार्डों से बाहर निकाला, जिससे एक बड़ी जनहानि को कुछ हद तक टाला जा सका।
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