@thetarget365 : भारत सरकार के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के अधीन एजेंसी एफएसएसएआई ने डाबर के फ्रूट जूस के विज्ञापन को लेकर दिल्ली हाईकोर्ट में बड़ा दावा किया है। उनके अनुसार, डाबर के विज्ञापन में ‘100 प्रतिशत फलों का रस’ का दावा झूठा है। फलों के रस के अलावा, पेय में पानी और अन्य सामग्री भी मिलायी जाती है। डाबर को उत्पाद की पैकेजिंग पर इस दावे वाला लेबल लगाने की भी अनुमति नहीं है। केंद्रीय एजेंसी का कहना है कि ऐसे दावे उपभोक्ताओं को गुमराह कर सकते हैं।
संयोग से, जून 2024 में संगठन ने एक नोटिस जारी कर ‘खाद्य व्यवसाय संचालकों’ (FBO) को ऐसे लेबल हटाने के लिए कहा था। डाबर इस अधिसूचना का विरोध करता है। उनका दावा है कि ऐसा आदेश अवैध है। एफएसएसएआई ने उनके उत्पाद को मंजूरी दे दी है और ‘100 प्रतिशत फलों का रस’ का दावा सही है। अंततः केन्द्रीय एजेंसी ने आज अपना हलफनामा प्रस्तुत किया। यह कहा गया कि ऐसे दावे खरीदार को गुमराह कर सकते हैं।
इस बीच, डाबर ने पहले कहा था कि उनके फलों के जूस में फलों के रस के साथ पानी मिलाया जाता है। लेकिन यह प्राकृतिक पदार्थ की संरचना को ठीक करने के लिए है। इसलिए, 100 प्रतिशत फलों के रस का दावा वैध है। लेकिन एफएसएसएआई का दावा है कि यदि कोई पदार्थ पानी या किसी अन्य चीज के साथ मिलाया गया है, तो 100 प्रतिशत कहना लोगों को गुमराह करने वाला हो सकता है। उनके अनुसार, ये दावे न केवल भ्रामक हैं। बल्कि, यह उपभोक्ताओं के सूचित निर्णय लेने के अधिकार का भी उल्लंघन करता है। मामले की अगली सुनवाई 7 जुलाई को होगी।
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