Walking Health Tips : शारीरिक रूप से सक्रिय रहने के लिए पैदल चलना यानी वॉक करना सबसे आसान, सुरक्षित और बेहद असरदार एक्सरसाइज में से एक माना जाता है। नियमित रूप से टहलना न सिर्फ हमारे दिल (हार्ट) को स्वस्थ रखने में मदद करता है, बल्कि यह बढ़ते वजन को नियंत्रित करने, मानसिक तनाव कम कर मूड को बेहतर बनाने और पूरे शरीर को ऊर्जावान बनाए रखने में भी अहम भूमिका निभाता है। हालांकि, अक्सर लोगों के मन में यह उलझन भरी जिज्ञासा रहती है कि आखिर एक आदर्श स्वास्थ्य के लिए एक दिन में कितनी दूरी तय करना सही है?

क्या जरूरत से ज्यादा चलना शरीर को फायदा पहुंचाने के बजाय नुकसान भी पहुंचा सकता है? स्वास्थ्य संबंधी सटीक जानकारियां देने वाली प्रतिष्ठित वेबसाइट ‘गुडआरएक्स’ (goodrx) के चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार, हर व्यक्ति के लिए प्रतिदिन चलने की आदर्श दूरी पूरी तरह से अलग-अलग हो सकती है, क्योंकि यह पूरी तरह से संबंधित व्यक्ति की उम्र, वर्तमान फिटनेस स्तर, स्वास्थ्य की स्थिति और उसकी चलने की रफ्तार पर निर्भर करता है।

साप्ताहिक वॉक का गणित: जानिए रोजाना कितने किलोमीटर और कितने कदम चलना है बेहतर
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक, एक वयस्क को खुद को पूरी तरह फिट रखने के लिए सप्ताह में कम से कम 150 मिनट की मध्यम तीव्रता वाली शारीरिक गतिविधि या तेज वॉक जरूर करनी चाहिए। अगर इस समय को पूरे सप्ताह में विभाजित किया जाए, तो इसका मतलब है कि आप हफ्ते में छह दिन करीब 25-25 मिनट तक तेज गति (ब्रिस्क वॉक) से चल सकते हैं। सामान्य तौर पर 25 मिनट की इस तेज चाल में एक औसत व्यक्ति करीब 2 से 3 किलोमीटर की दूरी आराम से तय कर लेता है। हालांकि, आजकल डिजिटल घड़ियों के दौर में प्रतिदिन 10,000 कदम चलने का लक्ष्य काफी लोकप्रिय हो चुका है, लेकिन डॉक्टरों का कहना है कि यह कोई जादुई या अनिवार्य संख्या नहीं है।
हालिया वैज्ञानिक शोधों में पाया गया है कि जो लोग रोजाना लगभग 7,000 कदम चलते हैं, उनमें समय से पहले होने वाली मृत्यु का जोखिम काफी हद तक कम हो जाता है। मजेदार बात यह है कि 7,000 कदम चलने वालों और 10,000 से अधिक कदम चलने वालों के स्वास्थ्य लाभों में कोई बहुत बड़ा या चमत्कारी अंतर नहीं देखा गया है, और अब तो 4,000 कदम चलने को भी सेहत के लिए काफी मददगार माना जाने लगा है।
जब वरदान बन जाए अभिशाप: जरूरत से ज्यादा चलने के गंभीर शारीरिक नुकसान
अति हर चीज की खराब होती है, और यह नियम वॉकिंग पर भी पूरी तरह लागू होता है। ज्यादा चलना हर किसी के शरीर के लिए हमेशा फायदेमंद ही हो, ऐसा बिल्कुल जरूरी नहीं है। यदि वॉक करने के बाद शरीर को पर्याप्त आराम और रिकवरी का समय न मिले, तो लगातार जरूरत से ज्यादा चलने की वजह से ‘ओवरट्रेनिंग’ या ‘ओवरएक्सर्शन’ जैसी गंभीर स्थिति पैदा हो सकती है। ऐसी स्थिति में हमारा शरीर कुछ खास तरह के नकारात्मक संकेत देने लगता है, जिन्हें भूलकर भी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

उदाहरण के लिए, यदि वॉक खत्म करने के लंबे समय बाद तक आपकी मांसपेशियों में लगातार तेज दर्द बना रहे, पूरा शरीर भारी महसूस हो, हर वक्त अत्यधिक थकान हावी रहे या रोजमर्रा के कामों में आपकी परफॉर्मेंस पहले के मुकाबले घटने लगे, तो यह इस बात का साफ इशारा है कि आप अपनी शारीरिक क्षमता से ज्यादा चल रहे हैं। इसके अलावा, पैरों में बार-बार मोच आना, जोड़ों में चोट लगना, अचानक वॉक पर जाने की इच्छा खत्म हो जाना, स्वभाव में चिड़चिड़ापन बढ़ना, भूख में कमी आना और शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होने से बार-बार सर्दी-जुकाम होना भी इसी ओवरएक्सर्शन के प्रमुख लक्षण हैं।
किसी संख्या के पीछे भागने के बजाय अपने शरीर की क्षमता और आवाज को पहचानें
फिटनेस विशेषज्ञों का यह स्पष्ट रूप से मानना है कि किसी मोबाइल ऐप या घड़ी में दिख रही किसी तय संख्या के पीछे आंख मूंदकर भागने से कहीं ज्यादा जरूरी यह है कि आप अपने शरीर की वास्तविक क्षमता के अनुसार ही सक्रिय रहें। यदि आप वॉकिंग या किसी भी प्रकार के शारीरिक व्यायाम की अभी नई-नई शुरुआत कर रहे हैं, तो पहले दिन से ही लंबी दूरी तय करने की गलती न करें। शुरुआत हमेशा छोटे कदमों से करें और धीरे-धीरे हफ्ते दर हफ्ते अपनी दूरी और चलने के समय को बढ़ाएं। वहीं, जो लोग पहले से पूरी तरह फिट हैं और नियमित व्यायाम करते हैं, वे अपने शरीर की सहजता के अनुसार अपनी चलने की गति, दूरी या दिनभर में वॉक करने की फ्रीक्वेंसी को बढ़ा सकते हैं। सबसे जरूरी नियम यही है कि हमेशा अपने शरीर की सुनें और जबरदस्ती खुद को न थकाएं।
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