Journalist Arrest
Journalist Arrest: छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा जिले में पत्रकारिता जगत में उस वक्त भारी आक्रोश फैल गया, जब गीदम पुलिस ने स्थानीय पत्रकार रौनक शिवहरे और उनके वृद्ध माता-पिता के खिलाफ गंभीर धाराओं में मामला दर्ज कर उन्हें जेल भेज दिया। इस कार्रवाई को एकतरफा और दमनकारी बताते हुए सोमवार को जिले भर के पत्रकारों ने सड़क पर उतरकर अपना विरोध दर्ज कराया। दक्षिण बस्तर पत्रकार संघ के बैनर तले आयोजित इस विरोध प्रदर्शन में दंतेवाड़ा के दुर्गा मंडप में भारी संख्या में मीडियाकर्मी एकत्रित हुए। लोकतंत्र के चौथे स्तंभ पर हुए इस प्रहार के खिलाफ पत्रकारों ने ‘मौन धरना’ दिया और प्रशासन से स्पष्ट शब्दों में मांग की कि इस पूरे प्रकरण की उच्च स्तरीय न्यायिक जांच कराई जाए।
पत्रकारों द्वारा सौंपे गए आधिकारिक ज्ञापन के अनुसार, यह पूरा विवाद 6 मार्च 2026 को शुरू हुआ था। बताया जा रहा है कि गीदम थाना क्षेत्र के अंतर्गत एक अनियंत्रित ट्रैक्टर चालक ने पत्रकार रौनक शिवहरे के घर के बाहर खड़ी उनकी स्कूटी को जोरदार टक्कर मार दी। आरोप है कि जब इसका विरोध किया गया, तो ट्रैक्टर चालक ने और भी हिंसक रुख अपनाते हुए पत्रकार के पिता और उनकी महज दो साल की मासूम बच्ची को ट्रैक्टर से कुचलने का प्रयास किया। गनीमत रही कि दोनों समय रहते पीछे हट गए और एक बड़ी अनहोनी टल गई। इस घटना ने क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था और रसूखदारों की दबंगई पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
इस मामले का सबसे हैरान करने वाला पहलू तब सामने आया जब पीड़ित पक्ष न्याय की गुहार लगाने थाने पहुँचा। पत्रकारों का आरोप है कि पुलिस ने पत्रकार रौनक शिवहरे की शिकायत पर उचित कार्रवाई करने के बजाय, ट्रैक्टर चालक के प्रभाव में आकर उल्टा पत्रकार और उनके परिवार पर ही मुकदमा ठोक दिया। पुलिस ने पत्रकार, उनके पिता और माता के खिलाफ अनुसूचित जाति-जनजाति (SC/ST) अत्याचार निवारण अधिनियम सहित कई अन्य संगीन धाराएं लगा दीं। बिना किसी प्रारंभिक जांच के सीधे गिरफ्तारी और जेल भेजने की प्रक्रिया ने पुलिस की कार्यप्रणाली को संदेह के घेरे में ला खड़ा किया है।
मौन धरने के समापन के बाद पत्रकारों का हुजूम कलेक्ट्रेट कार्यालय पहुँचा। हालांकि कलेक्टर की अनुपस्थिति के कारण पत्रकारों ने अनुविभागीय अधिकारी (एसडीएम) को अपनी मांगों का ज्ञापन सौंपा। पत्रकारों ने दो टूक शब्दों में कहा कि एक सजग पत्रकार और उसके परिवार के साथ अपराधी जैसा व्यवहार करना अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का गला घोंटने जैसा है। ज्ञापन में मांग की गई है कि जब तक मामले की निष्पक्ष जांच पूरी नहीं हो जाती, तब तक पत्रकार के खिलाफ की गई दंडात्मक कार्रवाई को स्थगित रखा जाए और झूठे मुकदमे वापस लिए जाएं।
आंदोलनकारी पत्रकारों के एक प्रतिनिधिमंडल ने दंतेवाड़ा के पुलिस अधीक्षक (SP) गौरव रॉय से भी मुलाकात की। पत्रकारों ने एसपी के सामने वस्तुस्थिति रखते हुए पुलिस के भेदभावपूर्ण रवैये की शिकायत की। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए पुलिस अधीक्षक ने पत्रकारों को आश्वस्त किया कि विभाग इस प्रकरण की गंभीरता से पुन: जांच कर रहा है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि पुलिस किसी भी बाहरी दबाव या राजनीतिक रसूख के प्रभाव में आकर काम नहीं करेगी और साक्ष्यों के आधार पर न्यायोचित निर्णय लिया जाएगा। हालांकि, पत्रकार समुदाय ने स्पष्ट कर दिया है कि जब तक धरातल पर ठोस कार्रवाई नहीं दिखती, उनका संघर्ष जारी रहेगा।
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