Dantewada STF Jawan: छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित दंतेवाड़ा जिले से सुरक्षा बलों की संवेदनशीलता की एक ऐसी तस्वीर सामने आई है, जिसने पूरे प्रदेश का दिल जीत लिया है। जहाँ एक ओर बस्तर के जंगलों में नक्सलियों के खिलाफ कड़ा अभियान जारी है, वहीं दूसरी ओर एसटीएफ (STF) के जवानों ने एक गंभीर रूप से झुलसी ग्रामीण महिला की जान बचाकर ‘बस्तर फाइटर्स’ और ‘खाकी’ के प्रति ग्रामीणों के भरोसे को नई ऊंचाइयों पर पहुँचाया है। यह घटना दर्शाती है कि सुरक्षा बल केवल सीमाओं या आंतरिक सुरक्षा की रक्षा ही नहीं करते, बल्कि दुर्गम क्षेत्रों में बसने वाले आदिवासियों के लिए जीवनदाता की भूमिका भी निभाते हैं।
पुरंगेल गांव का वाक्या: 15 दिनों से तड़प रही थी महिला
मामला दंतेवाड़ा के अंदरूनी इलाके पुरंगेल गांव का है। जानकारी के अनुसार, एसटीएफ की टीम बीजापुर और दंतेवाड़ा के सीमावर्ती जंगलों में नक्सल सर्चिंग ऑपरेशन पर निकली थी। जब टीम इस नक्सलगढ़ माने जाने वाले गांव में पहुँची, तो उन्हें सूचना मिली कि एक महिला अपने घर में मौत से जूझ रही है। जांच करने पर पता चला कि करीब 10-15 दिन पहले आग तापते समय वह महिला दुर्घटनावश आग की चपेट में आ गई थी। कमर से ऊपर का उसका पूरा शरीर बुरी तरह झुलस चुका था और अस्पताल न पहुँच पाने के कारण घाव सड़ने लगे थे, जिससे उसकी हालत काफी नाजुक हो गई थी।
दुर्गम रास्तों पर रेस्क्यू: चारपाई बनी जीवन रक्षक पालकी
महिला की गंभीर स्थिति को देखते हुए एसटीएफ कंपनी कमांडर ओम प्रकाश सेन ने बिना समय गंवाए रेस्क्यू ऑपरेशन का फैसला लिया। चूंकि इलाका बेहद दुर्गम, पहाड़ी और घने जंगलों से घिरा है जहाँ एंबुलेंस का पहुँचना नामुमकिन था, जवानों ने अपनी सूझबूझ का परिचय दिया। उन्होंने गांव की एक चारपाई को कांवड़ की तरह तैयार किया और कंधे पर लादकर महिला को कई किलोमीटर तक पैदल ले गए। पहाड़ी नदी-नालों को पार करते हुए जवानों ने सुरक्षित रूप से हिरोली गांव तक पहुँचने में सफलता पाई, जहाँ से पहले से तैयार एंबुलेंस के जरिए महिला को किरंदुल अस्पताल भेजा गया।
तीन माह के मासूम की जिम्मेदारी और चिकित्सकीय देखभाल
डॉक्टरों के अनुसार, महिला का शरीर 40 से 50 प्रतिशत तक जल चुका था। यदि उसे समय पर अस्पताल नहीं लाया जाता, तो संक्रमण पूरे शरीर में फैल सकता था। मानवता का परिचय देते हुए जवानों ने केवल महिला को ही नहीं बचाया, बल्कि उसके तीन माह के मासूम बच्चे की देखभाल की भी उचित व्यवस्था कराई। किरंदुल में प्राथमिक उपचार के बाद उसे बेहतर इलाज के लिए जिला अस्पताल दंतेवाड़ा रेफर किया गया है। जवानों ने अस्पताल प्रशासन से संपर्क कर यह सुनिश्चित किया कि महिला का इलाज प्राथमिकता के आधार पर हो।
सुरक्षा बल और ग्रामीणों के बीच बढ़ता अटूट विश्वास
एसटीएफ के वरिष्ठ अधिकारियों ने अपने जवानों के इस कार्य की सराहना करते हुए इसे कर्तव्यपरायणता और मानवता का उत्कृष्ट उदाहरण बताया है। स्थानीय ग्रामीणों और प्रशासन ने भी जवानों की इस पहल की प्रशंसा की है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की घटनाएं सुरक्षा बलों और ग्रामीणों के बीच की दूरी को कम करने में सहायक होती हैं। नक्सलवाद के खात्मे के लिए केवल हथियारों की नहीं, बल्कि विश्वास की भी जरूरत होती है, और पुरंगेल की यह घटना उसी विश्वास की एक नई और सुंदर तस्वीर है।
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