Datia Bypoll Result: मध्य प्रदेश की दतिया विधानसभा सीट पर हुए उपचुनाव में कांग्रेस ने महत्वपूर्ण जीत दर्ज करते हुए भारतीय जनता पार्टी को कड़ी टक्कर दी। कांग्रेस प्रत्याशी घनश्याम सिंह ने भाजपा उम्मीदवार आशुतोष तिवारी को 6,053 वोटों के अंतर से हराकर सीट अपने नाम कर ली। मतगणना के शुरुआती दौर में भाजपा बढ़त बनाए हुए थी, लेकिन बाद के राउंड में कांग्रेस ने लगातार बढ़त हासिल की और अंततः निर्णायक जीत दर्ज की। हालांकि इस उपचुनाव के नतीजे से प्रदेश सरकार की स्थिरता पर कोई असर नहीं पड़ेगा, लेकिन इसे दोनों प्रमुख दलों के लिए राजनीतिक संदेश के रूप में देखा जा रहा है।

सरकार पर असर नहीं, लेकिन राजनीतिक मायने अहम
दतिया उपचुनाव का परिणाम विधानसभा में संख्या बल के लिहाज से सरकार के लिए चुनौती नहीं है, क्योंकि भाजपा पहले से ही स्पष्ट बहुमत के साथ सत्ता में है। इसके बावजूद यह नतीजा राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। भाजपा के लिए यह हार संगठन और स्थानीय रणनीति पर सवाल खड़े कर सकती है, जबकि कांग्रेस के लिए यह जीत आगामी चुनावों से पहले कार्यकर्ताओं का मनोबल बढ़ाने वाली साबित हो सकती है।

कांग्रेस में अंदरूनी विवाद भी रहा चर्चा में
चुनाव के दौरान कांग्रेस के भीतर गुटबाजी भी खुलकर सामने आई। पूर्व विधायक राजेंद्र भारती, जिनकी सदस्यता समाप्त हो चुकी है, ने पार्टी नेतृत्व और उम्मीदवार घनश्याम सिंह पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि घनश्याम सिंह भाजपा के साथ मिलकर राजनीति कर रहे हैं। इसके साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि वर्ष 2028 के विधानसभा चुनाव में वह अपनी राजनीतिक ताकत का प्रदर्शन करेंगे। इन बयानों ने चुनावी माहौल को और अधिक चर्चा का विषय बना दिया था।
2023 के चुनाव और उपचुनाव की पृष्ठभूमि
मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव 2023 में भाजपा ने प्रचंड बहुमत हासिल कर सरकार बनाई थी। लंबे समय तक मुख्यमंत्री रहे शिवराज सिंह चौहान की जगह पार्टी ने मोहन यादव को मुख्यमंत्री बनाया। अब 2028 के विधानसभा चुनाव को मुख्यमंत्री मोहन यादव के नेतृत्व की बड़ी परीक्षा माना जा रहा है। दूसरी ओर, कांग्रेस भी लगातार अपनी खोई हुई राजनीतिक जमीन वापस पाने की कोशिश में जुटी हुई है और दतिया की जीत उसके लिए सकारात्मक संकेत मानी जा रही है।
आखिर क्यों कराना पड़ा दतिया में उपचुनाव?
दतिया सीट पर उपचुनाव कराने की नौबत इसलिए आई क्योंकि वर्ष 2023 में कांग्रेस के टिकट पर जीत दर्ज करने वाले राजेंद्र भारती की विधानसभा सदस्यता समाप्त हो गई थी। उन्हें एक पुराने मामले में अदालत से सजा मिलने के बाद विधायक पद के लिए अयोग्य घोषित कर दिया गया। इसी कारण यह सीट खाली हुई और निर्वाचन आयोग ने उपचुनाव कराया। कानूनी अयोग्यता के चलते राजेंद्र भारती इस चुनाव में उम्मीदवार नहीं बन सके।

दोनों दलों ने नए चेहरों पर लगाया दांव
उपचुनाव में भाजपा ने पूर्व गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा को टिकट नहीं दिया और युवा नेता आशुतोष तिवारी को मैदान में उतारा। वहीं कांग्रेस ने अनुभवी नेता और पूर्व विधायक घनश्याम सिंह पर भरोसा जताया। चुनाव प्रचार के दौरान दोनों दलों ने पूरी ताकत झोंकी, लेकिन अंतिम परिणाम कांग्रेस के पक्ष में गया। घनश्याम सिंह ने लगातार बढ़त बनाए रखते हुए भाजपा उम्मीदवार को 6,053 मतों से पराजित कर सीट पर कांग्रेस का कब्जा बरकरार रखा। यह जीत कांग्रेस के लिए संगठनात्मक मजबूती का संकेत मानी जा रही है, जबकि भाजपा के लिए आने वाले चुनावों से पहले आत्ममंथन का अवसर लेकर आई है।











