Davos 2026
Davos 2026: स्विट्जरलैंड के दावोस में आयोजित ‘विश्व आर्थिक मंच’ (WEF) की बैठक इस बार वैश्विक कूटनीति और विवादों का अखाड़ा बन गई है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के सम्मेलन में पहुँचने से पहले ही ग्रीनलैंड पर अमेरिकी दावे को लेकर यूरोपीय संघ और नाटो देशों ने मोर्चा खोल दिया है। विश्व नेताओं ने ग्रीनलैंड पर नियंत्रण हासिल करने की अमेरिका की महत्वाकांक्षा को ‘अवैध’ करार देते हुए ट्रंप प्रशासन की कड़ी आलोचना की है। दावोस में माहौल इतना तनावपूर्ण है कि ट्रंप को उनके आने से पहले ही अंतरराष्ट्रीय कठघरे में खड़ा कर दिया गया है।
राष्ट्रपति ट्रंप ने दावोस यात्रा से पूर्व एक विवादित घोषणा की है। उन्होंने उन देशों पर भारी टैरिफ (आयात शुल्क) लगाने का ऐलान किया है जो ग्रीनलैंड मामले पर अमेरिका का समर्थन नहीं कर रहे हैं। ट्रंप के अनुसार, अगले महीने से यह टैरिफ 10% से शुरू होकर जून तक 25% तक पहुँच जाएगा। इस घोषणा ने यूरोपीय सहयोगियों को नाराज कर दिया है। यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि अमेरिका टैरिफ बढ़ाता है, तो यूरोपीय संघ की प्रतिक्रिया “अटल और एकजुट” होगी। यह स्थिति पिछले साल सील किए गए अमेरिका-यूरोपीय संघ व्यापार समझौते को भी खतरे में डाल सकती है।
ट्रंप ने अपनी इस आक्रामकता का एक दिलचस्प कारण बताया है। यूरोपीय अधिकारियों को भेजे एक संदेश में उन्होंने ग्रीनलैंड पर अपने रुख को पिछले साल ‘नोबेल शांति पुरस्कार’ न मिलने से जोड़ा। उन्होंने नॉर्वे के प्रधानमंत्री से यहाँ तक कह दिया कि अब वे शांति के बारे में सोचने के लिए बाध्य नहीं हैं। हालांकि, उनकी दावोस यात्रा की शुरुआत भी बाधाओं भरी रही। ‘एयर फोर्स वन’ में तकनीकी खराबी आने के कारण विमान को आधे रास्ते से वापस मोड़ना पड़ा, जिससे उनकी स्विट्जरलैंड पहुँच में देरी हुई।
दावोस में ट्रंप का नाम लिए बिना कई नेताओं ने उन पर निशाना साधा। कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने कहा कि आज दुनिया में “नियम आधारित व्यवस्था” दम तोड़ रही है और शक्तिशाली देश मध्यम दर्जे के देशों की संप्रभुता पर आक्रमण कर रहे हैं। वहीं, फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने भी ग्रीनलैंड के प्रति अमेरिकी रवैये को गलत ठहराते हुए यूरोपीय देशों की एकजुटता दोहराई। विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रंप की टैरिफ नीतियों से अमेरिकी अर्थव्यवस्था में निवेशकों का भरोसा कम हो सकता है और ब्याज दरें बढ़ सकती हैं।
इन वैश्विक विवादों के बीच, भारत ने दावोस में अब तक का सबसे बड़ा प्रतिनिधिमंडल भेजा है। केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने ‘5वीं औद्योगिक क्रांति’ और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) पर भारत का पक्ष रखा। उन्होंने जोर दिया कि भारत केवल बड़े मॉडल बनाने में नहीं, बल्कि समावेशी और किफायती तकनीक विकसित करने में विश्वास रखता है। वैष्णव ने कहा कि भारत आज “विश्व का विश्वसनीय भागीदार” बनकर उभरा है और वैश्विक स्तर पर भारत की ‘डेमोक्रेटाइज्ड AI’ अप्रोच की काफी सराहना हो रही है।
ग्रीनलैंड और व्यापार युद्ध के अलावा दावोस में रूस-यूक्रेन युद्ध, ईरान-अमेरिका तनाव और आतंकवाद जैसे गंभीर विषयों पर भी चर्चा हो रही है। हालांकि, केंद्र में राष्ट्रपति ट्रंप और उनके अप्रत्याशित फैसले ही बने हुए हैं। दावोस में ट्रंप के दो दिन कैसे बीतेंगे और वैश्विक संबंधों पर इसका क्या असर होगा, यह फिलहाल अनिश्चित बना हुआ है।
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