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Delhi Blast Case: जैश-ए-मोहम्मद ने क्यों भेजा था दिल्ली में इतना बड़ा कैश? क्या था मास्टरप्लान?

Delhi Blast Case: खुफिया एजेंसी के सूत्रों के मुताबिक, हाल ही में आतंकवाद से जुड़े मॉड्यूल की जांच में बड़ी सफलता मिली है। जांच में सामने आया है कि करीब 3 लाख रुपये उर्वरक (Fertilizer) खरीदने के लिए खर्च किए गए थे। सूत्रों के अनुसार, इस रकम को लेकर आतंकी डॉक्टर उमर और डॉक्टर शाहीन के बीच विवाद भी हुआ था। इस विवाद और लेन-देन की जानकारी मुजम्मिल नामक आरोपी से प्राप्त हुई, जिसने जांच एजेंसियों को महत्वपूर्ण सुराग दिए।

Delhi Blast Case: मेवात के एजेंट के जरिए हुआ संपर्क

सूत्रों ने बताया कि यह आतंकवादी नेटवर्क मेवात के एक एजेंट के जरिए दिल्ली के हवाला नेटवर्क से जुड़े थे। इस एजेंट का काम था कि वह हवाला से आने वाले पैसों को आतंकवादियों तक पहुंचाए। सबसे पहले एजेंट का संपर्क आतंकी डॉक्टर शाहीन से हुआ, इसके बाद वह डॉक्टर मुज्जमिल और कुछ दिन पहले डॉक्टर उमर से भी जुड़ा। इस तरह यह नेटवर्क हवाला के माध्यम से आतंकवादियों को धन मुहैया कराता था।

Delhi Blast Case: फंडिंग का इस्तेमाल कैसे होता था

जांच अधिकारियों ने बताया कि आतंकवादी मॉड्यूल के आरोपी इन पैसों का उपयोग लॉजिस्टिक और अन्य खर्चों में करते थे। उदाहरण के तौर पर, दिल्ली में हुए धमाके से पहले अमोनियम नाइट्रेट खरीदने के लिए, बम बनाने वाले कार और धमाके से जुड़ा अन्य सामान खरीदने के लिए इसी फंड का इस्तेमाल किया गया। ये पैसें हर तरह के आपराधिक और आतंकी गतिविधियों के लिए नियोजित किए जाते थे।

आतंकी मॉड्यूल की कार्यप्रणाली

सूत्रों के अनुसार, यह मॉड्यूल काफी संगठित था। एजेंट हवाला नेटवर्क के जरिए पैसों की उपलब्धता सुनिश्चित करता और आरोपी इसे विभिन्न आवश्यकताओं के लिए खर्च करते। पैसों की ट्रैकिंग से पता चला कि यह नेटवर्क न केवल धमाके बल्कि टेरर फंडिंग और लॉजिस्टिक सपोर्ट के लिए भी सक्रिय था। जांच एजेंसियों के लिए मुजम्मिल की पहचान और उसके द्वारा दिए गए सुराग इस पूरे नेटवर्क का नक्शा तैयार करने में अहम रहे।

धमाके की तैयारी में धन का महत्व

एक अधिकारी ने बताया कि आतंकवादियों के लिए पैसे का होना बेहद जरूरी है। अमोनियम नाइट्रेट, धमाके में इस्तेमाल होने वाली कार और अन्य उपकरण खरीदने के लिए भारी रकम की आवश्यकता होती है। इसी फंड से वह अपने ऑपरेशन की योजना को अंजाम देते हैं। जांच एजेंसियों ने कहा कि फंडिंग की यह जानकारी आतंकी मॉड्यूल को ट्रैक करने और भविष्य की योजनाओं को रोकने में महत्वपूर्ण साबित होगी।

जांच एजेंसियों की सतर्कता

जांच एजेंसियां इस मामले में सतर्क हैं और आरोपियों की गतिविधियों पर कड़ी नजर रख रही हैं। मुजम्मिल से प्राप्त सुराग से यह स्पष्ट हुआ कि आतंकवादी नेटवर्क कैसे पैसों के माध्यम से अपने ऑपरेशन को चलाते हैं। जांच अधिकारी बता रहे हैं कि हवाला नेटवर्क और स्थानीय एजेंटों के संपर्क को ट्रैक करना आतंकवाद रोकने के लिए जरूरी है।सूत्रों के अनुसार, यह मामला आतंकवाद की फंडिंग पर अंकुश लगाने में एक महत्वपूर्ण सुराग है। जांच एजेंसियां इस नेटवर्क को बेअसर करने के लिए लगातार कार्रवाई कर रही हैं। हवाला और एजेंट के जरिए पैसों की रफ्तार को रोकना इस तरह के मॉड्यूल को कमजोर करने के लिए जरूरी है। इस केस में मिली जानकारी आगे की जांच और सुरक्षा तैयारियों के लिए उपयोगी साबित होगी।

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