Delhi Building Collapse : राजधानी दिल्ली के वेलकम क्षेत्र में शनिवार सुबह बड़ा हादसा हो गया, जब सीलमपुर के ईदगाह रोड स्थित जनता कॉलोनी की गली नंबर 5 में एक चार मंजिला इमारत भरभरा कर गिर गई। पुलिस और दमकल विभाग के अनुसार, इस इमारत में रहने वाले 10 लोगों के परिवार में से अब तक 7 लोगों को मलबे से निकालकर अस्पताल पहुंचाया गया है, जबकि तीन से चार लोगों के अब भी फंसे होने की आशंका जताई जा रही है।
हादसे के समय क्षेत्र के निवासी सुबह की सैर पर निकले हुए थे। उन्होंने सबसे पहले बचाव कार्य शुरू किया, और फायर ब्रिगेड के पहुंचने से पहले ही मलबे में फंसे लोगों को निकालने की कोशिश में जुट गए। बाद में दमकल की सात गाड़ियां मौके पर पहुंचीं, जिनकी मदद से तीन लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला गया। हादसे के बाद से रेस्क्यू ऑपरेशन लगातार जारी है।
नॉर्थ-ईस्ट दिल्ली के एडिशनल DCP संदीप लांबा ने मीडिया को बताया कि पुलिस, दमकल विभाग, NDRF, सिविल डिफेंस और स्थानीय लोग मिलकर राहत कार्य में लगे हुए हैं। उन्होंने कहा कि “स्थानीय लोगों ने बेहद सक्रियता और साहस दिखाया है और बचाव अभियान में महत्वपूर्ण सहयोग दिया है।”
इस हादसे से पहले 18 अप्रैल को दिल्ली के मुस्तफाबाद इलाके में एक और चार मंजिला इमारत देर रात करीब ढाई बजे ढह गई थी। उस घटना में 11 लोगों की जान चली गई थी और 12 घंटे तक चला रेस्क्यू ऑपरेशन चर्चा में रहा था। पुलिस रिपोर्ट के मुताबिक, उस इमारत में 22 लोग रहते थे, जिनमें मालिक तहसीन और उनके परिवार के 7 सदस्य, जिनमें 3 महिलाएं और 4 बच्चे शामिल थे, मारे गए थे।
हादसे के संभावित कारणों में तेज बारिश और आंधी-तूफान को मुख्य रूप से जिम्मेदार ठहराया गया था।स्थानीय निवासी रेयान ने बताया कि हादसे के वक्त उन्हें लगा जैसे भूकंप आया हो, क्योंकि नीचे की मंजिलें हिलने लगी थीं। जब बाहर जाकर देखा, तो पास की पूरी इमारत मलबे में तब्दील हो चुकी थी।
एक अन्य निवासी सलीम अली ने बताया कि इलाके में सीवर का गंदा पानी वर्षों से इमारतों की दीवारों में रिसता रहा, जिससे दीवारें कमजोर हो गईं और उनमें गंभीर दरारें आ गईं। उनके अनुसार, इलाके की 4-5 अन्य इमारतें भी बेहद जर्जर स्थिति में हैं और भविष्य में कभी भी ढह सकती हैं।
NDRF के DIG मोहसिन शाहिदी ने मुस्तफाबाद हादसे को “पैनकेक कोलैप्स” बताया, जिसमें एक के ऊपर एक फ्लोर गिरते हैं और बचने की संभावना बेहद कम हो जाती है। उन्होंने कहा कि “इलाका अत्यधिक भीड़भाड़ वाला है, जिससे मलबा हटाने में दिक्कत हुई। इसके चलते भारी मशीनरी का इस्तेमाल भी संभव नहीं था।”
इन दो बड़े हादसों ने दिल्ली की पुरानी और जर्जर इमारतों की हालत को लेकर चिंता बढ़ा दी है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि स्थानीय निकाय समय रहते कार्रवाई करें और संवेदनशील इमारतों का मूल्यांकन कर उन्हें खाली करवाएं, तो ऐसे हादसों को रोका जा सकता है।
बिल्डिंग इंस्पेक्शन एक्सपर्ट्स के अनुसार, दिल्ली जैसे घनी आबादी वाले शहरों में पुरानी इमारतों की समय-समय पर निगरानी और मरम्मत अत्यंत जरूरी है।
मानसून और तेज बारिश के समय, ऐसे हादसों की संभावना और भी अधिक बढ़ जाती है। वेलकम इलाके में हुई यह घटना एक बार फिर से दिल्ली में असुरक्षित इमारतों के खतरे की ओर इशारा करती है। सरकार और नगर निकायों को चाहिए कि ऐसी जर्जर इमारतों की समय पर जांच और आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करें, ताकि कीमती जानों को बचाया जा सके। फिलहाल राहत कार्य जारी है और पूरे इलाके में सुरक्षा को लेकर सतर्कता बढ़ा दी गई है।
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