Delhi Earthquake: राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में रविवार तड़के लोगों ने भूकंप के हल्के झटके महसूस किए। सुबह के समय आए इन झटकों से कई लोग कुछ पल के लिए घबरा गए और घरों से बाहर निकल आए। हालांकि, भूकंप की तीव्रता कम होने के कारण किसी तरह की बड़ी घबराहट या अफरा-तफरी की स्थिति नहीं बनी। राहत की बात यह रही कि अब तक किसी भी प्रकार के जान-माल के नुकसान की सूचना सामने नहीं आई है। प्रशासन और संबंधित एजेंसियां स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए हैं।

एनसीएस ने भूकंप की तीव्रता और केंद्र की जानकारी दी
राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र (National Centre for Seismology – NCS) के अनुसार, भूकंप रविवार 2 अगस्त 2026 को सुबह 4 बजकर 14 मिनट 1 सेकंड पर दर्ज किया गया। रिक्टर पैमाने पर इसकी तीव्रता 2.9 मापी गई। भूकंप का केंद्र उत्तरी दिल्ली (नॉर्थ दिल्ली) में स्थित था, जबकि इसकी गहराई पृथ्वी की सतह से लगभग 8 किलोमीटर दर्ज की गई। एनसीएस ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट साझा कर इस भूकंप की आधिकारिक पुष्टि की और इसकी तकनीकी जानकारी भी सार्वजनिक की।

असम और अरुणाचल प्रदेश में भी दर्ज किए गए झटके
दिल्ली के अलावा रविवार सुबह पूर्वोत्तर भारत के दो राज्यों असम और अरुणाचल प्रदेश में भी भूकंप के हल्के झटके महसूस किए गए। एनसीएस के अनुसार, सुबह 5 बजकर 25 मिनट पर असम के बारपेटा जिले में 2.4 तीव्रता का भूकंप दर्ज किया गया। इस भूकंप की गहराई 4 किलोमीटर थी। इसके कुछ ही मिनट बाद सुबह 5 बजकर 38 मिनट पर अरुणाचल प्रदेश के तवांग जिले में 2.8 तीव्रता का भूकंप आया, जिसकी गहराई 5 किलोमीटर रिकॉर्ड की गई। दोनों राज्यों से भी किसी प्रकार के जान-माल के नुकसान की सूचना नहीं मिली है।
शैलो भूकंप क्यों महसूस होते हैं अधिक तेज
भूकंप विशेषज्ञों के अनुसार, किसी भूकंप की तीव्रता के साथ उसकी गहराई भी काफी महत्वपूर्ण होती है। अमेरिकी भूगर्भीय सर्वेक्षण (USGS) के मुताबिक, पृथ्वी की सतह से 0 से 700 किलोमीटर की गहराई तक आने वाले भूकंपों को मुख्य रूप से तीन श्रेणियों—शैलो (Shallow), इंटरमीडिएट (Intermediate) और डीप (Deep)—में बांटा जाता है। कम गहराई वाले यानी शैलो भूकंपों की भूकंपीय तरंगें जमीन की सतह तक बहुत तेजी से पहुंचती हैं। यही कारण है कि कम तीव्रता होने के बावजूद इनके झटके लोगों को अपेक्षाकृत अधिक स्पष्ट महसूस हो सकते हैं। यदि ऐसे भूकंप की तीव्रता अधिक हो तो नुकसान की संभावना भी बढ़ जाती है।
दिल्ली क्यों है भूकंप के लिहाज से संवेदनशील
विशेषज्ञों के अनुसार, दिल्ली भूकंपीय दृष्टि से संवेदनशील क्षेत्रों में शामिल है। राजधानी सीस्मिक जोन-4 में स्थित है, जिसे उच्च जोखिम वाले क्षेत्रों में गिना जाता है। इस वजह से यहां समय-समय पर हल्के और मध्यम तीव्रता के भूकंप आते रहते हैं। हालांकि अधिकांश भूकंप कम तीव्रता के होते हैं और नुकसान नहीं पहुंचाते, लेकिन विशेषज्ञ हमेशा भूकंप के दौरान सुरक्षा उपायों का पालन करने की सलाह देते हैं। मजबूत भवन निर्माण, आपदा प्रबंधन की तैयारी और जागरूकता ऐसे जोखिमों को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

फिलहाल नुकसान की कोई सूचना नहीं, प्रशासन सतर्क
दिल्ली, असम और अरुणाचल प्रदेश में आए इन भूकंपों के बाद संबंधित प्रशासन और आपदा प्रबंधन एजेंसियां पूरी तरह सतर्क हैं। अब तक किसी भी राज्य से किसी प्रकार की जनहानि, संपत्ति के नुकसान या अन्य बड़ी घटना की सूचना नहीं मिली है। अधिकारियों ने लोगों से अफवाहों पर ध्यान न देने और केवल आधिकारिक सूचनाओं पर भरोसा करने की अपील की है। विशेषज्ञों का कहना है कि भूकंप जैसी प्राकृतिक घटनाओं की सटीक भविष्यवाणी संभव नहीं है, इसलिए लोगों को हमेशा सतर्क रहना चाहिए और आपातकालीन स्थिति में सुरक्षा संबंधी दिशा-निर्देशों का पालन करना चाहिए।
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