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Delhi Earthquake Update: दिल्ली में भूकंप के झटकों से कांपी धरती, उत्तर भारत में बढ़ी चिंता

Delhi Earthquake Update: भारत समेत दुनिया के विभिन्न हिस्सों में पिछले कुछ समय से भूगर्भीय हलचलें काफी बढ़ गई हैं। म्यांमार और अफगानिस्तान जैसे पड़ोसी देशों में आए विनाशकारी भूकंपों की यादें अभी ताजा ही थीं कि अब देश की राजधानी दिल्ली में भी धरती डोलने की घटना सामने आई है। सोमवार सुबह जब लोग अपने दैनिक कार्यों में जुटे थे, तभी अचानक आए कंपन ने लोगों को डरा दिया। हालांकि, राहत की बात यह रही कि यह भूकंप अधिक शक्तिशाली नहीं था, लेकिन बार-बार दिल्ली-एनसीआर में आने वाले ये झटके भविष्य के किसी बड़े खतरे की ओर इशारा कर रहे हैं।

तीव्रता और केंद्र का विवरण: उत्तरी दिल्ली के नीचे 5 किमी पर था केंद्र

नेशनल सेंटर फॉर सीस्मोलॉजी (NCS) द्वारा जारी आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, दिल्ली में भूकंप के ये झटके सोमवार सुबह 8 बजकर 44 मिनट पर महसूस किए गए। रिक्टर पैमाने पर इस भूकंप की तीव्रता 2.8 मापी गई। वैज्ञानिकों के मुताबिक, इस भूकंप का केंद्र (Epicenter) उत्तरी दिल्ली में जमीन से मात्र 5 किलोमीटर की गहराई में स्थित था। कम गहराई पर केंद्र होने के कारण झटके स्पष्ट रूप से महसूस किए गए, लेकिन तीव्रता कम होने की वजह से जान-माल के किसी बड़े नुकसान की सूचना अब तक प्राप्त नहीं हुई है। प्रशासन स्थिति पर नजर बनाए हुए है।

गुजरात के कच्छ में भी हलचल: 4.1 की तीव्रता ने याद दिलाया पुराना खौफ

दिल्ली से पहले, बीते शुक्रवार और शनिवार की दरमियानी रात को गुजरात के कच्छ जिले में भी धरती कांपी थी। वहां आए भूकंप की तीव्रता दिल्ली के मुकाबले काफी अधिक थी, जिसे रिक्टर स्केल पर 4.1 दर्ज किया गया। रात के 1 बजकर 22 मिनट पर आए इस भूकंप का केंद्र खावड़ा से 55 किलोमीटर दूर उत्तर-उत्तरपूर्व में था। बता दें कि कच्छ जिला भूकंपीय जोन-5 में आता है, जो सबसे संवेदनशील माना जाता है। यहाँ के लोग 2001 के उस भयावह भुज भूकंप को नहीं भूले हैं, जिसने हजारों लोगों की जान ले ली थी, इसलिए हल्की हलचल भी यहाँ भारी दहशत पैदा कर देती है।

विज्ञान की नजर में भूकंप: क्यों और कैसे डोलती है हमारी धरती?

भूकंप आने के पीछे का वैज्ञानिक कारण हमारी पृथ्वी की आंतरिक संरचना में छिपा है। दरअसल, पृथ्वी के भीतर 7 मुख्य टेक्टोनिक प्लेटें होती हैं जो लगातार बेहद धीमी गति से तैरती रहती हैं। जब ये प्लेटें अपनी सीमाओं (फॉल्ट लाइन्स) पर एक-दूसरे से टकराती हैं या आपस में रगड़ खाती हैं, तो भारी मात्रा में घर्षण और दबाव पैदा होता है। यही दबाव जब ऊर्जा के रूप में बाहर निकलने का रास्ता खोजता है, तो शॉकवेव्स पैदा होती हैं, जिससे हमें सतह पर कंपन महसूस होता है। दिल्ली और हिमालयी क्षेत्र ऐसी ही फॉल्ट लाइन्स के करीब होने के कारण भूकंप के प्रति अत्यधिक संवेदनशील हैं।

बचाव और जागरूकता: भूकंप की स्थिति में क्या करना है जरूरी?

विशेषज्ञों का कहना है कि भूकंप को रोका नहीं जा सकता, लेकिन जागरूकता से नुकसान कम किया जा सकता है। दिल्ली जैसे घनी आबादी वाले क्षेत्र में पुरानी और कमजोर इमारतों का ऑडिट होना अनिवार्य है। यदि आप भूकंप के झटके महसूस करें, तो तुरंत घर से बाहर खुले मैदान में निकल जाएं। यदि बाहर निकलना संभव न हो, तो किसी मजबूत टेबल या फर्नीचर के नीचे छिपकर ‘ड्रॉप, कवर और होल्ड’ के नियम का पालन करें। बार-बार आने वाले ये छोटे झटके हमें आगाह करते हैं कि हमें आपदा प्रबंधन के लिए सदैव तैयार रहना चाहिए।

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