Dhamtari Conversion
Dhamtari Conversion: छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले में एक महिला की मृत्यु के बाद उसके अंतिम संस्कार को लेकर उपजा विवाद अब बेहद तनावपूर्ण मोड़ पर पहुंच गया है। नगरी थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले ग्राम बोराई की एक महिला की 24 दिसंबर को मौत हो गई थी। परिजनों द्वारा महिला के शव को दफनाने की कोशिश की गई, लेकिन ग्रामीणों ने इसे धर्मांतरण का मामला बताते हुए विरोध शुरू कर दिया। ग्रामीणों का स्पष्ट रूप से आरोप है कि उक्त महिला और उसके परिवार ने अपना मूल धर्म त्याग कर दूसरे धर्म को अपना लिया था, इसलिए उन्हें गांव की परंपराओं के विरुद्ध शव दफनाने की अनुमति नहीं दी जा सकती।
जब बोराई गांव के साहू परिवार को ग्रामीणों के भारी विरोध का सामना करना पड़ा, तो वे शव लेकर नगरी कस्बे की ओर रवाना हो गए। परिजनों ने वहां शव को दफनाने के लिए गड्ढा भी खोद लिया था और अंतिम विदाई की तैयारी कर रहे थे। हालांकि, जैसे ही नगरी के स्थानीय निवासियों को इस बात की भनक लगी कि धर्मांतरण के आरोपी परिवार का शव उनके क्षेत्र में दफनाया जा रहा है, वहां भी हंगामा शुरू हो गया। नगरी के लोगों का तर्क है कि उनके कस्बे में बाहरी लोगों या धर्मांतरित व्यक्तियों के शव दफनाने के लिए कोई जमीन आवंटित नहीं है, जिसके चलते वहां की स्थिति भी अनियंत्रित हो गई।
मामले की गंभीरता और सांप्रदायिक संवेदनशीलता को देखते हुए प्रशासन ने तुरंत मोर्चा संभाला। अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (ASP) सहित जिले के कई वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी और भारी पुलिस बल मौके पर तैनात किया गया है। अधिकारियों द्वारा ग्रामीणों और पीड़ित परिवार के बीच मध्यस्थता करने और सुलह कराने की निरंतर कोशिशें की जा रही हैं। प्रशासन का मुख्य उद्देश्य कानून-व्यवस्था को बनाए रखना और यह सुनिश्चित करना है कि मृतक महिला का अंतिम संस्कार गरिमापूर्ण तरीके से संपन्न हो सके, लेकिन दोनों ही स्थानों पर ग्रामीण अपनी मांगों पर अड़े हुए हैं।
इस पूरे घटनाक्रम में हिंदूवादी संगठनों ने भी अपनी सक्रियता बढ़ा दी है। बजरंग दल के नेता संत कोठारी ने इस मामले पर कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि बोराई गांव का संबंधित साहू परिवार पूरी तरह से धर्मांतरित हो चुका है। उन्होंने आरोप लगाया कि धर्म परिवर्तन करने के बाद वे अब समाज और गांव की परंपराओं का हिस्सा नहीं रह गए हैं। कोठारी के अनुसार, नगरी और बोराई के ग्रामीणों ने सामूहिक रूप से यह निर्णय लिया है कि वे किसी भी स्थिति में अपनी जमीन पर धर्मांतरित व्यक्ति के शव को दफनाने की अनुमति नहीं देंगे। इस बयान के बाद इलाके में वैचारिक और सामाजिक ध्रुवीकरण और गहरा गया है।
धमतरी जिले में हुई यह घटना छत्तीसगढ़ के ग्रामीण अंचलों में धर्मांतरण के मुद्दे पर बढ़ते असंतोष को रेखांकित करती है। वर्तमान में स्थिति यह है कि शव को लेकर परिजन इधर-उधर भटकने को मजबूर हैं, जबकि ग्रामीण इसे अपनी आस्था और परंपराओं की रक्षा का सवाल बना चुके हैं। पुलिस प्रशासन के लिए चुनौती केवल शव का अंतिम संस्कार कराना नहीं है, बल्कि इस घटना के बाद पैदा होने वाले संभावित सामाजिक तनाव को रोकना भी है। फिलहाल नगरी क्षेत्र में सन्नाटा और तनाव पसरा हुआ है, और प्रशासन एक सर्वमान्य समाधान निकालने के लिए दोनों पक्षों के साथ मैराथन बैठकें कर रहा है।
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