Dhamtari School Incident: छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले से एक ऐसी खबर सामने आई है जिसने न केवल शिक्षा विभाग बल्कि समाज के हर वर्ग को झकझोर कर रख दिया है। कुरुद ब्लॉक के दहदहा मिडिल स्कूल में एक-दो नहीं, बल्कि 35 स्कूली बच्चों ने अपने हाथों पर ब्लेड या किसी अन्य नुकीली चीज से काटकर खुद को जख्मी कर लिया। यह घटना केवल एक शारीरिक चोट नहीं है, बल्कि यह बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य और उनकी सुरक्षा पर एक बड़ा सवालिया निशान खड़ा करती है। जैसे ही यह जानकारी सार्वजनिक हुई, पूरे इलाके में हड़कंप मच गया और प्रशासन तुरंत सक्रिय हो गया।

ऐसे हुआ इस डरावनी घटना का खुलासा
इस पूरे मामले का खुलासा तब हुआ जब एक बच्चे के अभिभावक ने उसके हाथ पर कटने के गहरे निशान देखे। शुरू में लगा कि यह कोई सामान्य चोट हो सकती है, लेकिन जब बच्चे ने कारण बताने में आनाकानी की, तो पिता का माथा ठनका। वे तुरंत बच्चे को लेकर स्कूल पहुँचे और स्कूल प्रबंधन को इसकी जानकारी दी। जब शिक्षकों ने संदेह के आधार पर क्लास के अन्य बच्चों की जाँच की, तो एक के बाद एक कई बच्चों के हाथों पर वैसे ही निशान मिले। देखते ही देखते यह संख्या 35 तक पहुँच गई, जिसे देख स्कूल प्रबंधन के भी हाथ-पाँव फूल गए।
खौफ के साये में माता-पिता: बच्चे क्यों नहीं खोल रहे जुबान?
इस सामूहिक आत्मघाती व्यवहार ने पालकों को गहरे सदमे में डाल दिया है। स्कूल में आनन-फानन में अभिभावकों की बैठक बुलाई गई। डरे-सहमे माता-पिता यह समझने की कोशिश कर रहे हैं कि आखिर उनके मासूम बच्चों ने खुद को इतना दर्द क्यों दिया। सबसे चिंताजनक बात यह है कि पूछताछ के बावजूद बच्चे कोई स्पष्ट कारण नहीं बता रहे हैं। यह स्थिति एक गहरे मनोवैज्ञानिक दबाव या किसी बाहरी प्रभाव (जैसे कोई खतरनाक सोशल मीडिया चैलेंज या ग्रुप प्रेशर) की ओर इशारा कर रही है, जिसकी तह तक जाना अब अनिवार्य हो गया है।
विशेषज्ञों की टीम सक्रिय: शुरू हुआ काउंसलिंग का दौर
मामले की गंभीरता को देखते हुए 16 फरवरी को मेडिकल टीम, शिक्षा विभाग के आला अधिकारी और मनोवैज्ञानिकों का एक दल दहदहा स्कूल पहुँचा। बच्चों के साथ-साथ उनके माता-पिता की भी विशेष काउंसलिंग की गई ताकि उनके मन में चल रहे द्वंद्व को समझा जा सके। बीईओ चंद्रकुमार साहू ने स्कूल के शिक्षकों को सख्त हिदायत दी है कि वे बच्चों की हर छोटी-बड़ी गतिविधि पर पैनी नजर रखें। बच्चों के व्यवहार में आने वाले किसी भी बदलाव को तुरंत रिपोर्ट करने के निर्देश दिए गए हैं।
शिक्षा व्यवस्था और सुरक्षा पर खड़े हुए बड़े सवाल
यह घटना केवल बच्चों के हाथ काटने तक सीमित नहीं है, इसने हमारी मौजूदा शिक्षा व्यवस्था और स्कूल परिसर के भीतर की सुरक्षा पर भी गंभीर सवाल उठाए हैं। इतनी बड़ी संख्या में बच्चे स्कूल के भीतर या बाहर खुद को नुकसान पहुँचाते रहे और किसी को कानों-कान खबर तक नहीं हुई, यह प्रशासन की विफलता को दर्शाता है। क्या बच्चे किसी मानसिक तनाव में थे? क्या वे किसी के उकसावे में ऐसा कर रहे थे? या यह किसी तरह का ‘अटेंशन-सीकिंग’ व्यवहार था? इन सवालों के जवाब फिलहाल अनुत्तरित हैं।
बहरहाल, शिक्षा विभाग की विस्तृत जांच रिपोर्ट आने के बाद ही इस कदम के पीछे की असल वजह सामने आएगी। लेकिन तब तक, यह घटना हर माता-पिता और शिक्षक के लिए एक चेतावनी है कि वे अपने बच्चों के मौन को सुनने की कोशिश करें।
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