Dhirendra Shastri
Dhirendra Shastri: मध्य प्रदेश के छतरपुर स्थित विश्व प्रसिद्ध धार्मिक स्थल ‘बागेश्वर धाम’ के पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री एक बार फिर अपने तीखे और बेबाक बयानों के कारण चर्चा में हैं। राजस्थान की राजधानी जयपुर में एक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने अपनी भविष्य की योजनाओं का खुलासा करते हुए बताया कि वे जल्द ही बागेश्वर धाम में एक आधुनिक ‘गुरुकुल’ की स्थापना करने जा रहे हैं। इस गुरुकुल का मुख्य उद्देश्य नई पीढ़ी को प्राचीन भारतीय ज्ञान, वेदों की शिक्षा और सनातन संस्कृति के मूल्यों से जोड़ना होगा। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि केवल किताबी ज्ञान ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि संस्कारों का होना भी अनिवार्य है।
जयपुर में भक्तों को संबोधित करते हुए बाबा बागेश्वर ने हिंदुत्व और सनातनी पहचान को लेकर एक ऐसी टिप्पणी की, जिसने सोशल मीडिया पर बहस छेड़ दी है। उन्होंने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि “वेद न मानने वालों के बच्चे भविष्य में जावेद और नावेद बन जाएंगे।” धीरेंद्र शास्त्री का संकेत साफ था कि यदि हिंदू अपने बच्चों को अपनी जड़ों और धार्मिक ग्रंथों की शिक्षा नहीं देंगे, तो वे अपनी पहचान खो सकते हैं या धर्म परिवर्तन की ओर अग्रसर हो सकते हैं। उनके इस बयान को सनातनी समाज को जागरूक करने और अपनी परंपराओं के प्रति कट्टर रहने के आह्वान के रूप में देखा जा रहा है।
भोजन और जल की तुलना ज्ञान से करते हुए शास्त्री ने जीवन दर्शन की गहरी बात कही। उन्होंने कहा, “भोजन शरीर में केवल एक दिन तक टिकता है और पानी की प्यास एक घंटे में फिर लग सकती है, लेकिन जो विद्या और संस्कार हम ग्रहण करते हैं, वे जीवन भर हमारा साथ निभाते हैं।” उन्होंने तर्क दिया कि भौतिक सुख-सुविधाओं से अधिक आवश्यक बौद्धिक और आध्यात्मिक विकास है। यही कारण है कि वे बागेश्वर धाम की परंपरा को आगे बढ़ाने के लिए एक समर्पित शिक्षण संस्थान यानी गुरुकुल खोलने के लिए संकल्पबद्ध हैं।
धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री केवल अपने धाम तक ही सीमित नहीं रहना चाहते। उन्होंने भारत के कोने-कोने में गुरुकुल प्रणाली को पुनर्जीवित करने की वकालत की। उन्होंने कहा, “हम चाहते हैं कि देशभर में गुरुकुल स्थापित हों और हर सनातनी बच्चा गुरुकुल की शिक्षा-दीक्षा ले।” उनके अनुसार, पश्चिमी शिक्षा पद्धति बच्चों को आधुनिक तो बना रही है, लेकिन उन्हें अपने पूर्वजों के गौरवशाली इतिहास और वेदों के गूढ़ ज्ञान से दूर कर रही है। वे चाहते हैं कि आने वाली पीढ़ी वैज्ञानिक सोच के साथ-साथ मंत्रों और शास्त्रों की विद्या में भी पारंगत हो।
पंडित धीरेंद्र शास्त्री लगातार भारत को ‘हिंदू राष्ट्र’ बनाने की वकालत करते रहे हैं। उनका ताजा बयान भी इसी कड़ी का हिस्सा माना जा रहा है, जहाँ वे हिंदू समाज को संगठित और शिक्षित करने पर बल दे रहे हैं। जयपुर के इस संबोधन ने एक बार फिर यह स्पष्ट कर दिया है कि बाबा बागेश्वर धार्मिक प्रवचनों के साथ-साथ सामाजिक और सांस्कृतिक बदलाव के लिए भी सक्रिय रूप से काम करना चाहते हैं। उनके समर्थकों ने जहाँ इस पहल का स्वागत किया है, वहीं उनके बयान पर राजनीतिक गलियारों में प्रतिक्रियाओं का दौर भी शुरू हो गया है।
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