Dhruv Rathee Defamation Case : यूट्यूबर ध्रुव राठी एक बार फिर कानूनी विवाद को लेकर चर्चा में हैं। दिल्ली की साकेत कोर्ट में उनके खिलाफ मानहानि का मुकदमा दायर किया गया है। यह मामला कथित तौर पर भगवान राम और माता सीता के वनवास के दौरान मांस तथा शराब के सेवन से संबंधित दावे वाले एक वीडियो से जुड़ा है। सुप्रीम कोर्ट की एडवोकेट-ऑन-रिकॉर्ड अमिता सचदेवा के मुताबिक, इस मामले में अदालत से संबंधित सामग्री पर रोक लगाने और मानहानि के लिए हर्जाना दिलाने समेत कई राहत मांगी गई हैं। मामले की अगली सुनवाई 5 नवंबर को निर्धारित की गई है।
भगवान राम और माता सीता से जुड़े वीडियो पर विवाद
अमिता सचदेवा के अनुसार, ध्रुव राठी ने कुछ समय पहले एक वीडियो प्रकाशित किया था। याचिकाकर्ता का आरोप है कि वीडियो में भगवान राम और माता सीता के वनवास के दौरान मांस और शराब के सेवन को लेकर दावा किया गया था। इस सामग्री को लेकर पहले दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई थी। विवाद का मुख्य विषय वीडियो में किए गए कथित दावे और उससे जुड़ी सामग्री को लेकर उठाई गई आपत्ति है। हालांकि, इन आरोपों और वीडियो में प्रस्तुत बातों को संबंधित पक्षों के दावों के रूप में ही देखा जाना चाहिए।
दिल्ली हाईकोर्ट के आदेश के बाद हटाया गया था वीडियो
अमिता सचदेवा के मुताबिक, वीडियो को लेकर पहले दिल्ली हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया गया था। उनके अनुसार, हाईकोर्ट ने भारत सरकार को वीडियो हटाने का निर्देश दिया था। इसके बाद 15 जुलाई 2026 को भारत सरकार ने यूट्यूब को संबंधित वीडियो हटाने के लिए निर्देशित किया। इसके बाद उस याचिका का निपटारा कर दिया गया था। इस घटनाक्रम के बाद माना गया कि मूल वीडियो को लेकर उठाया गया विवाद अदालत की उस कार्यवाही के जरिए आगे बढ़ा था, लेकिन बाद में सामग्री के एक हिस्से को लेकर फिर से कानूनी कार्रवाई की जरूरत महसूस की गई।
तीन मिनट का वीडियो दोबारा अपलोड करने का आरोप
याचिकाकर्ता के अनुसार, मूल वीडियो हटाए जाने के बाद किसी व्यक्ति ने कथित तौर पर 21 मिनट के वीडियो में से लगभग तीन मिनट का हिस्सा काटकर दोबारा अपलोड कर दिया। इसके बाद याचिकाकर्ताओं ने एक बार फिर दिल्ली हाईकोर्ट का रुख किया। अमिता सचदेवा के मुताबिक, हाईकोर्ट ने उन्हें ध्रुव राठी के खिलाफ नया मुकदमा या याचिका दायर करने और उचित राहत मांगने की अनुमति दी थी। इसी अनुमति के आधार पर अब साकेत कोर्ट में मानहानि का मामला दाखिल किया गया है।
अदालत से घोषणा, रोक और हर्जाने की मांग
अमिता सचदेवा के अनुसार, साकेत कोर्ट में दायर मुकदमे में अदालत से घोषणा जारी करने, संबंधित सामग्री के प्रसार पर रोक लगाने और कथित मानहानि के लिए हर्जाना दिलाने की मांग की गई है। याचिकाकर्ता का पक्ष है कि वीडियो के दोबारा अपलोड किए गए हिस्से को लेकर कानूनी राहत की आवश्यकता है। हालांकि, मुकदमा दायर होना अपने आप में आरोपों के सही साबित होने का प्रमाण नहीं है। मामले में अदालत की सुनवाई और संबंधित पक्षों की दलीलों के बाद ही आगे की स्थिति स्पष्ट होगी।
तकनीकी समस्या के कारण पूरी नहीं हो सकीं दलीलें
मामले की सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता मकरंद नटकर वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से अदालत में पेश हुए। हालांकि, तकनीकी परेशानियों के कारण उनकी दलीलें पूरी नहीं हो सकीं। इसके बाद जिला जज ने सुनवाई आगे बढ़ाने के बजाय मामले को अगली तारीख के लिए सूचीबद्ध कर दिया। अब इस मुकदमे की अगली सुनवाई 5 नवंबर को होगी। उस दिन अदालत में मामले से जुड़ी दलीलें आगे बढ़ने की संभावना है।
5 नवंबर की सुनवाई पर टिकी निगाहें
ध्रुव राठी के खिलाफ दायर यह मुकदमा धार्मिक विषय से जुड़े वीडियो, ऑनलाइन सामग्री के दोबारा प्रसार और मानहानि के आरोपों को लेकर महत्वपूर्ण है। फिलहाल, याचिकाकर्ता की ओर से लगाए गए आरोपों और मांगी गई राहत पर अदालत का अंतिम फैसला सामने नहीं आया है। अगली सुनवाई में यह स्पष्ट हो सकता है कि अदालत इस मामले में आगे क्या कदम उठाती है। तब तक वीडियो से संबंधित दावों, कानूनी प्रक्रिया और सभी पक्षों के रुख को अलग-अलग समझना जरूरी होगा।