अंबिकापुर @thetarget365: राजमाता श्रीमती देवेंद्र कुमारी सिंहदेव शासकीय मेडिकल कॉलेज में संविदा कर्मचारियों की भर्ती को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। आरोप है कि कॉलेज प्रबंधन ने सेटअप के अनुरूप स्वीकृत पदों से चार गुना ज्यादा कर्मचारियों को संविदा पर नियुक्त किया है।
छत्तीसगढ़ प्रदेश स्वास्थ्य कर्मचारी संघ ने इस मुद्दे को पहले भी उठाया था। संघ का आरोप है कि कोरोना काल में वायरोलॉजी लैब के लिए स्वीकृत सात पदों की जगह 33 संविदा कर्मचारियों की भर्ती की गई। इनमें क्लीनिकल माइक्रोबायोलॉजिस्ट, सीनियर और जूनियर रिसर्च साइंटिस्ट, लैब टेक्नीशियन, डाटा एंट्री ऑपरेटर और लैब अटेंडेंट के पद शामिल हैं।
संघ के प्रदेश महामंत्री अनिल कुमार पांडेय ने पहले भी तत्कालीन डीन को इस बारे में शिकायत दी थी। हाल ही में इन संविदा कर्मचारियों की सेवाएं एक साल के लिए फिर बढ़ाई गईं, जिसकी जानकारी मिलते ही अनिल पांडेय ने वर्तमान डीन से भी शिकायत की। शिकायत के बाद डीन डॉ. अविनाश मेश्राम ने कर्मचारियों की सेवावृद्धि का आदेश निरस्त कर दिया।
शासन से मांगा गया मार्गदर्शन
डीन डॉ. मेश्राम ने कहा कि कोरोना काल में शासन की अनुमति से कर्मचारियों की भर्ती की गई थी। वर्तमान में भी टेस्टिंग कार्य जारी है, जिससे कर्मचारियों की आवश्यकता बनी हुई है। इस संबंध में शासन से मार्गदर्शन मांगा गया है और सहमति मिलने पर सेवाएं फिर से बढ़ाई जा सकती हैं।
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि जरूरत के अनुसार ही इन कर्मचारियों की सेवाएं ली गईं और इनका मानदेय नियमित मद से दिया जाता है।
इस मामले को लेकर मेडिकल कॉलेज प्रशासन और कर्मचारी संघ के बीच एक बार फिर तनातनी की स्थिति बन गई है। शासन के मार्गदर्शन पर ही अब आगे का निर्णय होगा।