Diwali- Chhath Train Ticket : दिवाली और छठ जैसे बड़े त्योहारों पर घर जाने के लिए लाखों यात्री पहले से ट्रेन टिकट बुक करते हैं। लेकिन त्योहार नजदीक आते ही ट्रेनों में सीटों की मांग तेजी से बढ़ जाती है। ऐसे में कई यात्रियों को कन्फर्म टिकट की जगह वेटिंग टिकट मिलता है। अगर आपका टिकट भी वेटिंग में है तो घबराने से पहले कुछ जरूरी बातें समझना बेहद जरूरी है। टिकट कन्फर्म होने की संभावना केवल वेटिंग नंबर पर निर्भर नहीं करती, बल्कि ट्रेन, यात्रा की तारीख, कोच, रूट और टिकट की श्रेणी भी इसमें अहम भूमिका निभाती है।
स्लीपर से फर्स्ट एसी तक कितनी वेटिंग हो सकती है कन्फर्म?
आमतौर पर स्लीपर क्लास में कोच और सीटों की संख्या ज्यादा होने के कारण वेटिंग टिकट आगे बढ़ने की संभावना बेहतर हो सकती है। सामान्य परिस्थितियों में स्लीपर क्लास में 100 से 150 तक की वेटिंग भी कन्फर्म हो सकती है। वहीं थर्ड एसी यानी 3AC में 50 से 80 तक की वेटिंग के कन्फर्म होने की संभावना बताई जाती है। दूसरी ओर, फर्स्ट एसी में सीटों की संख्या सीमित होती है। इसलिए यहां 5 से 10 वेटिंग होने पर भी कन्फर्मेशन मुश्किल हो सकता है। हालांकि, ये आंकड़े केवल सामान्य अनुमान हैं। किसी भी वेटिंग नंबर पर सीट मिलने की गारंटी नहीं होती।

GNWL, RLWL और PQWL में क्या होता है अंतर?
रेलवे टिकट पर वेटिंग नंबर के साथ अलग-अलग कोड भी लिखे होते हैं। ये कोड बताते हैं कि यात्री किस वेटिंग लिस्ट में शामिल है। GNWL यानी जनरल वेटिंग लिस्ट को आमतौर पर कन्फर्मेशन के लिहाज से बेहतर माना जाता है। यह सामान्य कोटे की सीटों से जुड़ी होती है।

RLWL यानी रिमोट लोकेशन वेटिंग लिस्ट उन यात्रियों को मिल सकती है, जो बीच के प्रमुख स्टेशनों से यात्रा करते हैं। इसका अलग कोटा होता है, इसलिए इसकी वेटिंग की स्थिति अलग तरीके से बदलती है। PQWL यानी पूल्ड कोटा वेटिंग लिस्ट कुछ निर्धारित स्टेशनों के बीच यात्रा करने वाले यात्रियों के लिए होती है। इसके अलावा TQWL यानी तत्काल वेटिंग लिस्ट भी होती है। इन सभी की कन्फर्मेशन प्रक्रिया अलग-अलग होती है। इसलिए GNWL 20 और RLWL 20 के कन्फर्म होने की संभावना समान नहीं मानी जा सकती।
दिवाली और छठ पर वेटिंग टिकट कन्फर्म होना क्यों मुश्किल?
त्योहारी सीजन में बिहार, उत्तर प्रदेश और दूसरे राज्यों की ओर जाने वाली ट्रेनों में यात्रियों की भारी भीड़ रहती है। इस दौरान लोग पहले से टिकट बुक कर लेते हैं और कैंसिलेशन भी सामान्य दिनों की तुलना में कम हो सकता है। यही वजह है कि सामान्य दिनों में कम वेटिंग पर कन्फर्म होने वाला टिकट त्योहारों के दौरान अटका रह सकता है। रेलवे यात्रियों की सुविधा के लिए विशेष ट्रेनें भी चलाता है। इसके अलावा टिकट बुक करते समय VIKALP विकल्प चुनने पर उपलब्धता के अनुसार दूसरी ट्रेन में सीट मिलने का अवसर मिल सकता है।

PNR नंबर से ऐसे चेक करें टिकट का स्टेटस
टिकट कन्फर्म हुआ है या अभी वेटिंग में है, इसकी जानकारी PNR नंबर से प्राप्त की जा सकती है। यात्री भारतीय रेलवे की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर अपना PNR दर्ज करके मौजूदा स्थिति देख सकते हैं। ऑनलाइन उपलब्ध कन्फर्मेशन प्रेडिक्शन को अंतिम फैसला नहीं समझना चाहिए, क्योंकि यह केवल अनुमान होता है।
चार्ट बनने के बाद वेटिंग टिकट का क्या होगा?
अगर ऑनलाइन बुक किया गया ई-टिकट चार्ट तैयार होने के बाद भी पूरी तरह वेटिंग में रहता है, तो रेलवे के नियमों के अनुसार वह अपने आप कैंसिल हो जाता है। ऐसे यात्रियों को यात्रा की अनुमति नहीं होती और टिकट का रिफंड लागू नियमों के अनुसार मिलता है। इसलिए दिवाली और छठ पर घर जाने की योजना बना रहे यात्रियों को केवल वेटिंग टिकट के भरोसे नहीं रहना चाहिए। बेहतर होगा कि वे समय रहते दूसरी ट्रेन, बस या अन्य यात्रा विकल्प भी तैयार रखें।


