अंबिकापुर @thetarget365 गर्भवती-शिशुवती माताओं के स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता को लेकर शासन स्तर पर तमाम प्रयास करने के बाद भी ग्रामीण अंचलों में लोग कितना जागरूक हैं, इसका जीता-जागता प्रमाण सूरजपुर जिला के भैयाथान विकासखंड अंतर्गत ग्राम भंवरखोह का पण्डो परिवार है। विशेष पिछड़ी जनजाति के पण्डो ग्रामीण ने मां-बाप और नाते-रिश्तेदार विहीन युवती को बिना विवाह के जीवन संगिनी के रूप में स्वीकार कर लिया, जिससे घूम-घूमकर जीवन का एक-एक पल काट रही युवती को जीने की राह तो मिल गई, लेकिन गर्भवती महिला स्वास्थ्य सुरक्षा के अभाव में गर्भ में पल रहे बच्चे के बाद खुद भी दम तोड़ दी। कहने को गांव में आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं व मितानिनों के माध्यम से गर्भवती माताओं के स्वास्थ्य सुरक्षा का ध्यान रखा जाता है, जच्चा-बच्चा की सुरक्षा के लिए समय पर टीकाकरण सहित अन्य सुविधाएं मुहैया कराई जाती हैं, लेकिन मृत पण्डो युवती सारी शासकीय स्वास्थ्य सेवाओं से कोसो दूर रही।
जानकारी के मुताबिक भैयाथान थाना क्षेत्र के ग्राम भंवरखोह के नेतलाल पण्डो की पहली पत्नी की मौत लगभग चार वर्ष पूर्व हो चुकी है। गांव की ही एतवरिया पण्डो 22 वर्ष के माता-पिता की मौत के बाद कोई नाते-रिश्तेदार भी नहीं थे, जिनके साथ रहकर वह जीवकोपार्जन कर सके। ऐसे हालातों के बीच युवती गांव में ही इधर-उधर घूमती और जहां कुछ खाने को मिल जाता खा लेती थी। इसी बीच एतवरिया घूमते-घूमते एक दिन तिहारो बाई के यहां पहुंच गई। माता-पिता की मृत्यु के बाद युवावस्था में लावारिस घूम रही समाज की लडक़ी को देखकर वृद्धा तिहारो को उस पर तरस आया और अपने भतीजा नेतलाल पण्डो के साथ पत्नी बनकर रहने का प्रस्ताव रखा, ताकि दोनों का अकेलापन दूर हो सके। युवती ने तिहारो बाई के इस प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया और दोनों पति-पत्नी की तरह साथ रहने लगे थे। दोनों के दांपत्य जीवन के बीच एतवरिया गर्भवती हो गई, लेकिन गर्भावस्था में जच्चा-बच्चा की सुरक्षा को लेकर किए जाने वाले जतन से वे अनजान थे। युवती को गर्भ धारण किए नौ माह हो गए, लेकिन इनके द्वारा न तो जच्चा-बच्चा की सुरक्षा के लिए कभी पौष्टिक आहार लिया और न ही दवा, इंजेक्शन और किसी प्रकार का जांच कराया। नेतलाल का कहना है कि उसकी पत्नी दिमागी रूप से बीमार रहती थी, जिस कारण उसे कुछ पता नहीं चला। वे सोच रहे थे कि बच्चा पेट में पल रहा है, जबकि बच्चे की गर्भ में मौत हो गई थी और काफी दिन होने के कारण बच्चा पेट में ही सड़-गल गया था। युवती के पेट में एकाएक तेज दर्द उठने पर वे 21 अगस्त को संजीवनी 108 एक्सप्रेस से उसे सीधे मेडिकल कॉलेज अस्पताल अंबिकापुर लेकर पहुंचे, यहां जांच में पता चला कि बच्चे की गर्भ में ही मौत हो गई है। ऑपरेशन करके चिकित्सकों की टीम ने गर्भ में गल चुके बच्चे को बाहर निकाला, वहीं प्रसूता की स्थिति गंभीर देखते हुए उसे अस्पताल के आईसीयू में भर्ती किया गया था। यहां उपचार के दौरान गुरूवार को दिन में 11 बजे उसकी मौत हो गई। अस्पताल से मिली सूचना पर पुलिस ने मृतिका के स्वजन का बयान लिया है। युवती की उम्र कम होने व लिव इन में साथ रहते पहली बार गर्भवती होने व मौत के कारण पुलिस ने इसकी जानकारी कार्यपालिक अधिकारी को दी थी। पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के बाद स्वजन को सौंप दिया।
Ambikapur News : अंबिकापुर के गांधीनगर थाना क्षेत्र से एक दिल दहला देने वाली वारदात…
Janjgir-Champa Double Murder: छत्तीसगढ़ के जांजगीर-चांपा जिले से एक दिल दहला देने वाली खबर सामने…
Chhattisgarh Rules Change Today: आज यानी 1 अप्रैल 2026 से नए वित्तीय वर्ष (FY 2026-27)…
Homemade Organic Pesticide: बागवानी यानी गार्डनिंग एक ऐसा सुकून भरा शौक है जिसमें हम पौधों…
Gold Silver Price Today: वित्त वर्ष 2026-27 के पहले ही दिन यानी 1 अप्रैल 2026…
Netanyahu's New Alliance: ईरान के साथ जारी भीषण युद्ध के बीच इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन…
This website uses cookies.