Strait of Hormuz
Strait of Hormuz: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अपने बेबाक और अक्सर विवादित बयानों के लिए जाने जाते हैं। फ्लोरिडा में आयोजित ‘फ्यूचर इन्वेस्टमेंट इनिशिएटिव प्रायोरिटी समिट’ के दौरान एक दिलचस्प वाकया हुआ, जब ट्रंप ने दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्ग ‘स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज’ को गलती से ‘स्ट्रेट ऑफ ट्रंप’ कह दिया। हालांकि, उन्होंने तुरंत अपनी इस गलती को सुधारा और मजाकिया लहजे में कहा कि वह ‘हॉर्मुज’ की बात कर रहे थे। ट्रंप ने चुटकी लेते हुए यह भी जोड़ा कि ‘फेक न्यूज’ वाले इसे एक बड़ी भूल की तरह दिखाएंगे, लेकिन असल में उनसे ऐसी गलतियां बहुत कम या न के बराबर होती हैं। उनके इस बयान ने कार्यक्रम में मौजूद लोगों का ध्यान खींच लिया।
अपने संबोधन के दौरान ट्रंप ने ईरान की वर्तमान स्थिति पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने दावा किया कि अमेरिकी प्रतिबंधों और रणनीतिक दबाव के कारण ईरान अब घुटनों पर है और बातचीत के लिए बेताब दिख रहा है। ट्रंप के अनुसार, ईरान ने हाल ही में समझौते की दिशा में सकारात्मक संकेत देते हुए तेल के कई जहाज भेजे हैं। उन्होंने कहा, “ईरान पर इतना दबाव है कि कोई भी देश ऐसी स्थिति में बातचीत की मेज पर आएगा। उन्होंने खुद स्वीकार किया है कि वे चर्चा के लिए तैयार हैं। पहले उन्होंने 8 जहाज भेजने की बात कही थी और अगले ही दिन वे रवाना हो गए, फिर 2 और जहाज जोड़कर कुल 10 जहाज भेजे गए।”
ट्रंप ने अंतरराष्ट्रीय मंच से यह स्पष्ट कर दिया कि अमेरिका और ईरान के बीच पर्दे के पीछे बातचीत का दौर जारी है। उन्होंने उम्मीद जताई कि यदि परिस्थितियां अनुकूल रहीं, तो जल्द ही एक बड़ा ऐतिहासिक समझौता देखने को मिल सकता है। हालांकि, इस संभावित डील के लिए ट्रंप ने एक कड़ी शर्त रखी है। उन्होंने साफ कहा कि किसी भी समझौते के सफल होने के लिए ‘स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज’ जलडमरूमध्य को पूरी तरह से खोलना अनिवार्य होगा। बता दें कि यह समुद्री मार्ग वैश्विक तेल आपूर्ति की जीवनरेखा माना जाता है, और ट्रंप चाहते हैं कि ईरान इस रास्ते पर किसी भी तरह का अवरोध पैदा न करे।
बातचीत की पेशकश के साथ-साथ ट्रंप ने कड़े तेवर भी दिखाए। उन्होंने ईरान को सीधी चेतावनी दी कि अगर ‘स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज’ को जल्द ही सुचारू रूप से नहीं खोला गया और व्यापारिक जहाजों का रास्ता साफ नहीं हुआ, तो अमेरिका सैन्य कार्रवाई से पीछे नहीं हटेगा। ट्रंप ने कहा कि ऐसी स्थिति में अमेरिका ईरान के पावर प्लांट्स (ऊर्जा केंद्रों) को ‘पूरी तरह तबाह’ कर सकता है। यह बयान दिखाता है कि ट्रंप प्रशासन एक तरफ कूटनीति का रास्ता अपना रहा है, तो दूसरी तरफ अपनी सैन्य शक्ति का डर दिखाकर ईरान को मजबूर करने की रणनीति पर काम कर रहा है।
ईरान के साथ जारी इस तनाव के बीच ट्रंप ने अपनी पूर्व निर्धारित समय सीमा (डेडलाइन) को 10 दिनों के लिए आगे बढ़ा दिया है। अब नई डेडलाइन 6 अप्रैल तय की गई है। ट्रंप का मानना है कि इस अतिरिक्त समय में बातचीत के जरिए कोई ठोस नतीजा निकल सकता है। हालांकि, स्थिति अभी भी पेचीदा बनी हुई है क्योंकि ईरान ने आधिकारिक तौर पर ट्रंप के साथ किसी भी प्रकार की बातचीत होने की खबरों का खंडन किया है। इतना ही नहीं, ईरान द्वारा इजरायल और पड़ोसी देशों पर छिटपुट हमले जारी रहने की खबरें भी आ रही हैं, जिससे इस पूरे क्षेत्र में अनिश्चितता का माहौल बना हुआ है।
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